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IGNCA आने पर ख़ुशी होती है : किरण रिजीजू | #Bakula

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केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू


अ विसिनरी सेंट

वेनेरेबल कुशक बकुला रिनपोछे के जीवन पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में फोटोग्राफी प्रदर्शनी

31 दिसंबर तक चलेगी प्रदर्शनी



इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र,  नई दिल्ली में बुधवार की शाम केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने वेनेरेबल कुशक बकुला रिनपोछे के जीवन पर आधारित सचित्र प्रदर्शनी 'अ विसिनरी सेंट' का उद्घाटन किया। आई.जी.एन.सी.ए, 11 मान सिंह रोड, नयी दिल्ली के हाल संख्या-5, लगी इस प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू, अरुण कुमार, लामा लोबज़ंग, टेंपा सेरिंग, मंगोलिया के राजदूत गोंचिग गम्बोल्ड, आई.जी.एन.सी.ए के सदस्य सचिव ड़ॉ. सच्चिदानंद जोशी, पूर्वी-एशिया विभागाध्यक्ष डॉ. राधा बनर्जी और भारी संख्या में दर्शक और श्रोता मौजूद थे। लद्दाख में जन्में बकुला रिम्पोचे को सुनने आये लोगों का एक बड़ा वर्ग तिब्बत और लद्दाख के लोगों का था।

His Holiness Kushok Bakula Rinpoche was a renowned spiritual and political leader of Ladakh in the latter half of the 20th Century – the post independence era – Rinpoche joined politics in 1949 when Ladakh had just entered a new era of a democratic society. Therefore he is often regarded as the architect of modern Ladakh. One of the great contributions by Kushok Bakula Rinpoche was spreading the light of modern education to Ladakhi society. He played a vital role in motivating Ladakhi people to send their children to schools. All through his political life Bakula always stressed on the importance of modern education while preserving ancestral knowledge, values and wisdom.
:Tsewang Rigzin


डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने अपने स्वागत वक्तव्य में प्रदर्शनी आयोजन पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, "यह प्रदर्शनी वेनेरेबल कुशक बकुला रिनपोछे के जीवन और उनके द्वारा किये गए कार्यों के विषय में लोगों को अवगत कराने में काफी हद तक सहायता करेगी।"



सोनम वांगचुक, जो 25 वर्षों तक बकुला के साथ रहे हैं, उन्होंने उनके 50 साल लम्बे राजनीतिक सफ़र पर प्रकाश डालते हुए बताया, “बकुला राजनीति से ऊपर उठे व्यक्ति थे और वह हर विचारधारा के लोगों के साथ सामान व्यवहार रखते थे।“ वांगचुक ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बकुला को ‘आधुनिक लद्दाख का आर्किटेक्ट’ कहा है। वह बकुला ही थे जिनके मंगोलिया में भारत के राजदूत बन कर जाने पर, 70 साल के कम्युनिस्ट शासन के बाद, वहां बौद्ध धर्म को नया जीवन मिला।

जम्मू कश्मीर विशेषज्ञ अरुण कुमार ने मात्र 20 दिनों की तैयारी से प्रदर्शनी के बेहतरीन आयोजन पर आई.जी.एन.सी.ए को बधाई दी। उन्होंने कहा, “हमें बकुला के जीवन की महत्ता को देखने के साथ-साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस समयकाल में वह जिन स्थानों पर कार्यरत थे, वहां पहुंचना अत्यंत कठिन था।




विशिष्ट अथिति मंगोलिया के राजदूत गोंचिग गम्बोल्ड ने बकुला के व्यवहार की सरहना करते हुए कहा, “वह एक संवेदनशील इंसान थे और सभी मिलने आने वालों के लिए वक़्त निकालते और उनसे मिलते थे। मंगोलिया में बौद्ध धर्म के लिए उनके द्वारा शुरू किये गए सभी कार्य आज भी सुचारू रूप से चल रहे हैं।“

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने हार्दिक प्रसन्नता को ज़ाहिर किया और कहा,
आई.जी.एन.सी.ए. लगातार जिस तरह खूबसूरती से कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है, उन्हें हर बार यहाँ आने पर ख़ुशी होती है।

संसद के शीतकालीन सत्र के चलते हुए वह वेनेरेबल कुशक बकुला रिनपोछे के लिए कार्यक्रम में आये। उन्होंने सदस्य सचिव ड़ॉ. सच्चिदानंद जोशी और उनकी टीम को बधाई देते हुए संस्थान की प्रगति पर ख़ुशी ज़ाहिर की।

धन्यवाद ज्ञापन पूर्वी-एशिया विभागाध्यक्ष डॉ. राधा बनर्जी ने दिया और बताया कि यह प्रदर्शनी, 31 दिसम्बर तक हाल संख्या 5 में सुबह 10 से शाम 5 बजे तक चलेगी।



Nearest metro: Central Secretariat, Gate No. 2 and Janpath, Gate No. 1 & 4
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