इस पागलपन को बंद करो, मोदीजी — जस्टिस काटजू #JusticeKatju @mkatju


500 और 1000 के नोटों के विमुद्रीकरण पर केन्द्र सरकार से मेरी अपील

— जस्टिस मार्कंडेय काटजू 

ख़त्म कीजिये इस पागलपन को, मोदीजी — जस्टिस मार्कंडेय काटजू
Cartoon: the Hindu




डियर मोदीजी

कृपया फ़ौरन अपने इस अनुत्तरदायी, मूर्खतापूर्ण, अनियंत्रित, और लापरवाह आदेश को रद्द कीजिये.

क्या आपको इस बात का अहसास है इसने सारे भारत में आम इंसान के लिए कितनी उथल-पुथल और परेशानी खड़ी कर दी है? शुरू में तो बहुत सारे नासमझ, इससे आने वाले बवंडर से बेख़बर, आपकी बड़ाई यह सोच कर रहे थे कि आपने एक ही झटके में भ्रष्टाचार और  कालेधन का खात्मा कर दिया है. लेकिन अब... जैसे जैसे उन्हें आपके इस बेपरवाह आईडिए से हो रही दिक्क़त को झेलना पड़ रहा है, वो आपको कोसना शुरू कर रहे हैं. आपके चमचे आपको ये सब नहीं बताएँगे, वो तो उल्टा आपको इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ की बधाई देंगे, लेकिन आपका ‘शुभचिन्तक’ होने के चलते मैं आपको यह सच बताने की कोशिश कर रहा हूँ.

Justice Katju | Photo courtesy : tilakmarg.com


500 1000 के नोट आज के समय में हर कोई प्रयोग करता है, क्योंकि आज उसकी वही क़ीमत है जो कुछ सालों पहले 100 रूपए के नोट की होती थी (तेजी से बढ़ती मुद्रास्फीति के कारण)... आपके इस मूर्खतापूर्ण आदेश ने बहुत सारे हवाला डीलर बना दिए हैं, जो धडाधड अपना काम कर रहे हैं. ये डीलर पाँच सौ के नोट के बदले सौ-सौ के चार नोट दे रहे हैं.

बैंकों के सामने लम्बी कतार लग चुकी है, लोगों को टैक्सियाँ नहीं मिल रहीं, दुकानदारों पर आफ़त आयी हुई है, जगह-जगह ट्रैफिक जाम है, आदि आदि. एक आदमी मुझे मुंबई से बता रहा था उसे 200 रूपए की बिसलरी की कुछ बोतलें पानी पीने के लिए चाहिए थीं, लेकिन वो नहीं ख़रीद पाया क्योंकि उसके पास सिर्फ 500 का नोट था.

बड़ी मछलियों ने, जिनके पास काले धन का अंबार है उन्होंने तो उसे विदेशी बैंकों में भर रखा है, लेकिन आपने वह धन वापस लाने के लिए आपने अपने चुनावी वादे के बावजूद भी कोई ठोस उपाय नहीं किया, और अब उलटे देश के आम जन को परेशानी में डाल रहे हैं.

इस पागलपन को बंद करो, मोदीजी.

(जस्टिस काटजू के ब्लॉग का हिंदी अनुवाद - भरत तिवारी)
००००००००००००००००
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

वैलेंटाइन डे पर विशेष - 'प्रेम के नौ स्वर' - ऋत्विक भारतीय की कविताएं | Valentine Day Poetry in Hindi
असग़र वजाहत का नाटक 'ईश्वर-अल्लाह'  | Asghar Wajahat's Play 'Ishwar-Allah'
आन्तरिक तार्किकता की खोज ~ मृदुला गर्ग की 'सम्पूर्ण कहानियाँ' | Mridula Garg Complete Stories
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
NDTV Khabar खबर
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियाँ — 'पगला गई है भागवती!...'