48वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार तेलुगु कथाकार डॉ. रावूरि भरद्वाज को ravuri bharadwaja selected for jnanpith award 2012

 तीनमूर्ति भवन सभागार, नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर, 2013

Jnanpith award 2012 to Ravuri Bharadwaja साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारतीय ज्ञानपीठ का वर्ष 2012 का ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ तेलुगु के सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. रावूरि भरद्वाज को नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय सभागार, नयी दिल्ली में सुप्रसिद्ध सरोदवाद उस्ताद अमजद अली खाँ के कर कमलों द्वारा प्रदान किया गया।

       भारतीय ज्ञानपीठ के प्रबन्ध न्यासी साहू अखिलेश जैन ने डॉ. रावूरि भरद्वाज का पुष्प गुच्छ से स्वागत किया. दीप प्रज्वलन के बाद भारतीय ज्ञानपीठ के आजीवन न्यासी श्री आलोक प्रकाश जैन ने स्वागत भाषण में कहा कि तेलुगु के शीर्षस्थ कथाकार डॉ. रावूरि भरद्वाज मनुष्य जीवन की संवेदनशील अभिव्यक्ति के लिए विख्यात हैं। प्रेमचंद की तरह इनकी रचनाओं में आदर्शोन्मुखी यथार्थवाद की झलक मिलती है। 

       ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रवर परिषद् के अध्यक्ष, सीताकान्त महापात्र ने कहा कि डॉ. रावूरि भरद्वाज तेलुगु साहित्य में श्री चालम के उत्तराधिकारी ही नहीं है, अपनी अनोखी शैली, कहन, चरित्र-चित्रण और कथा-बनावट की दृष्टि से अपनी अलग पहचान भी रखते हैं।


       अपने पुरस्कार स्वीकारोक्ति भाषण में डॉ. भरद्वाज ने आभार प्रकट करते हुए कहा कि मात्र आदर्श का पालन करना ही नहीं, उसपर चलते हुए ही अपने उद्देश्य की प्राप्ति करना ही आदर्श की स्थापना करना है।मेरी रचनाओं को ज्ञानपीठ ने जो सम्मान दिया है यह उनके चयन की निष्पक्षता को दर्शाता है। इस सम्मान ने मुझे बहुत बल दिया है और मेरे सामने चुनौती रख दी है कि मैं अपने साहित्य में सामाजिक प्रतिबद्धता को उसी तरह निभाता चलूँ जैसी मेरी पहचान बनी है और जो मेरी लेखन-शक्ति है। 

उस्ताद अमजद अली खाँ ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह में आना मेरे लिए गर्व की बात है। साहित्य, •ला और संगीत का मूल स्वर और उद्देश्य एक होता है। यहाँ साहित्य और संगीत का मधुर मिलन देखने को मिला। उस्ताद अमजद अली खान ने कहा की उनके गुरु कहा करते थे की इस ब्रह्माण्ड में दो दुनिया है, एक शब्दों की दुनिया और दूसरी स्वर की दुनिया. इन दो दुनिया में से किसी एक को चुनना होगा. इन दोनों दुनिया को एक साथ चुनना बहुत कठिन होता है, मैंने संगीत की दुनिया चुना. 

कार्यक्रम के अन्त में भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक श्री रवीन्द्र कालिया ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि डॉ. रावूरि भरद्वाज आज तेलुगु के ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारतीय साहित्य की श्रेष्ठता के प्रतीक बन चुके हैं। वे अपने भारतीय साहित्य की अमूल्य निधि हैं और उनकी कीर्ति देश-विदेश तका फैली हुई है। भारतीय ज्ञानपीठ सम्मान स्वीकार करके उन्होंने हमारा मान बढ़ाया है। 

प्रबन्ध न्यासी साहू अखिलेश जैन की पहल पर इस बार साहित्य का यह सर्वोच्य पुरस्कार एक संगीतकार द्वारा प्रदान किया गया है जो कलाओं के सामंजस्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

सम्मान समारोह में अनेक गणमान्य व्यक्ति, साहित्यकार, पत्रकार उपथित थे।
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012 Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012

Ravuri Bharadwaja Jnanpith Award 2012
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

  1. भारतीय ज्ञानपीठ पुरुस्कार साहित्य के नोवुल पुरुस्कार से इस मायने में श्रेष्ठ है कि वह राजनीतिक रुझान के बजाय सिर्फ साहित्यिक उत्कृष्टता को ही चुनता है । .. अधिसम्माननीय रेबूरि भरद्वाज को कोटिश: वधाइयां । ... vikram singh bhadoriya.

    जवाब देंहटाएं

ये पढ़ी हैं आपने?

दिनेश कुमार शुक्ल की तीन कवितायें | Poems - Dinesh Kumar Shukla (hindi kavita sangrah)
सुंदर बदन सुख सदन श्याम को - मनमोहक - सूरदास का भजन / अश्विनी भिड़े-देशपांडे का गायन
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
नासिरा शर्मा के उपन्यास 'शाल्मली’ के बहाने स्त्री विमर्श पर चर्चा —  रोहिणी अग्रवाल
सभी के प्रति द्वेष के साथ - अनंत विजय / Anant Vijay on Khushwant Singh
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
भवतु सब्ब मंगलं  — सत्येंद्र प्रताप सिंह | #विपश्यना
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل