कनाडा में हुआ 'इ-काव्य संकलन' - "रंग और नूर" का विमोचन | Rang Aur Noor E-Book (Hindi & Urdu Poetry)

कनाडा एक सागर की तरह अपने में दुनिया भर की प्रतभाओं को समेट कर पल पल उनका उत्सव मनाता है - मारिआन कुटरना (Marian Kutarna)


"मिसिसागा लाइब्रेरी'' टोरंटो ओंटारियो कनाडा ने २८ सितम्बर २०१४ को कैनाडा में मनाये जा रहे भव्य "कल्चर डेज" के दौरान कैनाडा की हिंदी और उर्दू की प्रतिभाओं के इ-काव्य संकलन "रंग और नूर" का विमोचन समारोह आयोजित किया। इस काव्य संकलन में कैनाडा में निवास करने वाले हिंदी और उर्दू के करीब २२ कवियों की रचनाएँ सम्मिलित हैं। उर्दू की रचनाओं को देवनागरी लिपि में और हिंदी की रचनाओं का उर्दू लिपि में लिप्यंतरण किया गया है और यह पुस्तक इंटरनेट के माध्यम अब विश्वभर में उपलब्ध है. पुस्तक नि:शुलक होने के कारण इसे कोई भी साहित्य प्रेमी डाउनलोड कर सकता है और पढ़ सकता है। 

यह संकलन scribd.com और issuu.com पर स्टारबज़ मीडिया द्वारा प्रकाशित हुआ और यहाँ http://bit.ly/rangOnoor या यहाँ http://bit.ly/rangoOnoor2  पर पढ़ा जा सकता है।  


कार्यक्रम की शुरुआत मिसिसगा लाइब्रेरी की मारिआन कुटरना के उद्घाटन भाषण से हुई और उन्होंने बताया की किस तरह कनाडा एक सागर की तरह अपने में दुनिया भर की प्रतभाओं को समेट कर पल पल उनका उत्सव मनाता है। उन्होंने इस ई-पुस्तक की संपादक मीना चोपड़ा जो एक आर्टिस्ट और लेखिका हैं को और सह संपादक नसीम सयेद और अनिल पुरोहित को उनकी इस परिकल्पना और उसे पूर्ण करने के उत्साह के लिए बधाई दी और उनके अटूट प्रयास की सराहना की। 


Tia Virdi & Marian Kutarna -
Meena Chopra's book launch
आयोजित कार्यक्रम में टोरंटो शहर के बहुत से उर्दू और हिंदी के लेखक और जानी मानी हस्तियां शामिल थीं। पुस्तक का विमोचन जाने माने कला और साहित्य प्रेमी अतुल तोलिया और मारिआन कुटरना के हाथों द्वारा हुआ। उर्दू के लेखक, प्रकाशक ताहिर असलम गोरा, हिंदी के मशहूर ब्लॉगर और लेखक समीर लाल, संस्कृत विद्वान संदीप त्यागी, RANA (राजस्थान असोसिएशन ऑफ़ नार्थ अमेरिका) के सचिव योगेश शर्मा भी वहां मौजूद थे। 

मीना चोपड़ा ने बताया की जल्द ही 'रंग और नूर' के दूसरे संकलन पर भी काम शुरू किया जायेगा और कोशिश रहेगी की उसमे और भी कई कवि शामिल हो सकें. इस तरह यह प्रयास जारी रहेगा. साथ ही उन्होंने कहा "हम कनाडा निवासी बहुत भाग्यशाली हैं की हम कनाडा में रहने के कारण हम कला सहित्य एवंम संस्कृति की कई विविधताओं के संपर्क में आते हैं जिससे हमारी कल्पना का आसमान और भी विस्तृत होता है क्यों की यहाँ कई देशों से आकर लोग बसते हैं।"  मीना चोपड़ा के  पूर्व प्रकाशित काव्य संकलन "सुबह का सूरज अब मेरा नहीं है" का भी विमोचन हुआ और वह भी अब इंटरनेट पर उपलब्ध है।  

एक ई-प्रकाशन और ब्लॉगिंग की वर्कशॉप का भी आयोजन था जिसका सञ्चालन समीर लाल, मीना चोपड़ा और भूपिंदर विरदी द्वारा हुआ।  कार्यक्रम के अंत में उपस्थित कवियों ने अपनी रचनाएँ पढ़ी।  


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