September 2014 - #Shabdankan
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साहित्यिक, सामाजिक ई-पत्रिका Shabdankan


औरत ज़िंदगी को पढ़ती हैं - वर्तिका नंदा | Aadhi Aabadi's Discussion on Indian Women & Media

Tuesday, September 30, 2014 0
Aadhi Aabadi's Discussion on Indian Women & Media 14 सितम्बर हिंदी दिवस पर कई कार्यक्रमों की बहार थी। लेकिन, इन सबके बीच एक अलग ...
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मुक्तिबोध : एक संस्मरण हरिशंकर परसाई |पढ़ें साथ यूनुस ख़ान की आवाज़ में सुनें | Muktibodh: Ek Sansmaran' [Muktibodh: A Memoir]

Friday, September 26, 2014 0
मुक्तिबोध : एक संस्मरण हरिशंकर परसाई  भोपाल के हमीदिया अस्पताल में मुक्तिबोध जब मौत से जूझ रहे थे, तब उस छटपटाहट को देखकर मोहम्मद अली ...
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तीन ग़ज़लें- एक बह्र - प्राण शर्मा | Pran Sharma's 3 New Ghazals in the same meter

Thursday, September 25, 2014 8
तीन ग़ज़लें- एक  बह्र  प्राण शर्मा 1 कानों  में रस  सा  घोलती रहती  हैं बेटियाँ मुरली  की  तान  जैसी  सुरीली  हैं  बेटियाँ क्योंकर न...
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देखते ही देखते -तब और अब : निर्मला जैन | Time and Changes - Nirmala Jain

Wednesday, September 24, 2014 0
सबसे मार्मिक प्रसंग डॉ0 नामवर सिंह के एपेन्डिसाइटिस के ऑपरेशन का था। जब वे दिल्ली आकर ‘जनयुग’ के बाद राजकमल प्रकाशन के साहित्य-सलाहकार ...
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रावण बाबा नम: - चम्पा शर्मा | Ravana Baba Namah

Tuesday, September 23, 2014 2
राजस्थान पत्रिका से सेवानिवृत्त मुख्य उपसंपादक सुश्री चम्पा शर्मा अब स्वतंत्र लेखन करती हैं। 1985 से 2008 तक ' दीदी की चिट्ठी ’ स...
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काश, सिर्फ चुलबुली होती सोनम - दिव्यचक्षु | Wish, Sonam was just bubbly - 'Khoobsurat' review - Divya-Chakshu

Tuesday, September 23, 2014 0
फिल्म समीक्षा काश, सिर्फ चुलबुली होती सोनम दिव्यचक्षु खूबसूरत निर्देशक- शशांक घोष कलाकार- सोनम कपूर, फवाद खान, रत्ना प...
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