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रुपया 7000 करोंड़ का तेल लेने गया स्विस बैंक में — सौरभ राय

जून 30, 2018
rupye kamane ke tarike


स्विस बैंक में 7000 करोंड़ और फिर... अच्छे दौर की सबसे बुरी सरकार?

— सौरभ राय

...अब जब सबको समझ आ गया है कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली से अर्थव्यवस्था नहीं संभाली जा रही, तो उसी बीच एक और नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है मोदी सरकार ने!
सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता
सौरभ राय

डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत की गिरावट  69.09पैसे की एक नई ऊँचाई पर ले गए हैं। यह हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार हुआ है कि रुपये ने अपनी चमक डॉलर के खिलाफ इतनी खोई है।

आपको याद होगा, यह वही नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेता हैं जो चुनावी सभाओं में कहते मिलते थे कि
“रुपये की कीमत जिस तेजी से गिर रही है, मानो दिल्ली सरकार और रुपये के बीच प्रतियोगिता चल रहा है कि किसकी आबरू तेज़ी से गिरती चली जाएगी।”


"दिल्ली के शासकों को ना रुपये की चिंता है और ना देश की चिंता है, उन्हें चिंता है तो कुर्सी बचाने की चिंता है"।

यह शब्द मेरे नहीं खुद मुख्यमंत्री मोदी के थे, और शायद अब यह उनपर ही कहर बनकर गिरने को तैयार है।

रुपये की खोती चमक और गिरती कीमतों के कारण हमारा देश आज के समय में अर्थिक मंदी के दौर से गुज़र रहा है और विकासशील देशों की सूची में भी पिछड़ता जा रहा है।

रुपये की बढ़ती कीमत के कारण महंगाई ने भी आम जनता की कमर तोड़ दी है, जहां पेट्रोल डीजल के दामों पर सरकार को अंकुश लगाने की ज़रूरत थी वहां सरकार उसपर बिल्कुल निरंकुश हो गई है क्योंकि भारत कच्चा तेल, डॉलर में खरीदता है, तो जैसे-जैसे डॉलर बढ़ेगा तेल की कीमतें महंगी होती चली जाएगी और इसका सीधा असर लोगों की ज़िंदगी पर पड़ रहा है, सब्ज़ी से लेकर रोज़मर्रा की ज़रूरत के सभी सामान महंगे होते जा रहे हैं...और जैसे हालात है, और और महंगे होते जाएंगे। पर यह तो आज कुछ महीने से हुआ है न, उसके पहले तो सब सामान्य था!।तो मोदी सरकार ने क्यों नहीं तेल के दाम कम किए और क्यों नही महंगाई पर अंकुश लगाया।

paise kamane ke tarike bataye


आपको शायद यह किसी ने बताया नहीं होगा कि, जनवरी 2018 से 28 जून के बीच रुपया डॉलर से 9.25% टूटा है, जो कि एक ऐतिहासिक आंकड़ा है। (dollar ki keemat)

ख़ैर आइये जानते हैं इसके पीछे वजह क्या है, रुपया अपनी चमक क्यों खोता जा रहा है: भारत दुनिया में तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयात करने वाला देश है। 2014 से 2017 तक कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने न्यूनतम स्तर पर था यहां तक कि 2016 में $29/बैरल भी पहुँच गया था।

और अब यह ऊपर आता दिख रहा है करीब $80 डॉलर/बैरल तक, जो कि डॉ मनमोहन सिंह की सरकार के समय से काफी कम है, उस वक्त कच्चे तेल का दाम करीब 140 डॉलर/बैरल तक पहुँचा था।

उस वक्त भारत के पास विश्व प्रसिद्ध अर्थिक जानकार श्री रघुराम राजन रिज़र्व बैंक के गवर्नर थे तो रुपये की चमक खोने से बच गई अब जब उन्हें मोदी सरकार ने अलविदा कह दिया है। तो अब देखना है कि उर्जित पटेल (RBI गवर्नर) क्या करामात करके महंगाई और रुपये की कीमत को ICU से बचा कर बाहर निकाल कर ले जाते हैं।

... रुपया तो विश्व में अपनी चमक छोड़ता जा रहा है पर स्विस बैंकों में अपने पूरे उफान पर है! (Bhartiya arthvyavastha)

विदेशी बैंक (स्विस बैंक) में जमा रुपये में भारी उछाल आया है, स्विस बैंक में जमा भारत के (काले) धन में 50% की वृद्धि हो कर, ₹7000 करोड़ हो गयी है। और यह केवल 1 साल (2017) के भीतर हुआ है, बाकी देशों की जमा राशि मे मात्रा 3% का इज़ाफ़ा और भारतीय मुल्क के लोगों का 50%.

तो मोदी सरकार अपने इस वादे/श्वेत पत्र पर भी फेल होती पाई गई है, जी हां यह वही नरेंद्र मोदी जी हैं जिन्होंने 2014 के चुनावी रैलियों में चिल्ला चिल्ला कर विदेशों से काला धन वापस लाने का वादा किया था और प्रत्येक भारतवासियों के खाते में ₹15,000,00 (15 लाख) डलवाने का वादा किया था!


पर हो क्या रहा है, काला धन वापस लाने की बात तो कोसों दूर वह तो उसके इज़ाफ़े की ओर ध्यान दे रहे हैं। नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चौकसी, ललित मोदी इत्यादि जैसे बड़े उद्योगपति लोग देश को चूना लगा विदेशों में जाकर बस गए और सरकार उन्हें रोक ना पाई, या हो सकता है सत्ता में बैठे कुछ लोगों की मदद से यह सम्भव हुआ हो!

अब जब काला धन बढ़कर ₹7000 करोड़ हो गया है तो, 2019 में मोदी जी से यह उम्मीद किया जा सकता है कि वह अपने भाषण में देने वाली अच्छे दिन की राशि भी बढ़ा देंगे और ₹30,000,00 कर देंगे और सोचेंगे कि जनता एक बार फिर से मूकदर्शक बनकर उन्हें वोट दे देश को लूटने के लिए छोड़ देगी!?

नहीं मोदी जी ऐसा बिल्कुल नहीं होगा, देशवासियों और पूर्व में रहीं सभी सरकारों ने हिंदुस्तान को बड़ी मेहनत और पसीने से सींच कर विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाया है, और आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोया है, और वह इसे बर्बाद होते कतई भी देख नहीं सकते।

आपका तख्तापलट निश्चित तौर पर सुनिश्चित करेगी देश की जनता। और अच्छे दौर की सबसे बुरी सरकार के रूप में याद किया जाएगा आपको।


सौरभ राय
सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता
अभियंता, एरिक्सन ग्लोबल लिमिटेड
मोबाईल: +91-9958838655
ईमेल: saurabh.leo100@gmail.com

कार्टून: साभार 'द हिन्दू'

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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