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कलबुर्गी रेसोल्यूशन - साहित्य अकादेमी | Kalburgi - Sahitya Akademi

अक्तू॰ 23, 2015

कलबुर्गी रेसोल्यूशन


 भारतीय संस्कृति का बहुलतावाद बाकी दुनिया के लिए अनुकरणीय 

- विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

'कलबुर्गी रेसोल्यूशन' साहित्य अकादेमी का अभिव्यक्ति को दृढ़ समर्थन | Kalburgi Resolution - Sahitya Akademi


प्रस्ताव
साहित्य अकादेमी
दिनांक 23-10-2015

23 अक्तूबर 2015 को संपन्न साहित्य अकादेमी की विशेष बैठक प्रो. एम.एम. कलबुर्गी की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा करती है और प्रो. एम.एम. कलबुर्गी तथा अन्य बुद्धिजीवियों और विचारकों की दुखद हत्या पर गहरा शोक प्रकट करती है। अपनी विविधताओं के साथ भारतीय भाषाओं के एकमात्र स्वायत्त संस्थान के रूप में, अकादेमी भारत की सभी भाषाओं के लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का पूरी दृढ़ता से समर्थन करती है और देश के किसी भी हिस्से में, किसी भी लेखक के खिलाफ किसी भी तरह के अत्याचार या उनके प्रति क्रूरता की बेहद कठोर शब्दों में निंदा करती है। हम केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से अपराधियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने की माँग करते हैं और यह भी कि लेखकों की भविष्य में भी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। भारतीय संस्कृति का बहुलतावाद बाकी दुनिया के लिए अनुकरणीय रहा है। इसलिए इसे पूरी तरह संरक्षित रखा जाना चाहिए। साहित्य अकादेमी माँग करती है कि केंद्र और सभी राज्य सरकारें हर समाज और समुदाय के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का माहौल बनाए रखें और समाज के विभिन्न समुदायों से भी विनम्र अनुरोध करती है कि जाति, धर्म, क्षेत्र और विचारधाराओं के आधार पर मतभेदों को अलग रखकर एकता और समरसता को बनाए रखें।



साहित्य अकादेमी लेखकों के लिए, लेखकों की संस्था है जो लेखकों द्वारा ही निर्देशित-संचालित होती है। पुरस्कारों सहित इसके सभी निर्णय लेखकों द्वारा ही लिए जाते हैं। इस संदर्भ में, जिन लेखकों ने अपने पुरस्कार वापस किए हैं या जिन्होंने अकादेमी से अपने को अलग किया है, हम उनसे अनुरोध करते हैं कि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें। 

अकादेमी के कार्यकारी मंडल को विश्वास है कि अकादेमी की स्वायत्तता, जिसने 61 वर्षों के इसके इतिहास में ऊँचाइयाँ प्राप्त की है, को लेखकों का सहयोग और मजबूत करेगा।  

कार्यकारी मंडल अपनी बैठक में स्वीकार करता है कि प्रो. कलबुर्गी की हत्या के बाद साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष ने उपाध्यक्ष से फोन पर बात की कि वे प्रो. कलबुर्गी के परिवार से संपर्क करें और इस हत्या के खिलाफ अकादेमी की ओर से संवेदनाएँ अर्पित करें। 



उपाध्यक्ष, साहित्य अकादमी तथा कन्नड भाषा के संयोजक, मंडल और कुछ प्रख्यात कन्नड रचनाकारों ने एक सार्वजनिक सभा में प्रो. कलबुर्गी की निर्मम हत्या की दृढ़ता के साथ निंदा की। उन्होंने प्रो. कलबुर्गी के परिवार से हत्या के कुछ ही दिनों के भीतर संपर्क किया। वे प्रो. कलबुर्गी के परिवार सहित मुख्यमंत्री से परिवार की सुरक्षा और हत्या की जाँच के संबंध में मिले। अकादेमी ने दिनांक 30 सितंबर 2015 को बेंगलूरु में एक विशेष सार्वजनिक शोकसभा की जिसमें प्रो. एम.एम. कलबुर्गी के सम्मान में प्रसिद्ध लेखक भारी संख्या में सम्मिलित हुए और हत्या की निंदा की तथा उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। 

उसके बाद कई अन्य भाषाओं के संयोजकों ने साहित्य अकादेमी की ओर से सार्वजनिक प्रस्ताव जारी करके इस दुःखद घटना की निंदा की और न्याय की माँग की।  

श्रीनगर में कश्मीरी के संयोजक मंडल और छह भाषाओं के संयोजकों ने सार्वजनिक रूप से हत्या की निंदा की। साहित्य अकादेमी के प्रतिनिधियों और हैदराबाद में, तेलुगु के लेखकों ने तेलुगु भाषा के संयोजक की ओर से एक सार्वजनिक प्रस्ताव जारी कर हत्या की घोर निंदा की। 

कार्यकारी मंडल इस हत्या की पुनः निंदा करता है। पूर्व में भारतीय लेखकों की हुई हत्याओं और अत्याचारों को लेकर वह बेहद दुखी है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जी रहे नागरिकों के खिलाफ हो रही हिंसा की भी वह कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करता है। 

कार्यकारी मंडल, अकादेमी के अध्यक्ष के सतर्क और कर्मठ नेतृत्व में साहित्य अकादेमी की गरिमा, परंपरा और विरासत को बरकरार रखने के लिए उनके प्रति सर्वसम्मति से अपना समर्थन व्यक्त करता है।


(चंद्रशेखर कंबार )
उपाध्यक्ष
(विश्वनाथ प्रसाद तिवारी)
अध्यक्ष


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