असग़र वजाहत की कहानी शिल्पी और रौनक की ज़ुबानी #DilliBol



Dilliबोल #1

असग़र वजाहत वाया शिल्पी मारवाह एंड आरजे रौनक

#dillibol 1 asghar wajahat shilpi marwaha rj raunac




#DilliBol हिंदी के मशहूर लेखक, नाटककार, चिंतक, एक बेहतरीन इंसान और प्रिय दोस्त असग़र वजाहत साहब का लेखन बेमिसाल है। हम सब उन्हें पढ़ते रहे हैं, अब उनके लिखे का ड्रामेटाइज़्ड-पाठ यानी नाट्य-रूपांतरित पाठ ― शिल्पी मारवाह, जो एक बेहतरीन स्टेज आर्टिस्ट है और जिन्हें आपने फिल्म रांझणा में देखा भी है और हम सबके प्रिय बउआ यानी आरजे रौनक, साथ मिलकर, ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर और शब्दांकन की प्रस्तुति Dilliबोल #1 में शुक्रवार, 23 दिसंबर की शाम 5:30 बजे ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर, N-81, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में करेंगे।




#DilliBol आप सब आमंत्रित हैं, असग़र वजाहत साहब भी वहां मौजूद रहेंगे, चाय पर उनके साथ गपशप भी होगी साथ होंगे दिल्ली के नंबर वन थिएटर डायरेक्टर अरविन्द गौड़ जी ।

तो भाइयों और बहनों भूलिएगा नहीं 23 दिसंबर...शुक्रवार...वक्त शाम का 5:30...जगह दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस में ऑक्सफ़ोर्ड बुकस्टोर।

#DilliBolऑक्सफ़ोर्ड बुकस्टोर  से नीता श्रीधरन और शब्दांकन  से मैं भरत तिवारी आपका इंतज़ार करेंगे।

-----------------------
 #DilliBol मेट्रो: ब्लू लाइन: बाराखम्भा - गेट न० 2 और राजीव चौक - गेट न० 5



(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
००००००००००००००००
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

Hindi Story आय विल कॉल यू! — मोबाइल फोन, सेक्स और रूपा सिंह की हिंदी कहानी
कोरोना से पहले भी संक्रामक बीमारी से जूझी है ब्रिटिश दिल्ली —  नलिन चौहान
गिरिराज किशोर : स्मृतियां और अवदान — रवीन्द्र त्रिपाठी
मन्नू भंडारी की कहानी — 'रानी माँ का चबूतरा' | Manu Bhandari Short Story in Hindi - 'Rani Maa ka Chabutra'
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
मन्नू भंडारी की कहानी  — 'नई नौकरी' | Manu Bhandari Short Story in Hindi - 'Nayi Naukri' मन्नू भंडारी जी का जाना हिन्दी और उसके साहित्य के उपन्यास-जगत, कहानी-संसार का विराट नुकसान है
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
मन्नू भंडारी, कभी न होगा उनका अंत — ममता कालिया | Mamta Kalia Remembers Manu Bhandari
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh