advt

उनके (जगदम्बा प्रसाद दीक्षित) पासंग हिन्दी साहित्य में न कोई था, न है, न होगा - मृदुला गर्ग | Mridula Garg remembering Jagdamba Prasad Dixit

मई 26, 2014

जगदम्बा प्रसाद दीक्षित

जन्म 1934 बालाघाट (महाराष्ट्र) - मृत्य 20 मई  बर्लिन 

प्रज्ञा और करुणा के अद्भुत मिश्रण के जादूगर को मेरी नतमस्तक श्रद्धांजलि

मृदुला गर्ग 

जगदम्बा प्रसाद दीक्षित प्रतिरोध की प्रज्वलित मशाल की तरह थे, साहित्य में और अपने जीवन में भी। इमरजैन्सी के दौरान जेल काटी, हर प्रकार की सस्ती लोकप्रियता से कन्नी काटी। और उस प्रतिरोध को, अपनी अनन्य प्रज्ञा और कलाकौशल से मिला कर, कालजयी उपन्यास व कथानक रचे। हिन्दी में प्रतिरोधी साहित्य पढ़ना हो तो उनके दो उपन्यास पढने ही पढ़ने होंगे। इतिवृत और अकाल। मेरा मानना है, गहराई में जा कर देखें तो वे एक ही उपन्यास के दो खण्ड मालूम होंगे। इतिवृत में उन निर्णायक क्षणों की विवेचना है, जब द्वितीय पंचवर्षीय योजना के तहत गांवों को हाशिये पर धकेलने की आर्थिक नीति बनी थी। आज जब इतनी बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं और प्रेमचन्द के महाजनों की जगह ख़ुद सरकार और देसी-विदेशी बैंकों ने ले ली है तो इस स्थिति की शुरुआत कब और कैसे हुई, उसका पठन-मनन करना निहायत ज़रूरी है। इतिवृत ने बहुत पहले इस शुरुआत का आकलन कर दिया था। उसकी परिणति को अपने त्रासद शिखर पर पहुँचने में क़रीब चालीस बरस लग गये और उतने ही दीक्षित जी को अपने उपन्यास की अगली कड़ी, अकाल लिखने में लगे। फिर भी अकाल का प्रकाशन उस परिणति के चरम पर पहुँचने से बहुत पहले हो गया था। यानी एक बार फिर वे भविष्यदृष्टा की तरह उभर कर आये थे।

          वे अपने उपन्यास मुर्दाघर के लिए विख्यात हैं। शायद वह उपन्यास देश के लब्धप्रतिष्ठित नेताओं की अदूरदर्शिता पर उस तरह प्रहार नहीं करता जैसे इतिवृत और अकाल। इसलिए वे बेबाक सत्य और विवेचन से डरे हमारे आलोचकों को फिर भी स्वीकार्य हो गया पर इन उपन्यासों का नीतिगत प्रतिरोध उन्हें बर्दाश्त नहीं हो पाया। 

          दीक्षित जी मात्र प्रतिरोध और प्रज्ञा की मशाल भर नहीं थे। वे जितने बेबाक, उग्र और ईमानदार थे उतने ही भाव प्रवण भी। एक हिजड़े पर लिखी उनकी कहानी मुहब्बत उसका प्रमाण है और तभी न वे फ़िल्मों के लिए प्रेम गीत भी लिखा करते थे!

          उनसे संवाद के स्वाद के तो कहने ही क्या थे। उनके साथ संवाद का हर पल, हर क्षण, हर वाक्य भीतर ज्वालामुखी धधका देता था, पता नहीं विचार के कितने बन्द कपाट खुल जाते थे; कितने दिन उनकी कही बातें सोचते-विचारते गुज़र जाते थे। उन्हें एक बृहद् ग्रन्थ भारत की सभ्यता और आर्थिक स्थिति के अन्तर्सम्बन्ध पर लिखना चाहिए था, जो उन्होंने शुरु तो किया पर खत्म नहीं। मैं समझती हूँ कि उनके पासंग हिन्दी साहित्य में न कोई था, न है, न होगा।

          प्रज्ञा और करुणा के अद्भुत मिश्रण के जादूगर को मेरी नतमस्तक श्रद्धांजलि।

मृदुला गर्ग
26 मई 2014
नई दिल्ली

टिप्पणियां

ये पढ़े क्या?

{{posts[0].title}}

{{posts[0].date}} {{posts[0].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[1].title}}

{{posts[1].date}} {{posts[1].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[2].title}}

{{posts[2].date}} {{posts[2].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[3].title}}

{{posts[3].date}} {{posts[3].commentsNum}} {{messages_comments}}

ये कुछ आल टाइम चर्चित

कहानी: दोपहर की धूप - दीप्ति दुबे | Kahani : Dopahar ki dhoop - Dipti Dubey

अरे! देखिए वो यहाँ तक कैसे पहुंच गई... उसने जल्दबाज़ी में बाथरूम का नल बंद कि…

जनता ने चरस पी हुई है – अभिसार शर्मा | Abhisar Sharma Blog #Natstitute

क्या लगता है आपको ? कि देश की जनता चरस पीए हुए है ? कि आप जो कहें वो सर्व…

मुसलमान - मीडिया का नया बकरा ― अभिसार शर्मा #AbhisarSharma

अभिसार शर्मा का व्यंग्य मुसलमान - मीडिया का नया बकरा …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

कायरता मेरी बिरादरी के कुछ पत्रकारों की — अभिसार @abhisar_sharma

मैं सोचता हूँ के मोदीजी जब 5, 10 या 15 साल बाद देश के प्रधानमंत्री नहीं …

साल दर साल

एक साल से पढ़ी जाती हैं

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

हिंदी कहानी : उदय प्रकाश — तिरिछ | uday prakash poetry and stories

उदय प्रकाश की कहानी  तिरिछ  तिरिछ में उदय प्रकाश अपने नायक से कहल…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

हिन्दी सिनेमा की भाषा - सुनील मिश्र

आलोचनात्मक ढंग से चर्चा में आयी अनुराग कश्यप की दो भागों में पूरी हुई फिल…

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

महादेवी वर्मा की कहानी बिबिया Mahadevi Verma Stories list in Hindi BIBIYA

बिबिया —  महादेवी वर्मा की कहानी  mahadevi verma stories list in hind…