शनिवार, अक्तूबर 26, 2013

परिचय: प्रांजल धर

प्रांजल धर 

जन्म – मई 1982 ई. में, उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के ज्ञानीपुर गाँव में।

शिक्षा – जनसंचार एवं पत्रकारिता में परास्नातक। भारतीय जनसंचार संस्थान, जे.एन.यू. कैम्पस से पत्रकारिता में डिप्लोमा।

कार्य – देश की सभी प्रतिष्ठित पत्र–पत्रिकाओं में कविताएँ, समीक्षाएँ, यात्रा वृत्तान्त और आलेख प्रकाशित। आकाशवाणी के राष्ट्रीय चैनल और जयपुर से कुछ कविताएँ प्रसारित। देश भर के अनेक मंचों से कविता पाठ। खाड़ी के देशों की कुछ कविताओं का हिन्दी में अनुवाद। सक्रिय मीडिया विश्लेषक। अनेक विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में व्याख्यान। 'नया ज्ञानोदय', 'जनसंदेश टाइम्स' और ‘द सी एक्सप्रेस’ समेत अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित स्तम्भकार। पुस्तक संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए देश के अनेक भागों में कार्य। जल, जंगल, जमीन और आदिवासियों से जुड़े कार्यों में सक्रिय सहभागिता। पूर्वोत्तर भारत में शान्ति के लिए जारी जुझारू आन्दोलन में शान्ति साधना आश्रम के साथ मिलकर कार्य। 1857 की 150वीं बरसी पर वर्ष 2007 में ‘आदिवासी और जनक्रान्ति’ नामक विशेष शोधपरक लेख प्रकाशन विभाग द्वारा अपनी बेहद महत्वपूर्ण पुस्तक में चयनित व प्रकाशित। अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों में लेख शामिल। बीबीसी और वेबदुनिया समेत अनेक वेबसाइटों पर लेखों व कविताओं का चयन व प्रकाशन। अवधी व अंग्रेजी भाषा में भी लेखन।

पुरस्कार व सम्मान - वर्ष 2006 में राजस्थान पत्रिका पुरस्कार। वर्ष 2010 में अवध भारती सम्मान। पत्रकारिता और जनसंचार के लिए वर्ष 2010 का प्रतिष्ठित भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार। 2012 में गया, बिहार में आयोजित मगध पुस्तक मेले में पुस्तक-संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्यास की तरफ से सर्वश्रेष्ठ विशेष सम्मान। फरवरी’ 2013 में गया, बिहार में ‘बज़्म-ए-कलमकार’ की तरफ से विशेष लेखक सम्मान। वर्ष 2013 में इन्दौर में सम्पन्न सार्क के अन्तरराष्ट्रीय भाषायी पत्रकारिता महोत्सव में विशिष्ट अतिथि के दर्ज़े से सम्मानित। वर्ष 2013 में पंचकूला में हरियाणा साहित्य अकादेमी की मासिक गोष्ठी में मुख्य कवि के रूप में सम्मानित। हाल ही में 2012 के लिए कविता का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार।

पुस्तकें – ‘समकालीन वैश्विक पत्रकारिता में अख़बार’ (वाणी प्रकाशन से)। राष्ट्रकवि दिनकर की जन्मशती के अवसर पर 'महत्व : रामधारी सिंह दिनकर : समर शेष है'(आलोचना एवं संस्मरण) पुस्तक का संपादन। ‘अनभै’ पत्रिका के चर्चित पुस्तक संस्कृति विशेषांक का सम्पादन।

सम्पर्क
प्रांजल धर
2710, भूतल, डॉ. मुखर्जी नगर, दिल्ली – 110009
मोबाइल- 099 90 66 5881
ईमेल- pranjaldhar@gmail.com 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

गूगलानुसार शब्दांकन

loading...