हक़ीक़त को बख़ूबी खंगाला गया है — ओम थानवी #AnarkaliofAarah



'अनारकली ऑफ़ आरा' अविनाश इसी तरह और बढ़िया फ़िल्में बनाएँगे

— ओम थानवी


अनारकली ऑफ़ आरा' अविनाश इसी तरह और बढ़िया फ़िल्में बनाएँगे — ओम थानवी
निर्देशक अविनाश दास और स्वरा भास्कर


फ़िल्म्ज़ डिविज़न के सिनेमाघर में आज "अनारकली ऑफ़ आरा" का प्री-व्यू देखा। फ़िल्म मुझे सशक्त लगी। आरा (बिहार) की एक पेशेवर गायिका के बहाने हक़ीक़त को बख़ूबी खंगाला गया है। राजनीति, प्रशासन और उच्च शिक्षा के कुचक्र और दब्बू समाज के यथार्थ को हम अनारकली के संघर्ष में देखते हैं। यह अकेली स्त्री का साहस भरा संघर्ष ही नहीं है, अपनी अस्मिता और आज़ादी — अपनी आवाज़ — की रक्षा की गहरी जद्दोजहद है। फ़िल्म देखने के बाद हम एक बेचैनी में बाहर निकलते हैं। यही फ़िल्म की सफलता है। अच्छी फ़िल्म की तारीफ़ यही होती है कि आपको सोचने को भी विवश करे।

अविनाश दास की यह पहली फ़िल्म है। निर्देशन के साथ उन्होंने कथा-पटकथा लिखने का काम भी किया है। एक-दो गीत भी लिखे हैं। फ़िल्म पैसा कितना कमाती है पता नहीं, पर इज़्ज़त कमाएगी और अविनाश इसी तरह और बढ़िया फ़िल्में बनाएँगे, इसमें मुझे कोई शक नहीं। यह आशा भी है और शुभाशंसा भी। — ओम थानवी

स्वरा भास्कर (जो इस शो में मौजूद थीं) ने अपने शानदार अभिनय से फ़िल्म में जान डाल दी है। पंकज त्रिपाठी और संजय मिश्र का भी अच्छा अभिनय है। पुलिस अधिकारी के रूप में विजय कुमार (एनएसडी वाले) का भी। संजय मिश्र ने इससे पहले 'मसान' में बहुत प्रभावित किया था। फ़िल्म का एक अहम पहलू रोहित शर्मा का संगीत है। गीत भी अच्छे हैं, पर उन शब्दों का लुत्फ़ तब और बढ़ेगा जब उन्हें फ़िल्म से बाहर सुनें।


अधिकांश अभिनेता नए हैं। कम से कम बहुत परिचित नाम नहीं। लेकिन उन्होंने छोटी भूमिकाओं में भी अपनी छाप छोड़ी है। मसलन दिल्ली की बस्ती में मकान की मालकिन। कई जगह फ़िल्म में नाटक का आनंद अनुभव होता है। दो सिपाहियों की जोड़ी के चरित्र की कल्पना बिलकुल रंगमंच के अंदाज़ में है। छायाकारी बेहतर होती तो फ़िल्म का अँधेरा पक्ष ज़्यादा असरदार ढंग से चित्रित हो पाता।

अविनाश दास की यह पहली फ़िल्म है। निर्देशन के साथ उन्होंने कथा-पटकथा लिखने का काम भी किया है। एक-दो गीत भी लिखे हैं। फ़िल्म पैसा कितना कमाती है पता नहीं, पर इज़्ज़त कमाएगी और अविनाश इसी तरह और बढ़िया फ़िल्में बनाएँगे, इसमें मुझे कोई शक नहीं। यह आशा भी है और शुभाशंसा भी।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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