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कथादेश लायी रहस्य-कल्पना कथा-प्रतियोगिता | Mystery Fiction Writing - A Competition by Kathadesh

मार्च 6, 2014

कथादेश और सर्नुनोस का सहयोगी उपक्रम 

हिन्दी की रहस्य-कल्पना कथा-प्रतियोगिता

कथा-प्रविष्टियों के लिये आमन्त्रण

प्रतियोगिता अमरीकी लेखक एडगर एलेन पो तथा जापानी लेखक रैम्पो एडोगावा के कृतित्व के लिये श्रद्धांजलि


सर्नुनोस बुक्स कथासाहित्यों को भौगोलिक सीमाओं के पार प्रोत्साहित, प्रसारित प्रचारित करने के लिये समर्पित प्रकाशन का आरंभ है। यह संस्था सिंगापुर मेँ पंजीकृत है तथा भारतीय और फ़्रेन्च लेखकों और अध्येताओं द्वारा संस्थापित और संचालित है।
दस सर्वश्रेष्ठ कथाओं को 25,000.00 (पच्चीस हज़ार)

अंतिम तिथि 30 जुलाई 2014
          सर्नुनोस उर्वरता के केल्टिक (भारोपीय भाषा परिवार और संस्कृति की एक शाखा) देवता का नाम है। सिंधु घाटी सभ्यता की सील पर अंकित एक पशुपति के सदृश देवता से उनकी छवि बहुत मिलती जुलती है – सीमाओं के परे का प्रतीक।

प्रतियोगिता के विषय मेँ

          प्रतियोगिता का उद्देश्‍य हिन्दी मेँ कथालेखन को प्रोत्साहित करना तथा प्रतिष्ठित व उदीयमान लेखकों को समान रूप से अवसर देना है। दस सर्वश्रेष्ठ कथाओं को 25,000/= प्रत्येक का पुरस्कार दिया जायेगा। भागीदारों की संख्या कम से कम सौ होने पर ही प्रतियोगिता संपन्न की जायेगी।

          भागीदारी के लिये कुल योग्यता एक कथा-प्रविष्टि का निवेदन। आयु, प्रकाशन इत्यादि की कोई सीमा नहीं।

कालानुक्रम

प्रविष्टियाँ निम्नलिखित पते अथवा ईमेल पर 30 जून 2014 तक प्राप्त हो जानी चाहिये।
परिणाम की घोषणा यथासंभव 31 अगस्त को होगी।

पता
      कथादेश पॉकेट 
      L/57, 
      दिलशाद गार्डेन
      दिल्ली

ईमेल kathadeshsahyatra@gmail.com

प्रतियोगिता के नियम

  • भागीदारी के लिये कुल योग्यता एक कथा-प्रविष्टि का निवेदन। आयु, प्रकाशन इत्यादि की कोई सीमा नहीं।
  • रचना मौलिक और पूर्णतः ( अन्तर्जाल समेत ) अप्रकाशित और अप्रसारित होनी चाहिये।
  • प्रत्येक प्रविष्टि के साथ लेखक के नाम पते टिकट समेत एक लिफ़ाफ़ा संलग्न होना चाहिये। अगर डाक से भेजी गयी प्रविष्टि के लिये प्राप्तिसूचना अभीष्ट हो तो नाम पते के साथ एक पोस्टकार्ड भी संलग्न करें। ईमेल द्वारा प्राप्त प्रविष्टियों की प्राप्तिसूचना ईमेल द्वारा दी जायेगी।
  • असामान्य स्थितियों में प्रतियोगिता को निरस्त करने का अधिकार प्रबन्धकों के पास सुरक्षित है, उदाहरण के लिये पर्याप्त प्रविष्टियाँ प्राप्त न होने की दशा मेँ।
  • एक लेखक की एक ही प्रविष्टि स्वीकार होगी।
  • प्रविष्टियों का मूल्यांकन प्रतियोगिता के शीर्षक की अनुरूपता व साहित्यिक उत्कृष्टता के आधार पर होगा।
  • अधिकतम शब्दसीमा लगभग 10,000 होनी चाहिये।
  • प्रविष्टि काग़ज़ के एक ओर, मार्जिन छोड़ कर साफ़ साफ़ लिखित अथवा टंकित होनी चाहिये।
  • प्रतियोगिता मेँ प्रविष्टि के अलावा भी रचना को अन्यत्र विचारार्थ भेजा जा सकता है किन्तु अन्यत्र स्वीकृति की दशा में सूचना तथा प्रतियोगिता से वापसी अनिवार्य है।
  • कॉपीराइट हर हाल मेँ लेखक का रहेगा।
  • परिणाम की घोषणा के बाद हिन्दी में प्रथम प्रकाशन का दो वर्ष की अवधि के लिये एकाधिकार और उसके बाद सामान्य अधिकार कथादेश के पास सुरक्षित रहेगा।
  • परिणाम की घोषणा के बाद अंग्रेज़ी, फ़्रेन्च और स्पैनिश में अनुवाद और प्रथम प्रकाशन का दो वर्ष की अवधि के लिये एकाधिकार और उसके बाद सामान्य अधिकार सर्नुनोसके पास सुरक्षित रहेगा।
  • निर्णायक मण्डल का निर्णय अन्तिम होगा और इस विषय मेँ कोई पत्राचार नहीं होगा।
  • प्रविष्टि के एक बार दाखिल हो जाने के बाद उसको बदला अथवा सम्पादित नहीं किया जा सकता।
  • प्रविष्टि के विषय मेँ अलग से कोई 'फ़ीड-बैक' नहीं दिया जायेगा।
  • अन्ध-निर्णय द्वारा परिणाम निकाला जायेगा अतः प्रविष्टि के आलेख पर भागीदार का नाम या पता अंकित नहीं होना चाहिये। प्रविष्टि के प्रथम पृष्ठ पर ये विवरण अंकित हों किन्तु आलेख उस पृष्ठ से आरंभ न किया जाय। आलेख के प्रत्येक पृष्ठ पर रचना का नाम अंकित किया जाय।
  • हमारा उद्देश्‍य दस कहानियों के चुनाव का है लेकिन स्तर को देखते हुए संख्या घटाई भी जा सकती है। असामान्य स्थितियों मँ प्रतियोगिता के ये नियम बदले भी जा सकते हैं लेकिन ऐसे किसी भी परिवर्तन के लिये हम अपने कारण बतायेंगे।

साथी कथाकारों के लिये सलाह/सुझाव के कुछ शब्द

          रहस्य का मतलब अनिवार्यतः अपराध नहीं है। आपकी कहानी मेँ अपराध के अंश हो भी सकते हैँ, यदि यह स्पष्ट हो कि उनका इस्तेमाल मात्र धक्का या उत्तेजना पहुँचाने के लिये नहीं किया गया है। हमारी प्रतियोगिता अमरीकी लेखक एडगर एलेन पो तथा जापानी लेखक रैम्पो एडोगावा के कृतित्व के लिये श्रद्धांजलि स्वरूप है और हमारा यह मानना भी है कि रहस्य/सनसनी विधा के पास एक समृद्ध साहित्यिक विरासत मौजूद है। कहा गया है कि साहित्य का पहला जासूस चरित्र चार्ल्स डिकेन्स के 'ब्लीक हाउस' का इन्स्पेक्टर बकेट था। दर-अस्ल चीनी कथा साहित्य मेँ जासूस जज बाओ सोलहवीं शताब्दी मेँ और जज डी अठारहवीं शताब्दी मेँ ही अवतरित हो चुके थे। हाल के वक्तों में अमारा लखाउस ( इटली), जौनाथन लेथेम ( यू.एस.ए) मीयूकी मियाबे (जापान), पाको इगनासियो ताइबो II (मेक्सिको) और पीटर हू (डेनमार्क) ने ऐसे ताकतवर थ्रिलर लिखे हैं जिन्होंने विधा को साहित्यिक सौन्दर्य और सामाजिक कमेण्ट्री से समृद्ध किया है। दीदिये देनैंक्स के पोलीस प्रक्रिया पर आधारित उपन्यास 'मर्डर इन मेमोरियम' की वजह से फ़्रान्स मेँ नात्ज़ी गठबन्धनकारियों पर अभियोग चला तथा सोलह जु्लाई को फ़ासीवास और नस्लवाद पर मनन चिन्तन का दिन घोषित कर दिया गया। स्कैण्डिक देशों के लेखकों ने भी कुछ शाहकारों की रचना की है।
कुछ लेखक अपने घटनास्थल को मुख्यधारा से इतर या हाशिये की जगहों पर ले गये हैं जैसे

  • यूएसए की नवाजो इण्डियन बस्ती ( टोनी हिलरमैन की सार्जेण्ट लीपहॉर्न सिरीज़), 
  • नॉर्थ कोरिया ( जेम्स चर्च की इन्स्पेक्टर ओ सिरीज़) और 
  • लाओस ( कोलिन कॉटरिल की डॉ सीरी सिरीज़)। 

कुछ अन्य लेखकों ने अपने जासूसों से सुदूर अतीत के मामले सुलझवाए हैं। ब्रिटिश जासूसी साहित्य के दो उत्कृष्ट उदाहरण जोसेफ़िन टे और कोलिन डेक्सटर के उपन्यास है। टे की 1951 की किताब 'द डॉटर ऑफ़ टाइम' मेँ स्कॉटलैण्ड यार्ड के इंस्पेक्टर एलेन ग्राण्ट ने किंग रिचर्ड III ( 1452 से 1485) के अपराधों की जाँच पड़ताल की है। डेक्सटर की 'द वेन्च इज़ डेड' (1989) मेँ इन्स्पेक्टर मोर्स 1859 मेँ घटित अपराध सुलझाता है।

संक्षेप मेँ: दुनिया भर में लेखकों ने हमारी थीम को लेकर बहुत कुछ किया है। आप भी कर सकते हैँ। अपनी कल्पना को काम पर लगाइये और अपनी आवाज़ मे लिखिये और ऐसी कहानी दीजिये जो रोचक, पठनीय, साहित्यिक और सामाजिक कमेण्ट्री से संयुक्त हो।

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सर्नुनोस बुक्स प्राइवेट लिमिटेड लेखन और अकादमिक क्षेत्र मेँ थोड़ा कुछ दखल रखने वाले उत्साही और शौकीन पाठकों का एक दल हैँ। वे कथा साहित्य को सीमा-पार ले जाना चाहते हैँ। शुरुआत वो विकासशील देशों की किताबों के फ़्रेन्च तथा अंग्रेजी अनुवादों से करेंगे। उनका फ़ोकस नयी सामग्री की रचना और नये लेखकों को अवसर प्रदान करने पर होगा। उनका पक्षपात लोकप्रिय/जासूसी साहित्य के लिये थोड़ा अधिक है।

दल (अकारादि क्रम) 

अशीष कुमार सिंगापुरवासी जहाँ वे एक टेक्नॉलॉजी कम्पनी मेँ काम करते हैँ। आईआईटी रुड़की (तब यूनिवर्सिटी ऑफ़ रुड़की) से इण्डस्ट्रियल इंजीनियरिंग, एनआईटीआईई मुम्बई से स्नातकोत्तर, तथा आईआईटी देहली से मैनेजमेण्ट मे पीएच.डी की उपाधियाँ। विशेषज्ञ-समीक्षित जर्नलों में पाँच परिपत्र तथा एक पाठ्यक्रम पुस्तक का सहलेखन। उनकी आठ कहानियाँ साहित्यिक पत्रिकाओं और संकलनों में छप चुकी हैं।

गेल हेना उत्तर- पश्‍चिम फ़्रान्स में नान्ते वासी। कानून में पीएच.डी तथा नागरिक कानून की विशेषज्ञता सहित विश्‍वविद्यालय मेँ व्याख्याता।लेखन तथा सहलेखन मेँ तीन किताबे तथा बीस किताबों में अध्याय व विशेषज्ञ-समीक्षित जर्नलों मेँ अनेक आलेख। 2010 के रहस्य-रोमांच उपन्यास प्रतियोगिता 'Mauves en Noir' के पाँच विजेताओं में से एक।

मार्क हेना नान्ते वासी। गणित मेँ बीए, कम्प्यूटर साइंस मेँ रुचि, एक कृषि विद्यालय में अध्यापन। प्रखर परिहास-विनोद भाव जिसे वे दैनिक जीवन में विविध विषयों पर निर्मम पेंसिल रेखाओं से लागू करते हैं। उत्साही पाठक। एशिया में दीर्घस्थायी रुचि तथा रहस्यकथाओं का शौक।

मीता कुमार दिल्ली विश्‍वविद्यालय के मिराण्डा हाउस मेँ अर्थशास्त्र विभाग की सदस्य। विकास के अर्थशास्त्र के अध्यापन में विशेषता। छात्रों के लिये अध्यापन में अन्त:अनुशासनिक परिप्रेक्ष्य की शुरुआत तथा अन्त:सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने के लक्ष्य से अनेक राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय वाद-विवाद, गोष्ठियों और सम्मेलनों के आयोजनों मेँ गहराई से शामिल। पुस्तकों से सामान्यतः तथा जासूसी व सुखान्त पुस्तकों से विशेषतः प्यार।

नॉलवें हेना अर्थशास्त्र मेँ पीएच.डी, शोधार्थी की हैसियत से विकासशील देशों मेँ शिक्षा पर विशेषज्ञ, पिछले दस वर्षों में दो पुस्तकों की सहलेखिका, एक जर्नल के विशेषांक का सम्पादन, बीस पुस्तकों मेँ अध्याय, और समाजशास्त्र के विशेषज्ञ-समीक्षित जर्नल में अनेक आलेख। पढ़ने का, विशेषतः जासूसी किताबें, शौक।

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