साल के पहले दिन, जनसत्ता के मुखपृष्ठ पर, हम-सब की व्यथा को, भारत के महामहिम राष्ट्रपति के सामने रखने के लिये, "शब्दांकन", श्रीमती कृष्णा सोबती व जनसत्ता का आभारी है
📚 कृष्णा सोबती विशेष
यदि आपको नए साल की देहरी पर लेख पसंद आया हो तो कृष्णा सोबती की कहानियाँ, उपन्यास, कविताएँ, लेख, संस्मरण, साक्षात्कार, पत्र तथा अन्य दुर्लभ सामग्री भी शब्दांकन पर पढ़ें।







1 टिप्पणियाँ
'आज की पढ़ी लिखी युवतियां 'लिपि पुती ' इकाई नहीं, आज़ादी के बाद संविधान से मिले अधिकारों के अनुरूप वे व्यक्ति की संज्ञा अर्जित कर चुकी हैं...'
जवाब देंहटाएंऐसी उर्जा आप ही भर सकती हैं आज की जनशक्ति में ! धन्यवाद् !