कृष्णा सोबती 'नए साल की देहरी पर'

 कृष्णा सोबती 'नए साल की देहरी पर' जनसत्ता 1 जनवरी 2013:

 




साल के पहले दिन, जनसत्ता के मुखपृष्ठ पर, हम-सब की व्यथा को, भारत के महामहिम राष्ट्रपति के सामने रखने के लिये, "शब्दांकन", श्रीमती कृष्णा सोबती व जनसत्ता का आभारी है


nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

  1. 'आज की पढ़ी लिखी युवतियां 'लिपि पुती ' इकाई नहीं, आज़ादी के बाद संविधान से मिले अधिकारों के अनुरूप वे व्यक्ति की संज्ञा अर्जित कर चुकी हैं...'
    ऐसी उर्जा आप ही भर सकती हैं आज की जनशक्ति में ! धन्यवाद् !

    जवाब देंहटाएं

ये पढ़ी हैं आपने?

वैलेंटाइन डे पर विशेष - 'प्रेम के नौ स्वर' - ऋत्विक भारतीय की कविताएं | Valentine Day Poetry in Hindi
असग़र वजाहत का नाटक 'ईश्वर-अल्लाह'  | Asghar Wajahat's Play 'Ishwar-Allah'
आन्तरिक तार्किकता की खोज ~ मृदुला गर्ग की 'सम्पूर्ण कहानियाँ' | Mridula Garg Complete Stories
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
वह कलेक्टर था। वह प्रेम में थी। बिल उसने खुद चुकाया। | ग्रीन विलो – अनामिका अनु
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
काटो | आलोक रंजन की कहानी | हिंदी साहित्य | शब्दांकन