मोदीजी और चीन की लाल आँखें — अभिसार शर्मा

चीन को लाल आंख दिखाने की नसीहत देने वाले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी क्या ये बताने की कृपा करेंगे कि वो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्या मशविरा देंगे?

Photo: Peter Hapak for TIME

 अभिसार शर्मा का ब्लॉग

अगर डोकलाम के बिल्कुल करीब चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने ना सिर्फ सुरक्षा चौकियों बना ली, बल्कि हेलीपैड भी बना लिए हैं तो ये बात किसी के लिए चिंता का सबब क्यों नहीं? ये बात किसी और ने नहीं बल्कि संसद में खुद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने कही है. निर्मलाजी कहती हैं के — भारत के आसपास के समुद्री इलाके में भी भारत चीन की महत्वाकांक्षाओं से परिचित है. परिचित है? और उसके बाद क्या?






क्या भारत सरकार ये उम्मीद कर रही है के चीन सिर्फ चौकियां और हेली पैड बना कर खामोश रहेगा? क्या वो नहीं जानता के एक बार शीतकाल ख़त्म होने के बाद सर्दियाँ ख़त्म होने के बाद, चाइना अपनी ताज़ा सामरिक और सैन्य शक्ति के साथ फिर धावा बोलेगा? ड्रैगन पर ऐतबार किया जा सकता है क्या?




क्या भारत सरकार को अंदाज़ा है के ये बस चंद दिनों की बात है. चीन को लाल आंख दिखाने की नसीहत देने वाले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी क्या ये बताने की कृपा करेंगे कि वो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्या मशविरा देंगे? लाल आंख ज़रूर, मगर ये लाल आंख उस अदृश्य मुक्के का नतीजा है जो चीन हमें मार चुका है और हम कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं. इसका प्रमाण है कैबिनेट सेक्रेटरी का वो नोट जो विदेश सचिव विक्रम गोखले से मशविरा के बाद जारी किया गया है. इस नोट का परिणाम ये हुआ के तिब्बत का Thank you India आयोजन अब दिल्ली के बजाय, धर्मशाला में होगा. क्योंकि भारत सरकार चीन के साथ तनाव को बढ़ाना नहीं चाहती. जो सही भी है. क्योंकि आप देश के बाहर कई मोर्चे नहीं खोल सकते. ये हमारी सुरक्षा के लिए घातक है. साफ शब्दों में कहा जाए के आप डर गए, आपने वो समझौता कर डाला जो आपने पहले कभी नहीं किया. तिब्बत आंदोलन को चुपचाप धर्मशाला रवाना कर दिया और चाइना के सामने नमस्ते कर दिया. गज़ब है यानी के!


और अभिसार के लिए क्लिक कीजिये

मगर दिक्कत ये है जब देश की सियासत, उसकी कूटनीति, उसकी रक्षा नीति एक व्यक्ति यानी मोदीजी के व्यक्तित्व को निखारने के लिए इस्तेमाल हो रही है, तब ऐसे हादसे होते हैं. क्योंकि तेवर आपने दिखा दिए. चीन से लेकर पाकिस्तान से लेकर नेपाल से लेकर मालदीव में. मगर आप ये भूल गए के इतने मोर्चे खोलकर आप इलाके में अलग-थलग पढ़ जाएंगे. सियासत और असलियत या तर्क में फ़र्क़ होता है! पाकिस्तान से तनाव लगातार बढ़ाकर आपने देश के अंदर जयकारे तो लगवा दिया, चुनाव भी जीत लिए, मगर आप भूल गए के अब चीन और पाकिस्तान के सामरिक हित पहले से कहीं अधिक जुड़े हुए हैं. चाइना खुलेआम सैन्य बेस से लेकर सामरिक ठिकानों का निर्माण कर रहा है. पाकिस्तानी आतंकियों को भारत की पकड़ से दूर रख रहा है, उन पर अंतरराष्ट्रीय तौर पर अंकुश लगाने के भारत के प्रयासों में रोड़े अटका रहा है.

यानी पाकिस्तान को भी घेरना इतना आसान नहीं. सर्जिकल स्ट्राइक के बावजूद पाकिस्तान अपनी बेशर्मी पर लगाम नहीं लगा रहा है. देश के सैनिकों की शहादत का सिलसिला थम नहीं रहा है. हमारे सैनिक बेस पहले से कहीं अधिक असुरक्षित हैं. आतंकी जब चाहे हमला कर रहे हैं, लिहाज़ा इस उग्र नीति पर पुनर्विचार की ज़रूरत है.

चुनावी भाषण में लाल आंख दिखाने की बात करना नालायक भक्तों और वफादार पत्रकारों के पेट भरने के लिए तो ठीक हैं, मगर देश का इससे कोई भला नहीं होगा. क्योंकि देश अलग-थलग होकर अस्तित्व में नहीं बने रह सकता. सच तो ये है कि यह भारत की विदेश नीति का सबसे दिशाहीन काल है. और ये सिर्फ इसलिए क्योंकि इसका इस्तेमाल सत्तारूढ़ बीजेपी के सियासी हितों को साधने के लिए किया जा रहा है.

जितनी जल्दी हम इसके दुष्परिणामों को समझें तो बेहतर होगा. मगर जब चुनाव में एक साल रह गया हो और मोदीजी हमेशा चुनावी टशन में हों तो कौन समझाए और कौन समझे!

और अभिसार के लिए क्लिक कीजिये



(ये लेखक की फेसबुक वाल से लिए गए यह लेखक के अपने विचार हैं )
००००००००००००००००
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (07-03-2018) को ) "फसलें हैं तैयार" (चर्चा अंक-2902) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    जवाब देंहटाएं

ये पढ़ी हैं आपने?

वैलेंटाइन डे पर विशेष - 'प्रेम के नौ स्वर' - ऋत्विक भारतीय की कविताएं | Valentine Day Poetry in Hindi
असग़र वजाहत का नाटक 'ईश्वर-अल्लाह'  | Asghar Wajahat's Play 'Ishwar-Allah'
आन्तरिक तार्किकता की खोज ~ मृदुला गर्ग की 'सम्पूर्ण कहानियाँ' | Mridula Garg Complete Stories
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
NDTV Khabar खबर
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियाँ — 'पगला गई है भागवती!...'
फ्रैंक हुजूर की इरोटिका 'सोहो: जिस्‍म से रूह का सफर' ⋙ऑनलाइन बुकिंग⋘