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साहित्य अकादमी ने प्रो० कालबुर्गी की हत्या की निंदा की | Sahitya Akademi condemned the killing of Kalburgi

अक्तू॰ 23, 2015

साहित्य अकादमी ने प्रो० कालबुर्गी की हत्या की निंदा की

साहित्य अकादमी ने प्रो० कालबुर्गी की हत्या की निंदा की है और उनकी हत्या और बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ़ साहित्यकारों के विरोध से सहमति प्रकट किया है।
साहित्यकारों के अकादमी की चुप्पी के खिलाफ़ बढ़ते प्रतिरोध को शांत करने के लिए बुलाई गयी साहित्य अकादमी की आपात बैठक आज संपन्न हुई।


साहित्य अकादमी ने प्रो० कालबुर्गी की हत्या की निंदा की | Sahitya Akademi condemned the killing of Kalburgi
Photo Courtesy Ashutosh Kumar

बैठक से पहले, लेखकों और समर्थकों ने मुंह में काल कपड़ा और बाहों में काली पट्टी डालकर एकजुटता मार्च का आयोजन किया था। जिसमे विभिन्न भाषाओं के साहित्यकार विशाल बैनर के साथ श्रीराम सेंटर, सफदर हाशमी मार्ग से साहित्य अकादमी भवन तक मौन जुलूस के लिए जुटे थे. उन्होंने अकादमी को ज्ञापन दिया जिसमे उन्होंने मांग की है कि वह (साहित्य अकादमी) लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और उनकी  रक्षा के लिए कठोर कदम उठाने के वचन का प्रस्ताव पारित करेगी।

(खबर : साभार NDTV.com)

NEW DELHI:  Breaking a steely silence in the face of unrelenting protests, literary body Sahitya Akademi has condemned the killing of Kannada Writer MM Kalburgi, expressing solidarity with authors and poets and urging them to take back awards they have returned.

Concluding an emergency meeting today, the Sahitya Akademi took to pacifying eminent writers who have taken to protesting 'rising intolerance' in the country and spoken out against the body's silence.

Ahead of the meeting, writers and their supporters held a solidarity march in New Delhi with black gags and arm bands.

Writers from different languages converged for the silent march carrying huge banners from Sri Ram Centre at Safdar Hashmi Marg to the Sahitya Akademi building, where they submitted a memorandum to the Akademi demanding that it pass a resolution pledging to take stern steps to safeguard the freedom of speech and right to dissent of the writers.

More than 40 writers from across the country had over the past few weeks announced their decision to return their Sahitya Akademi awards and stepped down from official Akademi positions to protest the "growing intolerance" in the country and fuelling an intensifying national debate.

In the recent weeks, lynchings over alleged cow slaughter and beef consumption have been reported from several parts of the country; ink and paint attacks have taken place on columnist Sudheendra Kulkarni and a lawmaker from Jammu and Kashmir and over the last one year, three well-known rationalists, including Mr Kulkarni, were murdered.

The government has shrugged off the protest by writers over the incidents with Union Finance Minister Arun Jaitley calling it a "manufactured paper rebellion".
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