प्रथम हंस कथा सम्मान (तस्वीरें)

प्रथम हंस कथा सम्मान (वर्ष 2012-13) के लिए कथाकार किरण सिंह का चयन किया गया. 
28 अगस्त 2013 को राजधानी दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उन्हें यह सम्मान, उनकी कहानी ‘संझा‘ के लिए दिया गया.

     सम्मान 'हंस' पत्रिका के संपादक राजेन्द्र यादव के हाथों दिया गया तथा कार्यक्रम में वरिष्ठ आलोचक अर्चना वर्मा तथा युवा आलोचक राजेश राव ने किरण सिंह की कहानी पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन युवा कथाकार विवेक मिश्र ने किया।

     हंस पत्रिका के संपादक मंडल ने अगस्त 2012 से जुलाई 2013 के दौरान हंस में प्रकाशित कहानियों में से 'संझा' को सर्वाधिक योग्य पाया और इस पुरस्कार के लिए उनका चयन किया.

       कार्यक्रम की शुरूआत 'हंस' के संयुक्त संपादक संजय सहाय के वक्तव्य से हुई जिसमें उन्होंने कहा कि कहानी 'संझा' एक स्त्री-हिजड़े के माध्यम से हमारी समाजिकता के झूठों और उनके विरोध का अनूठा पाठ है। इसकी वृहन्नला नायिका समाज के हाशिए की प्रतिनिधि है, जिसकी गहरी जिजीविषा, अनुभव का तीखापन और अवांछित वजूद उसे एक त्रासद किरदार बना सकते थे, लेकिन किरण सिंह ने उसे जुझारूपन के एक रूपक में तब्दील किया है। विषय का प्रवर्तन करते हुए कहानीकार विवेक मिश्र ने कहा कि 'हंस' में छपने वाली कहानियों का खुरदुरापन, उनका देशज होना, उनका एक स्वीकृत समाज और संस्कृति से बहिस्कृत होना, उनका हाशिए से उठके साहित्य में आना ही उन कहानियों को विशेष बनाता है और किरण सिंह की 'संझा' ऐसी ही एक कहानी है। यह उस सन्धिकाल की कहानी है जहाँ स्त्री ही नहीं थर्ड जेन्डर भी एक विस्फोट के साथ अपने अधिकारों के लिए उठ खड़ा होता है। युवा आलोचक राजेश राव ने कहा कि यह कहानी सिर्फ़ एक हिजड़े की कहानी नहीं है यह बदलते समय में भी मुख्यधारा से कटे समकालीन समय में भी पुरातन मान्यताओं में जीते जीते लोगों की कहानी है। यह कहानी जाति,धर्म ही नहीं लिंग भेद से उठकर मनुष्यता का पाठ पढ़ाती है। वरिष्ठ आलोचक अर्चना वर्मा ने कहा कि यह कहानी कर्म की कहानी है, भाग्य पर कर्म की विजय की कहानी। नायिका वैदकी को अपने कर्म के रूप में चुनती है और उसी को संघर्ष का औजार बनाती है।

       किरण सिंह ने अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा कि 'संझा' कहानी में मरती नहीं है, वह मर भी नहीं सकती क्योंकि हक़ीकत में संझा मेरे अपने ननिहाल में मेरे ममरे भाई के रूप में जिन्दा है। उन्होंने कहा कि मर जाना ही संघर्षशील जीवन का प्रारब्ध नहीं है। इसके रास्ते जीतना और उस जीत की स्थापना करना भी कर्म के माध्यम से सम्भव है। अन्त में राजेन्द्र जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि पहले पहल मुझे लगा कि किरण सिंह की कहानियों में नई कहानियों जैसा कुछ है जिसकी वजह से ये लोगों को पसन्द आ रही हैं पर 'कथा सावित्री, सत्यवान की' के बाद 'संझा' पढ़ने पर मुझे लगा कि उनकी हर कहानी अलग है और उससे जूझने के लिए उनके पास हर बार नई भाषा भी होती है। पिछले दिनों अधिकांश महिला लेखकों की कहानियाँ पढ़ते हुए लगा कि उनमें विषय का दोहराव बहुत है। वह आधुनिक जीवन में आई नई आर्थिक स्वतन्त्रता से बने नारी के संबंधों के आसपास ही घूमती है पर किरण की हर कहानी का विषय अलग है। कार्यक्रम के अन्त में वेदान्त सुधीर और संगम पाण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


हंस कथा सम्मान, कथा मासिक हंस की ओर से वर्ष 2013 से प्रारंभ किया गया. सम्मान के रूप में 11 हजार रुपये की राशि दी जानी निर्धारित है. यह सम्मान प्रतिवर्ष अगस्त से जुलाई के दौरान हंस में प्रकाशित होने वाली कहानियों में से चयनित की गई सर्वश्रेष्ठ कहानी को दिया जाएगा.


मैत्रेयी पुष्पा , राजेन्द्र यादव जी

मैत्रेयी पुष्पा , राजेन्द्र यादव जी

राजेन्द्र यादव जी, अशोक चक्रधर

राजेन्द्र यादव जी व मुक्ता

राजेन्द्र यादव जी व किरण सिंह



मेहमान 

मेहमान 

मेहमान 

मेहमान 

विवेक मिश्र, किरण सिंह, राजेन्द्र यादव जी, अर्चना वर्मा, संजय सहाय, राजेश राव

किरण सिंह, राजेन्द्र यादव, अर्चना वर्मा

किरण सिंह, अर्चना वर्मा, राजेन्द्र यादव


मेहमान
अनिल मीत (बाएं से तीसरे)

राकी गर्ग


सुशील सिध्हार्थ, सुमन केशरी, अल्पना मिश्र

प्रियदर्शन

श्याम सखा 'श्याम'

रूपा सिंह, शोभा मिश्र

कृष्ण बिहारी

अमृता बेरा, अशोक गुप्ता


संजय नीलम

राजेश राव

मेहमान 

रूपा सिंह

श्याम सखा 'श्याम', गरिमा वोहरा, प्रेम जनमेजय

रचना यादव

किरण सिंह

विवेक मिश्र

किरण सिंह

प्रेम जनमेजय

गरिमा वोहरा

अर्चना वर्मा

राजेन्द्र यादव

राजेन्द्र यादव

अमृता बेरा, अशोक गुप्ता

अजय नावरिया

संजय सहाय

वेदान्त सुधीर
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
नासिरा शर्मा के उपन्यास 'शाल्मली’ के बहाने स्त्री विमर्श पर चर्चा —  रोहिणी अग्रवाल
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
भवतु सब्ब मंगलं  — सत्येंद्र प्रताप सिंह | #विपश्यना
अम्मा की डायरी - वंदना राग की कहानी |  Amma's Diary - Short Story by Vandana Rag
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
पानियों पर लिखे बेवतन लोगों के अफ़साने — कहानी — मधु कंकरिया | Hindi Story on Stranded Pakistanis by Madhu Kankaria
गोल्डन जुबिली कहानी - रवीन्द्र कालिया: नौ साल छोटी पत्नी