रविवार, अगस्त 27, 2017

नहीं देखी हाई कोर्ट की ऐसी अवहेलना



आंखें राम रहीम की नहीं, मुख्यमंत्री की बंद

हरियाणा से फैली इस अराजकता को देश कभी माफ़ नहीं कर सकेगा। 

     — कल्पेश याग्निक

Photo: Dainik Bhaskar
निर्दोष नागरिकों की ज़िंदगी को अराजक उपद्रवियों के हवाले करने में ही मनोहर लाल ख़ट्‌टर सरकार नहीं डरी



एक-के-बाद एक निर्दोष नागरिकों को लाश में बदला जा रहा है। चारों तरफ़ आग, उपद्रव व चीख पुकार मची हुई है। और इन लाशों के ढेर पर दो दोषी बैठे हैं। पहला, यौन शोषण का दोषी एक बाबा - जिसके लाखों-लाख ‘प्रेमी’ हिंसा का निर्दयी नृत्य कर रहे हैं। दूसरा, कमजोरी का प्रतीक एक मुख्यमंत्री- जिसके लाखों-लाख पुलिस-प्रशासनिक बल इस रक्तपात को रोकने में नकारा सिद्ध हो चुका है।

हरियाणा का हर व्यक्ति जानता था कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां के कोर्ट में पेश होने पर क्या-क्या घट सकता है। बल्कि समूचे नॉर्थ इंडिया में राजनीतिक क्षेत्रों, पुलिस-प्रशासन, कानून के जानकारों और मीडिया ने हिंसा की पूरी आशंका तीन दिन पहले ही जता दी थी।

किन्तु हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर तो राम रहीम पर मानों विश्वास किए बैठे थे। यहां तक कि पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने फटकार लगाई कि जमा हो चुके लाखों डेरा समर्थकों को खदेड़ने में विफल डीजीपी को बर्खास्त कर देना चाहिए। किन्तु डीजीपी को तो दूर, रात साढ़े तीन बजे तक एक डेरा प्रेमी तक को हटाया नहीं गया।


हाई कोर्ट की ऐसी अवहेलना और ऐसी अवमानना पहले नहीं देखी गई। विशेषकर, जब यौन शोषण का दोष सिद्ध होने की स्थिति में ये लाखों समर्थक क्या कर सकते हैं - सरकार खूब समझती थी।

हाई कोर्ट क्या, निर्दोष नागरिकों की ज़िंदगी को अराजक उपद्रवियों के हवाले करने में ही मनोहर लाल ख़ट्‌टर सरकार नहीं डरी।

वोटों के लिए कोई सरकार किसी यौन अपराधी से इस तरह जुड़ सकती है, विश्वास नहीं होता। वोट बैंक का ऐसा आपराधिक मोह हमारी राजनीति को कहां ले जाएगा?

जानना जरूरी होगा कि आधी रात को पुलिस डेरा प्रेमियों को पंचकूला से बाहर भेजने के लिए ‘शांति’ से अपील करती रही। कोई क्यों जाएगा? फिर ‘शांति’ का बड़ा पाखंड शुरू हुआ। शांतिपूर्ण पुलिस गश्त हुई। और शांतिपूर्ण धारा 144 की निषेधाज्ञा लगा दी गई। और सेना ने शांतिपूर्ण फ्लैग मार्च किया।

शांति के इस पाखंड से गुण्डों को खुली छूट मिल गई। फिर दिखा हरियाणा के सीने पर गुण्डों का फ्लैग मार्च। फ़ायदा उठाकर घातक से घातक हथियार इकट्‌ठे हो गए। जिसके ठीक उल्टे, पुलिस या कि अर्धसैनिक बलों के जवान के हाथ की लाठी या अन्य हल्के हथियार एक बार भी नहीं उठे। सज़ा के पंद्रह मिनट के भीतर ही मौतें शुरू हो गईं।

राम रहीम का दबाव जो था खट्‌टर सरकार और पूरे प्रशासन पर।

राम रहीम इसलिए इतना शक्तिशाली, प्रभावशाली और वैभवशाली बाबा बन पाया - चूंकि हर राजनीतिक पार्टी उसके चरणों में पड़ी देखी गई है। क्योंकि, साफ़ देखा जा सकता है इतने अंध समर्थकों वाले किसी भी व्यक्ति को हर पार्टी आकर्षित करना चाहेगी ही। एक ‘कल्ट’ बन चुका डेरा, स्वाभाविक है करोड़ों रुपए ग़रीबों को मदद करने में ख़र्च करता होगा। अंधभक्ति का यही आधार है। इतना पैसा कहां से आता होगा? अगर संपत्ति जब्त हुई तो पता चलेगा कि कितना पैसा है।


किन्तु इस भाजपा सरकार के लिए राम रहीम सबसे ख़ास है - क्योंकि पहली बार 2014 में खुलकर भाजपा को समर्थन दिया। पहले कांग्रेस को हरियाणा-पंजाब में बिना खुले साथ देते थे। अकाली भी उससे अछूते नहीं रहे।

देश हरियाणा की हिंसा और निर्दोष नागरिकों की सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान हत्या का निकृष्ट रूप देख चुका है। रामपाल नामक हत्या का आरोपी इसी तरह पांच-पांच दिन तक हरियाणा को बंधक बना कर रख चुका है। जाट आन्दोलन की तो हाई कोर्ट ने सरकार को याद दिलाई कि वैसी अराजकता न फैले!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चाहिए कि मनोहर लाल खट्‌टर को बर्खास्त कर दें। खट्‌टर को चाहिए कि जाने से पहले डीजीपी को बर्खास्त कर दें। हाई कोर्ट को चाहिए कि राम रहीम की सज़ा को अपनी निगरानी में लें - क्योंकि रेपिस्ट करार दिए जाने के बाद शांतिपूर्ण ढंग से, हाथ जोड़े, आंखें बंद किए राम रहीम पूरी सुरक्षा से वीवीआईपी बन कर, हेलिकॉप्टर से रोहतक की आरामदेह ‘जेल’ में भेज दिया गया। आंखें राम रहीम की नहीं, मुख्यमंत्री की बंद हैं। किन्तु हरियाणा और देश की आंखें खुल चुकी हैं।

(साभार दैनिक भास्कर, लेखक समूह के ग्रुप एडिटर हैं)
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ऋषिकेश मुखर्जी और मुकेश - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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