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बुरा न मानो होली है - पद्मा मिश्रा

मार्च 25, 2013
PADMA MISHRA पद्मा मिश्रा
पद्मा मिश्रा
जमशेदपुर
टाटा नगर (झारखण्ड)
ईमेल: padmasahyog@gmail.com

होली में

चारो तरफ मंदी की छाई मार होली में,
मुसीबत हो गई इस फागुनी त्यौहार होली में

है फीकी चाय की प्याली,भरी यह जेब भी खाली,
हैं खाली राशनों के अब सभी भंडार होली में,
मुसीबत हो गई इस फागुनी त्यौहार होली में

कभी शुगर सताता है, कभी गठिया रुलाता है
बने कैसे पुआ ,गुझिया सभी पकवान होली में
जो अम्मां साथ में रहती,तो फिर किस बात का डर था
अकेली जान ,कितने काम ,सौ फरमान होली में
मुसीबत हो गई इस फागुनी त्यौहार होली में

पति मंहगाई से पीले, क्रोध से लाल हैं बच्चे
हरे हैं पत्नियों के घाव मचा घमसान होली में
स्वयं रंगीन हो जाओ, तो उलझन दूर हो जाये
मँहगे हो गये हैं रंग और गुलाल होली में
मुसीबत हो गई इस फागुनी त्यौहार होली में

जब चेहरे के उड़े हैं रंग ,तो क्या रंग होली में
भुला दें वो सभी झगड़े ,पिला दो भंग होली में
करे सुरसा सी मंहगाई यों हाहाकार होली में
मुसीबत हो गई इस फागुनी त्यौहार होली में

हुई कायापलट फिटनेस की सबको हो गई चिंता
अब फैशन ने किये फीके सभी पकवान होली में
इधर सहमे हैं मुर्गे, मुर्गियां है चिंता जान जाने की
उधर खुशियाँ हैं होली की, तले पकवान खाने की
बीमारी के बहाने हैं, सभी सत्कार होली में
मुसीबत हो गई इस फागुनी त्यौहार होली में

वो दिन कितने भले थे, आते थे मेहमान होली में
अब न रिश्तों में गर्माहट, न खुशियों से भरे चेहरे
गले मिलना हुआ मजबूरी और अहसान होली में
जली ज्यों होलिका तुम भी जला दो हर बुराई को
करो इंसानियत पर प्रेम की बौछार होली में
मुसीबत रह न पाए स्नेह के त्यौहार होली में

बुरा न मानो होली है

बुरा न मानो होली है ...

रंग हुए बेरंग आज क्यों , क्यों हर राह अकेली है
किस आंगन में प्यार बाँट दें ,रूठा हर हमजोली है
बुरा न मानो होली है ...

मन से मन की बढ़ी दूरियां , कदम कदम पर दीवारें
रंगो में घुल गई कालिमा , किस दर्पण में रूप निहारें
इंसानी रिश्तों में किसने विष की गागर होली है
बुरा न मानो होली है ...

बाँट दिया धरती को हमने, छोटी छोटी दीवारों में
प्यार भरे रिश्ते भी बांटे, रेशम की इन जंजीरों में
इधर घोलते रंग गुलाल हम , उधर खून की होली है
बुरा न मानो होली है ...

जाने किसकी बाट जोहती , माँ भी कितनी भोली है
जीवन की इस गोधुली में, जीना - एक पहेली है
दीदी ,अम्मा ,बाबा ,भैया ,रिश्ते आज ठिठोली हैं
बुरा न मानो होली है ...

ओढ़े सच्चाई की चादर ,सबको राह दिखाते हैं
holi greetings shabdankan 2013 २०१३ होली की शुभकामनायें शब्दांकन
बरसती मेंढक जैसे ये समय देख टर्राते हैं
संग में राम बगल में छुरी , मुख में मिसरी घोली है
बुरा न मानो होली है ...

भैया के पांवों पर रखते , भौजी को मलते गुलाल हैं
रिश्तों में भी हुई मिलावट , हर आंगन का यही हाल है
मन में भरे विकार घूमते , बाहर रंग रंगोली है
बुरा न मानो होली है ...

अलग धर्म हैं, जाति भी अलग , अलग अलग भाषाएँ हैं
इंसानों ने खुद ही गढ़ लीं , कितनी परिभाषाएं हैं
माँ को भी जो बाँट रहे हैं , नीयत जिनकी पोली है
बुरा न मानो होली है...


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