वही वाक़िये दोहराने लगे - भरत तिवारी #shair #ghazal



Vahi waqiye dohrane lage / Jinhe bhulne me zamane lage - Bharat Tiwari

वही       वाक़िये    दोहराने     लगे
जिन्हें    भूलने   में    ज़माने   लगे

घिरा   मुल्क  उनसे  जो  तोड़ा किये
जो  जोड़े   हैं  उनपे   निशाने  लगे





जभी   जानवर   पे   सियासत  हुई
ग़रीबों  के  दम  घुंट  के  जाने लगे

जहाँ  बात  मजहब की हो हर समय
वहीँ   दहशतों  के   ठिकाने    लगे

फिर उनकी  जुबानें  कटीं  आज  हैं
जो   आज़ादियों  को   बुलाने  लगे

'भरत'   देख  बापू  मरे  आज  फिर
दिखी  चील ,  गिद्ध   मंडराने  लगे





००००००००००००००००
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (26-08-2016) को "जन्मे कन्हाई" (चर्चा अंक-2446) पर भी होगी।
    --
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियाँ — 'पगला गई है भागवती!...'
ऐ लड़की: एक बुजुर्ग पर आधुनिकतम स्त्री की कहानी — कविता
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
मन्नू भंडारी की कहानी — 'रानी माँ का चबूतरा' | Manu Bhandari Short Story in Hindi - 'Rani Maa ka Chabutra'
Hindi Story: कोई रिश्ता ना होगा तब — नीलिमा शर्मा की कहानी
बिहारियों का विस्थापन: ‘समय की रेत पर’ की कथा