शुक्रवार, सितंबर 08, 2017

माँ पूछती हैं "चाहते क्या हो तुम अभिसार ?" #AbhisarSharma #GauriLankesh



सबसे ज्यादा चिंताजनक इनके वो बेकाबू समर्थक हैं, जिनपर मैं नहीं बता सकता बीजेपी और उसकी सहयोगी संस्थाओं का काबू है या नहीं।

— अभिसार शर्मा 

गौरीलंकेश की हत्या, सिर्फ एक पत्रकार की हत्या नहीं है...यह राज्य की हाँ में हाँ नहीं मिलाने वाले, राज्य की कमियों पर ऊँगली उठाने वाले, आवाज़ों, विचारों और भारतीय संस्कृति के आत्मबल की हत्या की कोशिश है...लगता है बिना-हत्यारों के की जाने वाली इन हत्याओं का कारक और कारण, सन्देश भेजता रहता है कि मैं वह जल्लाद हूँ जो अपने खिलाफ़ उठने वाली आवाज़ को मार देता हूँ... अभिसार मित्र हैं, अनेक और पत्रकार भी मित्र हैं, मैं भी हूँ, आप भी हैं...और गौरीलंकेश की हत्या, बिलकुल हमारे मुहाने पर हुई हत्या है, हम ज़िन्दा हैं लेकिन  मुहाने पर हो रही इन हत्याओं में 'गोली' हमें छू कर ही जा रही है. बस! 
- सत्यमेव जयते / भरत तिवारी





आज सुबह मां का फोन आया...कहती हैं, चाहते क्या हो तुम? गौरी लंकेश को भी मार डाला। उसे लोग कुछ दिन याद करेंगे, फिर भूल जाएंगे। तुम जो लिख बोल रहे हो, मुठ्ठी भर लोगों की वाहवाही मिल जाएगी। मगर किसी की सोच नहीं बदल सकते तुम। तुम्हे कुछ हो गया तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, रोएंगे तुम्हारे माँ-बाप, तुम्हारे बच्चे, तुम्हारी बीवी। कुछ नहीं बदलेगा। मां करे भी तो क्या करे। कभी चाचा, कभी मौसाजी, कभी पापा के दोस्त यहीं फोन करके बोलते हैं, "अभिसार को संभालो। कहो कंट्रोल मे लिखे। क्या जरूरत है ये सब बोलने की। कोई इतना सीधे थोड़े ना बोलता है? "

पिछले दो साल मे, कई बार पुलिस सुरक्षा लेनी पड़ी है। लोग अनापशनाप गन्दे व्हाट्सएप ग्रुप मे शामिल कर लेते हैं और गाली-गलौज करते रहते हैं। मगर गौरी लंकेश की हत्या के बाद मानो लोगों की संदेशों की बाढ़ सी लग गई है।



कोई कहता है, आप प्राइवेट सुरक्षा ले लो। कोई कहता है आप कुछ दिनो को लिए छुट्टी पर चले जाओ। सुरक्षा? अरे भई, हम पत्रकार हैं। लोगों से रूबरू होना मेरा काम है। उनके दिल की बात सुनना। मैने अब तक देश दुनिया के कई कोनों से रिपोर्टिंग की है। बस्तर से लेकर इस्लामाबाद तक। कहां कहां ले जाउँगा सुरक्षा? और मैं ऐसा क्या अजूबा कर रहा हूं कि जान पर बन आई है?



कांग्रेस नेता शहज़ाद पूनावाला ने तो ये ट्वीट तक कर दिया कि अगला नम्बर क्या अभिसार शर्मा का है? उन्होंने बेशक अपनी चिंता जताई है, मगर सुनकर अच्छा नहीं लगता ना? 






लंकेश की जिस रात हत्या हुई, उसी रात से शुभचिंतकों के संदेश आने शुरू हो गए थे। प्रेस क्लब भी गया था। वहां भी कुछ लोग यही बोल रहे थे। इतना असर नहीं पड़ा। मगर जब मां ने कहा ना, तो मानो पैरों की नीचे की जमीन बिखर गई। हौसले इतना कमजोर लगने लगे कि क्या बताऊं।

कभी भी अपने पूरे कैरियर मे ऐसा महसूस नहीं किया। कांग्रेस के दस सालों मे भी सरकार पर सवाल किये थे। मगर कभी जान पर नहीं बन आई। सरकारें दबाव बनाती हैं। मगर मोदी सरकार कई लेवेल्स पर आपरेट करती है। सरकारें जो दबाव पत्रकार पर बनाती हैं, वो तो हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक इनके वो बेकाबू समर्थक हैं, जिनपर मैं नहीं बता सकता बीजेपी और उसकी सहयोगी संस्थाओं का काबू है या नहीं। संस्थाओं मे संस्थाओं का तिलिस्म है। और उनके कट्टर...

गौरी को तो मार दिया। ऐसी ही खुली धमकी कई और पत्रकारों को मिलती रहती है। कुछ नमूने आपको सामने हैं। स्वाती चतुर्वेदी कहती हैं, मैं अपनी सुरक्षा तय नहीं कर सकती। धमकियां मिलती रहती हैं। स्वाती ने बीजेपी प्रायोजित ट्रोल्स पर किताब लिखी थी। रवीश से बात होती रहती है। उनपर भी परिवार का दबाव है। कई चीजें बताई, जो मैं नहीं बता सकता, यहां।



इतना नाराज़, गालीबाज़ देश बनाकर आप क्या हासिल करना चाहते हैं। इस नकारात्मक ऊर्जा से देश का भला होने वालों है या इसकी कोई गुप्त योजना है, ये तो ऐसी सोच को बढ़ावा देने वाले लोग ही समझा सकते हैं।

मोदीजी इन गालीबाजों को ट्विटर पर क्यों फालो करते हैं। क्या संदेश देना चाहते हैं। क्या मजबूरी है? और इन गालीबाजों को शर्म नहीं कि देश के प्रधानमंत्री तुम्हें फालो करते हैं। कम से कम उनकी इज्जत तो करो।

फिलहाल, मां की चिंता के आगे कशमकश मे हूं। उम्र के इस पड़ाव मे बड़ी ज्यादती होगी किसी भी बेटे के लिए माँ को इस तरह का तनाव, कष्ट देना। जानबूझ के कौन बेटा ऐसा करना चाहेगा ... 

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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3 टिप्‍पणियां:

  1. I was watching the condolence message of Kanhaiya Kumar,where he said that "Shaheed Gowri Lankesh ji" had told him that " If you are being attacked by Sangis that means you are on a TRUE path! I really feel that you too are on a TRUE path where in you are doing justice to your JOURNALISM profession and I wish you all the best and pray to "ALMIGHTY " that he may protect you and your beloved ones.

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (09-09-2017) को "कैसा हुआ समाज" (चर्चा अंक 2722) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबको सम्मान करना चाहिए

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