advt

चार ग़ज़लें ~ प्राण शर्मा | #Ghazal : Pran Sharma #Shair

जुल॰ 19, 2015

चार ग़ज़लें 

~ प्राण शर्मा

खामियाँ सबकी गिनाना दोस्तो आसान है / खामियाँ अपने गिनाना दोस्तो आसां नहीं


परखचे   अपने  उड़ाना   दोस्तो  आसां  नहीं

१३ जून १९३७ को वजीराबाद में जन्में, श्री प्राण शर्मा ब्रिटेन मे बसे भारतीय मूल के हिंदी लेखक है। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए बी एड प्राण शर्मा कॉवेन्टरी, ब्रिटेन में हिन्दी ग़ज़ल के उस्ताद शायर हैं। प्राण जी बहुत शिद्दत के साथ ब्रिटेन के ग़ज़ल लिखने वालों की ग़ज़लों को पढ़कर उन्हें दुरुस्त करने में सहायता करते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ब्रिटेन में पहली हिन्दी कहानी शायद प्राण जी ने ही लिखी थी।
संपर्क: sharmapran4@gmail.com
आप  बीती  को  सुनाना दोस्तो  आसां नहीं

खामियाँ  सबकी  गिनाना  दोस्तो आसान है
खामियाँ  अपने  गिनाना   दोस्तो आसां नहीं

तुम  भले ही मुस्कराओ साथ बच्चों के मगर
बच्चों  जैसा  मुस्कराना दोस्तो  आसां   नहीं

दोस्ती कर लो भले ही हर किसी से शौक़ से
दोस्ती  सबसे  निभाना   दोस्तो  आसां  नहीं

रूठी दादी  को  मनाना  माना  के  आसान है
रूठे  पोते  को  मनाना   दोस्तो  आसां   नहीं






फूलों पे बैठी  तितलियाँ तुम नित उड़ाते  हो
उफ़! नन्हीं-नन्हीं  जानों को नाहक सताते  हो

रहने  दो  मन  को  फूल   सा  नादान  दोस्तो
पत्थर की तरह सख्त क्यों उसको  बनाते हो

कोई तुम्हें सुनाये भला  क्यों  पते  की  बात
तुम हर किसी की बात की खिल्ली उड़ाते हो

अपनी हँसी को मन में  ही रक्खा करो जनाब
तुम हँसते  तो  लगता  है  सबको बनाते  हो

गंगा   का  साफ़  पानी  है  पीने   के   वास्ते
तुम  हो कि मैल जिस्म की उसमें मिलाते हो




कुछ  शर्म कर तू उनकी निगाहों  के  सामने
भद्दे   मज़ाक   करता  है   बूढ़ों  के   सामने

बूढ़ों  को घूरता है , अरे  इतना  तो  विचार
जुगनू  की क्या  बिसात चिरागों  के सामने

शमशान हो न कोई किसी घर के आसपास
नचती है मौत  हर  घड़ी  आँखों के  सामने

ये सोचिये ,ये समझिए ,  ये मानिए जनाब
झगड़ा न घर में कीजिये  बच्चों के  सामने

छाती  भले  फुलाइये  घर  में  हज़ार  बार
झुक कर  ऐ 'प्राण'  जाइए संतों के सामने




रोती   है ,  कभी   हँसती -  हँसाती   है   ज़िंदगी
क्या -क्या  तमाशे जग को  दिखाती  है  ज़िंदगी

कोई    भले  ही   कोसे  उसे  दुःख   में  बार-बार
हर     शख़्स  को   ऐ  दोस्तो  भाती  है   ज़िंदगी

दुःख   का   पहाड़   उस  पे   न  टूटे  ऐ  राम  जी
इन्सां   की   जान   रोज़  ही  खाती   है   ज़िंदगी

खुशियो,  न जाओ छोड़  के इतना  करो  खयाल
घर  -  घर  में   हाहाकार    मचाती   है   ज़िंदगी

ऐ `प्राण` कितना खाली सा लगता है आसपास
जब  आदमी  को   छोड़   के   जाती   है  ज़िंदगी

००००००००००००००००

टिप्पणियां

  1. गज़ब ... जिंदाबाद... चारों गजलों में कमाल किया है प्राण साहब ने... हर ग़ज़ल सरल शब्दों में ... गहरी बात लिए ... सिल में सीधे उतर जाती है... बधाई प्राण साहब को इस ग़ज़ल की ...

    जवाब देंहटाएं
  2. गज़ब ... जिंदाबाद... चारों गजलों में कमाल किया है प्राण साहब ने... हर ग़ज़ल सरल शब्दों में ... गहरी बात लिए ... सिल में सीधे उतर जाती है... बधाई प्राण साहब को इस ग़ज़ल की ...

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (21-07-2015) को "कौवा मोती खायेगा...?" (चर्चा अंक-2043) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (21-07-2015) को "कौवा मोती खायेगा...?" (चर्चा अंक-2043) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर घलें कही हैं आपने...

    जवाब देंहटाएं

टिप्पणी पोस्ट करें

ये पढ़े क्या?

{{posts[0].title}}

{{posts[0].date}} {{posts[0].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[1].title}}

{{posts[1].date}} {{posts[1].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[2].title}}

{{posts[2].date}} {{posts[2].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[3].title}}

{{posts[3].date}} {{posts[3].commentsNum}} {{messages_comments}}

ये कुछ आल टाइम चर्चित

कहानी: दोपहर की धूप - दीप्ति दुबे | Kahani : Dopahar ki dhoop - Dipti Dubey

अरे! देखिए वो यहाँ तक कैसे पहुंच गई... उसने जल्दबाज़ी में बाथरूम का नल बंद कि…

जनता ने चरस पी हुई है – अभिसार शर्मा | Abhisar Sharma Blog #Natstitute

क्या लगता है आपको ? कि देश की जनता चरस पीए हुए है ? कि आप जो कहें वो सर्व…

मुसलमान - मीडिया का नया बकरा ― अभिसार शर्मा #AbhisarSharma

अभिसार शर्मा का व्यंग्य मुसलमान - मीडिया का नया बकरा …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

कायरता मेरी बिरादरी के कुछ पत्रकारों की — अभिसार @abhisar_sharma

मैं सोचता हूँ के मोदीजी जब 5, 10 या 15 साल बाद देश के प्रधानमंत्री नहीं …

साल दर साल

एक साल से पढ़ी जाती हैं

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

हिंदी कहानी : उदय प्रकाश — तिरिछ | uday prakash poetry and stories

उदय प्रकाश की कहानी  तिरिछ  तिरिछ में उदय प्रकाश अपने नायक से कहल…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

हिन्दी सिनेमा की भाषा - सुनील मिश्र

आलोचनात्मक ढंग से चर्चा में आयी अनुराग कश्यप की दो भागों में पूरी हुई फिल…

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

महादेवी वर्मा की कहानी बिबिया Mahadevi Verma Stories list in Hindi BIBIYA

बिबिया —  महादेवी वर्मा की कहानी  mahadevi verma stories list in hind…