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'शब्‍दवेध' एक शब्‍दयोगी (अरविंद कुमार) की आत्‍मगाथा : अनुराग

March 30, 2016
पाठक के लिए किसी संस्कृत शब्द का अर्थ समझना कठिन नहीँ होता, बल्कि दुरूह वाक्य रचना अर्थ ग्रहण करने मेँ बाधक होती है  — अरविंद ...Read More

लोकनायक और संपूर्णक्रांति की प्रासंगिकता — डॉ.ज्योतिष जोशी #BJPkillsDemocracy

March 27, 2016
जयप्रकाश पहले आम चुनाव के बाद से ही मानने लगे थे कि राजसत्ता चाहे जिस रूप हो, वह कल्याणकारी नहीं हो सकती; क्योंकि उसमें जनता की भ...Read More
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