कृष्णा सोबती 'नए साल की देहरी पर'

नए साल की देहरी पर — कृष्णा सोबती
नए साल की देहरी पर — कृष्णा सोबती (जनसत्ता, 1 जनवरी 2013)
 




साल के पहले दिन, जनसत्ता के मुखपृष्ठ पर, हम-सब की व्यथा को, भारत के महामहिम राष्ट्रपति के सामने रखने के लिये, "शब्दांकन", श्रीमती कृष्णा सोबती व जनसत्ता का आभारी है



📚 कृष्णा सोबती विशेष

यदि आपको नए साल की देहरी पर लेख पसंद आया हो तो कृष्णा सोबती की कहानियाँ, उपन्यास, कविताएँ, लेख, संस्मरण, साक्षात्कार, पत्र तथा अन्य दुर्लभ सामग्री भी शब्दांकन पर पढ़ें।

📖 कृष्णा सोबती : शब्दांकन पर उपलब्ध समस्त रचनाएँ

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

  1. 'आज की पढ़ी लिखी युवतियां 'लिपि पुती ' इकाई नहीं, आज़ादी के बाद संविधान से मिले अधिकारों के अनुरूप वे व्यक्ति की संज्ञा अर्जित कर चुकी हैं...'
    ऐसी उर्जा आप ही भर सकती हैं आज की जनशक्ति में ! धन्यवाद् !

    जवाब देंहटाएं

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
चाइल्ड इज़ द फ़ादर ऑफ़ मैन | वंदना राग | सरकफंदा उपन्यास अंश
 प्रत्यक्षा के उपन्यास शीशाघर पर राजीव कुमार का गहन पाठ
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
कहानी कैसे लिखें — कहानी के तत्व — रोहिणी अग्रवाल
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार : विजयश्री तनवीर : लोकल ट्रेन, मातृत्व और एक अधूरी मोहब्बत की मार्मिक कहानी
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
बिहारियों का विस्थापन: ‘समय की रेत पर’ की कथा