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शनिवार, 16 मार्च 2013

लोकार्पण : व्यंग्यऋषि शरद जोशी - डॉ वागीश सारस्वत

मानवीय सरोकारों के रचनाकार थे शरद जोशी-डॉ हांडे

Vageesh_Saraswat vyangrishi-sharad-joshi book cover    मुंबई, 14 मार्च 2013
     मुंबई विश्वविद्यालय बी.सी.यु.डी. के निदेशक डॉ राजपाल हांडे ने "व्यंग्यऋषि शरद जोशी" पुस्तक के लोकार्पण के उपरांत कहा कि डॉ वागीश सारस्वत ने यह पुस्तक लिखकर साबित कर दिया है कि व्यंग्यकार शरद जोशी मानवीय सरोकारों के रचनाकार थे। डॉ हांडे ने इस पुस्तक को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि मुंबई विश्वविद्यालय व उसका हिंदी विभाग हमेशा से ऐसे कार्यों को प्रोत्साहित करता रहा है।
     मुंबई विश्वविद्यालय के फिरोजशाह मेहता सभागार में मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग व लोकमंगल के संयुक्त तत्वावधान में डॉ वागीश सारस्वत की समीक्षा कृति व्यंग्यऋषि शरद जोशी का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। इसके मुख्य अतिथि के रूप में पधारे डॉ राजपाल हांडे ने शरद जोशी को जीवन की कड़वी अनुभूतियों का सच्चा रचनाकार बताया।
     अभिनेता व कवि शैलेश लोढा ने शरद जोशी के विषय चयन, विस्तार और गहराई को अपने रचनाकर्म में उभारने की दक्षता को रेखांकित करते हुए कहा कि वे आम जीवन के सजग रचनाकार थे। सामान्य बात से शुरू होकर बड़ी बात तक अपने व्यंग्य को ले जाना शरद जोशी का कौशल था। लोढा के मुताबिक डॉ वागीश सारस्वत ने शरद जोशी के व्यक्तित्व व् कृतित्व का खूबसूरत चित्रण किया हैं और यह पुस्तक लिखकर उन्होंने सिद्ध किया है कि व्यंग्य लिखना आसान नहीं है। दिल्ली से इस कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से पधारे व्यंग्य यात्रा के संपादक प्रेम जनमेजय ने इस समरोह को व्यंग्य यात्रा के शरद जोशी विशेषांक का लौन्चिंग पैड बताते हुए वागीश सारस्वत की कृति की प्रशंसा की।
Dr. Madhaw Pandit Karuna Shankar upadhayaya rajpal hande vageesh saraswat vishwanth sachdev dr. ramji tiwari kanhaiyalal saraf prem janmejay rita gupta bala chouhan shabdankan vyangrishi sharad joshi
     नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने शरद जोशी के छोटे वाक्यों की सरचना का जिक्र करते हुए वागीश के समीक्षा कर्म की सराहना की। व्यंग्यकार डॉ सूर्यबाला ने इस पुस्तक को व्यंग्य पर एक गंभीर पुस्तक माना और कहा कि इस पुस्तक के बाद संभव है कि लोग व्यंग्य विधा को गंभीरता से लेने लगे। डॉ रामजी तिवारी ने पुस्तक पर विस्तार से चर्चा करते हुए व्यंग्यऋषि शरद जोशी नाम की सार्थकता को परिभाषित किया और कहा कि वागीश ने पुस्तक को यह शीर्षक देकर ही शरद जोशी के लेखन के महत्त्व का संकेत कर दिया है।
Dr vageesh saraswat sailesh lodha suryabala shabdankan vyangrishi sharad joshi
    मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष करुणाशंकर उपाध्याय ने अतिथियों का परिचय देते हुए बीज वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ माधव पंडित ने किया। गोपाल शर्मा, डॉ दयानंद तिवारीडॉ सीमा भूतड़ा ने पुस्तक पर समीक्षात्मक वक्तव्य प्रस्तुत किया। डॉ अनंत श्रीमालीसंजीव निगम ने शरद जोशी की व्यंग्य रचनाओं का पाठ किया। इसके अलावा महाराष्ट्र नव निर्माण महिला सेना की उपाध्यक्ष रीटा गुप्ता, प्रख्यात कवियत्री माया गोविन्द, कथाकार सुमन सारस्वत, मनमोहन सरल, ओमप्रकाश तिवारी, अनुराग त्रिपाठी, सुरेश शुक्ला आदि उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत सोनम गुप्ता, संगीता जैसवाल, अपूर्वा कदम और प्रियंका काम्बले ने पुष्प गुच्छ देकर किया। लोकमंगल के उपाध्यक्ष कन्हैयालाल शराफ ने व्यंग्यात्मक शैली में अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

1 टिप्पणी :

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (17-03-2013) के चर्चा मंच 1186 पर भी होगी. सूचनार्थ

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