रवीन्द्र कालिया स्मृति व अन्य पुरस्कार अर्पण समारोह सम्पन्न



रवीन्द्र कालिया स्मृति व अन्य पुरस्कार अर्पण समारोह सम्पन्न 

Photo (c) Bharat Tiwari

दिनांक 15 अप्रैल, 2017 की शाम को नई दिल्ली के गांधी शान्ति प्रतिष्ठान में युवा कवि प्रांजल धर के संयोजन में पुरस्कार अर्पण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर वर्ष 2016-17 के लिए आठ युवा रचनाकारों को सम्मानित किया गया। रवीन्द्र कालिया स्मृति पुरस्कार (कथा या कथेतर गद्य के लिए) वर्ष 2016 के लिए कबीर संजय को और वर्ष 2017 के लिए मनोज कुमार पाण्डेय को; पंकज सिंह स्मृति पुरस्कार (कविता के लिए) वर्ष 2016 के लिए अशोक कुमार पाण्डेय को और वर्ष 2017 के लिए मृत्युंजय प्रभाकर को; श्याम धर स्मृति पुरस्कार (पत्रकारिता या सामाजिक कार्य के लिए) वर्ष 2016 के लिए आकांक्षा पारे को और वर्ष 2017 के लिए पूजा सिंह को; सीताराम शास्त्री स्मृति पुरस्कार (आलोचना के लिए) वर्ष 2016 के लिए सर्वेश सिंह को और वर्ष 2017 के लिए कमलेश वर्मा को प्रदान किया गया। ये पुरस्कार इन रचनाकारों को कार्यक्रम के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध आलोचक-चिन्तक मैनेजर पाण्डेय और सुप्रसिद्ध वरिष्ठ कथाकार श्रीमती ममता कालिया के हाथों प्रदान किए गए। पुरस्कारस्वरूप इन आठों रचनाकारों में से प्रत्येक को तीन हजार एक सौ रुपये की नगद राशि और प्रशस्ति पत्र भेंट किए गए। उल्लेखनीय है कि साहित्य की विभिन्न विधाओं में प्रत्येक वर्ष चार पुरस्कार घोषित किए जाते हैं।

इन पुरस्कारों के लिए बनाए गए निर्णायक मण्डल में तीन सदस्य शामिल हैं –  विजय राय, कथाकार अखिलेश और कवि-आलोचक जितेन्द्र श्रीवास्तव। इस समारोह में ये तीनों सदस्य उपस्थित थे और अखिलेश ने निर्णायक मण्डल की तरफ से इन पुरस्कारों की निर्णय प्रक्रिया से जुड़ा अपना वक्तव्य दिया। पुरस्कृत रचनाकारों की प्रशस्तियों का वाचन किया गया और पुरस्कृत रचनाकारों ने अपने-अपने वक्तव्यों में अपनी रचना-प्रक्रिया से जुड़ी चीजें साझा कीं। ममता कालिया ने कहा कि यह युवा रचनाशीलता का उत्साहवर्द्धन है और जब महिला पत्रकारों को पुरस्कार मिलते हैं तो इससे पत्रकारिता का भी भला होता है और समाज में महिलाओं का भी भला होता है। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. मैनेजर पाण्डेय ने रचनाकारों का उत्साहवर्द्धन किया और कुछ बेहतरीन सुझाव भी दिये ताकि आगामी वर्षो में इस कार्यक्रम को और अधिक व्यवस्थित बनाया जा सके।



(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
००००००००००००००००


nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
बिहारियों का विस्थापन: ‘समय की रेत पर’ की कथा
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियाँ — 'पगला गई है भागवती!...'
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
Harvard, Columbia, Yale, Stanford, Tufts and other US university student & alumni STATEMENT ON POLICE BRUTALITY ON UNIVERSITY CAMPUSES
Hindi Story: कोई रिश्ता ना होगा तब — नीलिमा शर्मा की कहानी
तू तौ वहां रह्यौ ऐ, कहानी सुनाय सकै जामिआ की — अशोक चक्रधर | #जामिया
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل