विश्वनाथ प्रसाद तिवारी: सम्मान हम अर्जित करते हैं किसी को नहीं दे सकते



मैं यशः काया की तुलना में अपनी भौतिक काया तुमको अर्पित कर सकता हूँ 

- कालिदास 

कल (18 नवम्बर 2015) त्रिवेणी कला संगम सभागार में 'युवा पुरस्कार 2015' की शाम थी, साहित्य अकादमी अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी जी ने इस अवसर पर युवा साहित्यकारों से कहा - "पुरस्कार से अच्छा शब्द है सम्मान, पुरस्कार से कुछ गिफ्ट जैसा भाव आ जाता है, कुछ रूपए पैसे का भी भाव आ जाता है लेकिन सम्मान इस सब से ऊपर होता है. रुपया हम अपने बच्चों को दे सकते हैं पर जो सम्मान हम अर्जित करते हैं वो किसी को नहीं दे सकते, वो बिलकुल निजी - बिलकुल व्यक्तिगत चीज़ है".



Listen to Dr. Vishwanath Prasad Tiwari
(President, Sahitya Akademi)
speaking on the occasion of
'Yuva Puruskar' 2015.

अकादमी अध्यक्ष ने अपने वक्तव्य में कालिदास को उद्दत करते हुए कहा -
" कालिदास ने जब राजा दिलीप और सिंह का वर्णन किया है... सिंह, राजा दिलीप की गाय नंदिनी को खा जाना चाहता है तो राजा दिलीप मना कर देते हैं. राजा अपनी काया को सिंह के सामने अर्पित करते हैं तो सिंह कहता है -
एकातपत्रं जगतः प्रभुत्वं नवं ययः कान्तं इदं वपुश्च ।
अल्पस्य हेतोर्बहु हातुं इच्छन्विचारमूधः प्रतिभासि मे त्वं ।।
यानि राजा तुम इतने सुन्दर शरीर को एक गाय के कारण मुझे दे रहे हो, कितने मुर्ख हो...
तब राजा दिलीप सिंह से कहता है -
मेरे दो शरीर है एक मेरी यशः काया और दूसरी यह भौतिक काया. अगर मैं भौतिक काया तुमको अर्पित कर दूंगा तो मेरी यशः काया बच जाएगी  क्योकि मैं इसका रक्षक हूँ, मैं अपनी यशः काया तुमको नहीं दे सकता. मैं यशः काया की तुलना में अपनी भौतिक काया तुमको अर्पित कर सकता हूँ."

युवा पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकारों के परिवारजनों से भरे हाल में, हिंदी साहित्य के अग्रजों की उपस्थिति नगण्य होनी अखरने वाली थी, कारण जो भी हो युवा पीढ़ी को अपना स्नेह, अपना आशीर्वाद देने के लिए अगर हमारे वरिष्ठ जन वहां होते तो बहुत अच्छा होता. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी जी की बॉडी लैंग्वेज तथा चेहरे के भावों से भी यह लग रहा था कि उन्हें भीतर कहीं वरिष्ठों की उपस्तिथि की कमी दुःख पहुँचा रही है. कुछ कमी प्रबंधन में भी दिखी, देर से पहुंचे सम्मानित हो रहे लोगों के परिवार जन और अन्य अतिथियों को दरबान, हाल में जाने से रोकता नज़र आया, उसका व्यवहार भी आपतिजनक था... ऐसे समय में इस तरह की बातों का साहित्यिक कार्यक्रम में प्रवेश - जहाँ से भी हो रहा हो - रोकना चाहिए.

खैर यह सब अपनी जगह अभी तो अकादमी और सम्मानित युवा पीढ़ी को शब्दांकन की तरफ से मेरी हार्दिक शुभकामनाएं.
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