गायकवाड़ पर एयरलाइन्स का बैन ठीक नहीं ― ओम थानवी



न्यायबुद्धि की सुनें ― ओम थानवी

बेचारे सांसद को कल रेलगाड़ी से मुंबई लौटना पड़ा। 

शिवसेना के सांसद रवींद्र गायकवाड़ ने एयर इंडिया में गुंडागर्दी कर अपनी नाक कटवाई। पार्टी की भी ऐसी फ़ज़ीहत करवाई कि वह भी उनका साथ न दे सकी। हवाई कंपनियों ने अपूर्व एकता दिखाई। उनकी फ़ेडरेशन ने तय किया कि उन्हें किसी विमान में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। बेचारे सांसद को कल रेलगाड़ी से मुंबई लौटना पड़ा।

न्यायबुद्धि यह कहती है कि क़ानून ख़ुद हाथ में लेकर अपराधी को उसके बुनियादी अधिकार से वंचित करना भी न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं। ― ओम थानवी 

सांसद के साथ हुए इस सलूक से मज़ा तो आया, पर हवाई कम्पनियों का फ़ैसला मुझे उचित नहीं जान पड़ता। गुंडागर्दी का मामला का पुलिस में दिया जा चुका है। हालाँकि पुलिस ऐसे मामलों में 'ऊपर का हुक्म' जब तक न हो, हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है। सांसद है, शायद यह सोचकर भाजपा सरकार, स्पीकर नरमी ही बरत रहे हैं। 'आप' जैसी किसी दुश्मन पार्टी का नेता भी नहीं है, भगवा लम्पट ही तो है।



लेकिन इसका मतलब यह नहीं हो सकता कि सांसद के आवागमन पर वे व्यवसायी रोक लगा दें, जिन्हें उनका बरताव भविष्य का भी ख़तरा लगता हो। यों देखें कि एक मूर्ख जनप्रतिनिधि किसी डाक्टर पर हाथ उठा देता है। डाक्टर समुदाय अपना प्रतिरोध ज़ाहिर करता है। मामला दर्ज़ हो जाता है। कभी-कभी गिरफ़्तारी की माँग पर हड़ताल भी हो जाती है। पर क्या यह उचित होगा कि अस्पतालों में डाक्टरों के संगठन द्वारा उस जनप्रतिनिधि का कहीं पर इलाज न करने का सामूहिक निर्णय लागू कर दिया जाए?

बदमाश को इससे सबक़ तो मिलेगा, पर न्यायबुद्धि यह कहती है कि क़ानून ख़ुद हाथ में लेकर अपराधी को उसके बुनियादी अधिकार से वंचित करना भी न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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