मैंने सिर्फ सच कहा और एक बार फिर वे मेरे पीछे पड़ गए हैं - तसलीमा नसरीन | FIR against Taslima Nasreen Video - #Shabdankan

मैंने सिर्फ सच कहा और एक बार फिर वे मेरे पीछे पड़ गए हैं - तसलीमा नसरीन | FIR against Taslima Nasreen Video

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Bhasha, Last Updated: दिसम्बर 5, 2013 10:00 PM IST


यूरोपियन पार्लियामेंट के एक सेमिनार में तसलीमा नसरीन .

लखनऊ/कोलकाता: महिलाओं के खिलाफ फतवे जारी करने वाले मुफ्तियों को अपराधी करार देने वाला ट्वीट करने के आरोप में विवादास्पद बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन के खिलाफ उत्तर प्रदेश के बरेली में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

       तसलीमा ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोप को 'स्तब्ध करने वाला' करार दिया है।' पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि रजा फोर्स के मुखिया और दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीं मौलाना सुब्हानी मियां के बेटे हसन रजा खां नूरी मियां द्वारा कल रात शहर कोतवाली में दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि तसलीमा ने गत 6 नवम्बर को अपने ट्वीट में मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ फतवे जारी करने वाले मुफ्तियों को 'अपराधी' करार देकर मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

       नूरी मियां ने कहा कि हदीस और कुरान के मुताबिक फतवा जारी किया गया है। रजा फोर्स की कल हुई बैठक में तसलीमा का पासपोर्ट जब्त करके उन्हें गिरफ्तार करने की मांग भी की गई।

       तसलीमा ने कहा कि प्राथमिकी के बारे में सुनकर वह स्तब्ध हैं क्योंकि उन्होंने केवल वही कहा था जो सच है।

       उन्होंने नई दिल्ली से बताया, 'मैं नहीं जानती कि उन ट्वीट से मैंने क्या गलत किया है। मैंने सिर्फ सच कहा और एक बार फिर वे मेरे पीछे पड़ गए हैं।'

       धार्मिक भावनाएं आहत करने के लिए कट्टरपंथियों की धमकियों का निशाना बनने के बाद 51 साल की तसलीमा को बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। तसलीमा ने हैरत जताते हुए कहा, 'मैं यह सुनकर स्तब्ध हूं। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में यह कैसे हो सकता है, जहां संविधान भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।'

       अरविंद केजरीवाल द्वारा अपनी आम आदमी पार्टी (आप) के लिए उत्तर प्रदेश के विवादित धर्मगुरु मौलाना तौकीर रजा खान से समर्थन मांगने के बाद तसलीमा ने ट्विटर पर इस बैठक की आलोचना की थी।

       साल 2007 में मौलाना ने कहा था कि भारत सरकार तसलीमा को देश में दाखिल होने से रोके। मौलाना ने तसलीमा के सिर पर पांच लाख रुपये का ईनाम घोषित किया था।

       अपनी भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को हर वक्त खतरे में बताते हुए तसलीमा ने कहा, 'कट्टरपंथी मानवाधिकार में यकीन नहीं रखते और इसलिए मुझे सच भी नहीं बोलने दिया जाता।' तसलीमा अपनी विवादित किताबों 'लज्जा' और ‘द्विखंडितो’ की वजह से चर्चा में रही हैं।

source: http://khabar.ndtv.com/news/india/cleric-objects-to-taslima-nasreens-tweets-files-fir-374163

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