भारत भी पाकिस्तान की तरह एक धर्माधारित राज्य अथवा हिन्दू राष्ट्र बन गया होता तो आज उसकी शक्ल क्या होती? उसमें रहने वाले शूद्रों, पिछड़ों या स्त्रिय…
आगे पढ़ें »'वर्तमान साहित्य' अगस्त–सितम्बर, 2014 दुर्लभ साहित्य विशेषांक विज्ञान और युग — जवाहरलाल नेहरू हिंदू संस्कृति — डा. राममनोहर लोहिया…
आगे पढ़ें »सत्ताएं सिर्फ केंचुल बदलती हैं, जहर भरपूर रहता हैं प्रेम भारद्वाज हम सब हैदर ‘वह कराहता है जैसे कुटते वक्त धान वह कराहता है जैसे सोन…
आगे पढ़ें »Mamta Kalia's Hindi Kahani " Khushiyon ki Home Delivery " Part - III "खुशियों की होम डिलिवरी" भाग - 3 : ममता कालिया …
आगे पढ़ें »विचारिए साहित्यकार का अकेलापन अनंत विजय राजेन्द्र यादव की पहली पुण्य तिथि पर हुए आयोजन में तीस पैंतीस लोगों का जुटना वरिष्ठ लेखकों के प्रति …
आगे पढ़ें »संवाद आलोचना के जोखिम नामवर सिंह से कवि केदारनाथ सिंह की बातचीत Risks of Criticism Namvar Singh in Conversation with Poet Kedarnath S…
आगे पढ़ें »समीक्षा बनारसी राग दरबारी में आत्मगाथा - आकांक्षा पारे जो बातें दिल से निकलती हैं वे अक्सर मां के लिए ही होती हैं। यह उपन्यास भी ऐसा ही …
आगे पढ़ें »'लमही' को प्रतिष्ठित "सरस्वती पुरुस्कार" उ.प्र. हिन्दी संस्थान के वर्ष 2013 के सम्मान, 'शब्दांकन' के पाठकों के…
आगे पढ़ें »कहानी उत्तराधिकारी / Uttradhikari - स्वाति तिवारी / Swati Tiwari ''मरने के बाद कितना निर्विकार लगता है चेहरा?'' &…
आगे पढ़ें »स्वाति तिवारी Swati Tiwari बहीखाता (शब्दांकन उपस्तिथि) कहानी: 'वो जो भी है, मुझे पसंद है' कहानी: उत्तराधिकारी ‘सवाल आज …
आगे पढ़ें »हद्द बेशरम हो तुम, जब बच्चे छोटे थे तो कभी गोदी में बिठाया तुमने? आज बड़े आये ह…
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