केदारनाथ सिंह - अक्षर मरते नहीं | Kedarnath Singh Faizabad Book Fair


सिनेमा मनोभाव नहीं दर्शा सकता

- शिवमूर्ति

केदारनाथ सिंह, निर्मल खत्री, शिवमूर्ति, भरत तिवारी, राजकुमार खत्री


मशहूर कवि केदारनाथ सिंह ने आज (1 नवम्बर 2015) यहां कहाकि पुस्तक और पुस्तकालयों की शक्ल अब बदल रही है।मोबाइल में किताबें सिमट रही है। हम भले ही किसी साहित्यकार या कवि की जन्मतिथि न बता पाएं, लेकिन गूगल सबकुछ जानता है। इसके बावजूद किताबों और इलेक्ट्रानिक दुनिया में बहुत बड़ा फर्क है, जो सुख और दोस्ती किताबों के साथ होती है वह इलेक्ट्रानिक माध्यमों से नहीं। किताबों से रिश्तों की इसी श्रृंखला को हमें आगे बढ़ाना है। इसके लिए लोगों और पुस्तकों की दूरी को कम करना होगा। वजह भी उन्होंने खुद बताई। कहाकि मोबाइल की दुनिया बैट्री के साथ 'डाउन' हो जाती है, जबकि किताबों की दुनिया ढिबरी में भी रोशन होती है। उन्होंने कहाकि जिस तेजी से इलेक्ट्रानिक माध्यमों पर चंद पलों में ही सबकुछ सामने होता है, ऐसे में क्या पुस्तकालय बचेंगे? यह यक्ष प्रश्न है।

   



ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता कवि ने कहाकि अक्षर मरते नहीं। यह ब्रह्म तत्व है। बोला हुआ अक्षर कहलाता है तो लिखा हुआ वर्ण। अब यह खुद लोगों को तय करना होगा कि किताबों से दोस्ती का रिश्ता बराबर कैसे बनाए रखें। सिंह  ने कहाकि जैसे किसी दौर में लोग कुएं खोदवाकर पुण्य कमाते थे, उसी तरह अब पुस्तक मेला भी है, जो रिश्तों को बनाने का बड़ा जरिया है। यह भी किसी पुण्य से कम नहीं। वह जीआइसी में आयोजित नारायण दास खत्री मेमोरियल ट्रस्ट के पांच दिनी पुस्तक मेले के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। 



इससे पहले कथाकार शिवमूर्ति ने कहाकि किताब की आवश्यकता हर रूप में बढ़ती जा रही है। पुस्तक मेलों का महत्व भी बढ़ेगा, क्योंकि ज्ञान की गंगा यहां से निकलती है। उन्होंने कहाकि उपन्यासों पर बनने वाले सिनेमा सिर्फ पात्र तक सिमट कर रह जाता है, जबकि साहित्य समग्र रूप में सामने आता है। उन्होंने कहाकि सिनेमा मनोभाव नहीं दर्शा सकता। उदाहरण पेश करते हुए उन्होंने कहाकि पति-पत्नी घर पर हैं, दमड़ी का तेल लायो, अरर पोए, बरर पोए.. टिकुली के भाग्य से बच गयो पति.जैसा भाव साहित्य में ही में मिल सकता है। उन्होंने कहाकि किताबों की जरूरत हर वर्ग को है। अतिथियों का आभार जताते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री ने कहाकि पुस्तकालयों का वजन तो इलेक्ट्रानिक माध्यम हल्का कर सकते हैं, लेकिन भाव नहीं व्यक्त कर सकते। उन्होंने कहाकि यह पुस्तकों से लगाव रखने वालों का शहर है। 


इस मौके पर पुस्तक मेले के दस साल पूरा होने पर मुख्य अतिथि कवि केदारनाथ सिंह ने स्मारिका 'सफर' का विमोचन भी किया गया। इसके साथ ही मास्टर खलीक के चित्रों का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन  पुस्तक मेला प्रभारी रीता खत्री, स्मारिका के संपादक भरत तिवारी ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर ट्रस्ट की अध्यक्ष कुसुम मित्तल, कोषाध्यक्ष राजकुमार खत्री, डॉ. रामशंकर त्रिपाठी, डॉ. हरि प्रसाद दुबे, डॉ. जगन्नाथ त्रिपाठी जलज, पालिकाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता, सिन्धी अकादमी के उपाध्यक्ष अमृत राजपाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामदास वर्मा, ओम प्रकाश ओमी, दुर्गा प्रसाद तिवारी आफत समेत बड़ी संख्या लोग मौजूद थे। 
००००००००००००००००

ये पढ़ी हैं आपने?

मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
Hindi Story: कोई रिश्ता ना होगा तब — नीलिमा शर्मा की कहानी
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
भवतु सब्ब मंगलं  — सत्येंद्र प्रताप सिंह | #विपश्यना
मन्नू भंडारी की कहानी — 'रानी माँ का चबूतरा' | Manu Bhandari Short Story in Hindi - 'Rani Maa ka Chabutra'
कहानी ... प्लीज मम्मी, किल मी ! - प्रेम भारद्वाज
फ्रैंक हुजूर की इरोटिका 'सोहो: जिस्‍म से रूह का सफर' ⋙ऑनलाइन बुकिंग⋘