लघुकथा — बरसात — इरा टाक @tak_era


Hindi short story 'Barsat' by Era Tak

बरसात / Barsat

इरा टाक / Era Tak



— कब तक एक ही बात को लेकर बैठी रहोगी ? कितनी बार माफ़ी  मांग तो चुका हूँ। अब बिना बात ही अपना और मेरा मूड खराब किये बैठी हो।




— काश माफ़ करना इतना आसान होता !  तुमसे ज्यादा तकलीफ मुझे है, न भूल पाती  हूँ और न याद करना चाहती हूँ । कभी सोचा नहीं था तुम्हें प्रेम करना मेरे  जीवन की सबसे बड़ी तकलीफ बन जायेगा। अब तो जैसे खुद की साँसे बचाने  को तुम्हारे साथ हूँ... क्योंकि मैंने खुद से ज्यादा चाहा है तुम्हें । लेकिन अब कोई उमंग नहीं  रही।

— अब ख्याल रखता तो हूँ तुम्हारा। एक बार विश्वास तो करो! बीती बातें भूल जाओ प्लीज !

— कोशिश कर रही हूँ। पर बरसात में अक्सर पुराने ज़ख्म भी हरे हो जाते हैं। और तुम्हारे दिए हुए घाव तो अभी ताज़ा ही हैं।

Era Tak

००००००००००००००००


nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
मन्नू भंडारी की कहानी — 'रानी माँ का चबूतरा' | Manu Bhandari Short Story in Hindi - 'Rani Maa ka Chabutra'
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
Book Review: मानस का हंस की आलोचना — विशाख राठी
शिवानी की कहानी — नथ | 'पिछली सदी से जारी स्त्री स्वाधीनता की खामोश लड़ाई' - मृणाल पाण्डे
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
बिहारियों का विस्थापन: ‘समय की रेत पर’ की कथा