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इस पागलपन को बंद करो, मोदीजी — जस्टिस काटजू #JusticeKatju @mkatju

नव॰ 10, 2016

500 और 1000 के नोटों के विमुद्रीकरण पर केन्द्र सरकार से मेरी अपील

— जस्टिस मार्कंडेय काटजू 

ख़त्म कीजिये इस पागलपन को, मोदीजी — जस्टिस मार्कंडेय काटजू
Cartoon: the Hindu




डियर मोदीजी

कृपया फ़ौरन अपने इस अनुत्तरदायी, मूर्खतापूर्ण, अनियंत्रित, और लापरवाह आदेश को रद्द कीजिये.

क्या आपको इस बात का अहसास है इसने सारे भारत में आम इंसान के लिए कितनी उथल-पुथल और परेशानी खड़ी कर दी है? शुरू में तो बहुत सारे नासमझ, इससे आने वाले बवंडर से बेख़बर, आपकी बड़ाई यह सोच कर रहे थे कि आपने एक ही झटके में भ्रष्टाचार और  कालेधन का खात्मा कर दिया है. लेकिन अब... जैसे जैसे उन्हें आपके इस बेपरवाह आईडिए से हो रही दिक्क़त को झेलना पड़ रहा है, वो आपको कोसना शुरू कर रहे हैं. आपके चमचे आपको ये सब नहीं बताएँगे, वो तो उल्टा आपको इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ की बधाई देंगे, लेकिन आपका ‘शुभचिन्तक’ होने के चलते मैं आपको यह सच बताने की कोशिश कर रहा हूँ.

Justice Katju | Photo courtesy : tilakmarg.com


500 1000 के नोट आज के समय में हर कोई प्रयोग करता है, क्योंकि आज उसकी वही क़ीमत है जो कुछ सालों पहले 100 रूपए के नोट की होती थी (तेजी से बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण)... आपके इस मूर्खतापूर्ण आदेश ने बहुत सारे हवाला डीलर बना दिए हैं, जो धडाधड अपना काम कर रहे हैं. ये डीलर पाँच सौ के नोट के बदले सौ-सौ के चार नोट दे रहे हैं.

बैंकों के सामने लम्बी कतार लग चुकी है, लोगों को टैक्सियाँ नहीं मिल रहीं, दुकानदारों पर आफ़त आयी हुई है, जगह-जगह ट्रैफिक जाम है, आदि आदि. एक आदमी मुझे मुंबई से बता रहा था उसे 200 रूपए की बिसलरी की कुछ बोतलें पानी पीने के लिए चाहिए थीं, लेकिन वो नहीं ख़रीद पाया क्योंकि उसके पास सिर्फ 500 का नोट था.

बड़ी मछलियों ने, जिनके पास काले धन का अंबार है उन्होंने तो उसे विदेशी बैंकों में भर रखा है, लेकिन आपने वह धन वापस लाने के लिए आपने अपने चुनावी वादे के बावजूद भी कोई ठोस उपाय नहीं किया, और अब उलटे देश के आम जन को परेशानी में डाल रहे हैं.

इस पागलपन को बंद करो, मोदीजी.

(जस्टिस काटजू के ब्लॉग का हिंदी अनुवाद - भरत तिवारी)
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