देवी नागरानी की दो ग़ज़लें Ghazal - Devi Nangrani

जब  भी  खाने  को दौड़ी है तन्हाइयाँ
मेरी  इमदाद को  दौड़ी  आती ग़ज़ल


           ग़मज़दा जब हुई, पास  आती ग़ज़ल
           गुदगुदा कर है मुझको  हँसाती ग़ज़ल

           जुगनुओं  से  उसे  रोशनी  मिल गई 
           तीरगी में भी है  झिलमिलाती ग़ज़ल

           धूप  में,   छांव  में, बारिशों  में  कभी
           तो  कभी  चांदनी  में  नहाती  ग़ज़ल

           कैसी ख़ुश्बू है ये  उसकी  गुफ़्तार  में
           रंगों-बू  को  चमन में लजाती ग़ज़ल

           जब  भी  खाने  को दौड़ी है तन्हाइयाँ
           मेरी  इमदाद को  दौड़ी  आती ग़ज़ल

           उससे  हट  के कभी पढ़ के देखो ज़रा
           कैसे  फिर  देखना  रूठ  जाती ग़ज़ल

           दोनों कागज़ , क़लम कैसे ख़ामोश हैं
           जब मेरी  सोच को  थपथपाती ग़ज़ल

           मैले   हाथों  से  छूना  न ‘ देवी ’  इसे 
           मैली  होने  से  बचती- बचाती ग़ज़ल 
*

           इक नुमाइश की तरह ही  बस  टंगा  रहता  हूँ  मैं
           सच पे पर्दा  हूँ  कि  हरदम  ही  गिरा  रहता हूँ मैं

           क्या  मुक़द्दर में लिखा है यूं ही मुझको डूबना ?
           ऊंची-ऊंची  उठती  मौजों  से  घिरा  रहता  हूँ  मैं

           मेरे  बचपन  के  खिलौने  लग  रहे  हथियार बंद
           खेलता था जिनसे कल  तक अब डरा रहता हूँ मैं

           किस  क़दर  बिगड़ी  हवाएँ  आजकल  यारां  मेरे
           ख़ैरियत  अब  तो  सभी  की  मांगता  रहता हूँ मैं

           छटपटाहट   मेरे   तन की   क़ैद  में  कैसी  है  ये
           उसकी  पीड़ा   से   सदा बेचैन   सा   रहता  हूँ  मैं

           ग़लतफ़हमी  आंसुओं  को  देख  कर मत पालिए!
           रास्ता   बहने   से  ‘ देवी ’   रोकता  रहता   हूँ  मैं

देवी नागरानी
9-डी॰ कॉर्नर व्यू सोसाइटी, 1/33 रोड, बांद्रा , मुंबई  फ़ोन: 9987938358

एक टिप्पणी भेजें

2 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
सावित्री : एक प्रेम कथा | सुमन केशरी का नाटक | शब्दांकन
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियाँ — 'पगला गई है भागवती!...'
Harvard, Columbia, Yale, Stanford, Tufts and other US university student & alumni STATEMENT ON POLICE BRUTALITY ON UNIVERSITY CAMPUSES
तू तौ वहां रह्यौ ऐ, कहानी सुनाय सकै जामिआ की — अशोक चक्रधर | #जामिया
पानियों पर लिखे बेवतन लोगों के अफ़साने — कहानी — मधु कंकरिया | Hindi Story on Stranded Pakistanis by Madhu Kankaria
समीक्षा: मुजीब रिज़वी की किताब ‘सब लिखनी कै लिखु संसारा: पद्मावत और जायसी की दुनिया’ — दिव्या तिवारी | Padmavat Aur Jayasi Ki Duniya
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
संगीतज्ञों के संस्मरणों का शहदाबा : ‘शब्द उठान सुर तिहाई’