अद्वितीय अद्भुत तकरीबन स्वर्गिक अनुभव



15 मई 2017 सुबह 9 के आसपास


हमें मई की दिल्ली में सुबह ही हो जाने वाली गर्मी और 3 घंटे से चल रहे फ़ोटोशूट की दौड़ ने शारीरिक और मानसिक थका दिया था। इंडिया गेट लॉन्स के बाद हुमायूँ के मकबरे में पहुँचे उस्ताद निशात खान, फ़्रांसीसी डिज़ाइनर ओलिविया और मैं जब फ़ोटो खींचते-खींचते, गर्मी से तर, मकबरे के पीछे पहुँचे तब वहां सबकुछ खुशनुमा था― विशाल गुम्बद से गर्मी का पार न पा सकना माहौल को ठंडा, इमारत के कोनों से कटकर, दोनों तरफ से हवाओं का तेजी से आना आँगन को हवादार और चिड़ियों की खूब चहचहाहट सब खुशनुमा। तभी मैंने निशात भाई से कुछ सुनाने का आग्रह किया।




अद्वितीय अद्भुत तकरीबन स्वर्गिक अनुभव―हुमायूँ के आँगन में सरस्वती बैठ गईं थीं और गर्म सुबह से वीरान उनका घर सितार की धुनों से मीठा बना दिया खां साहब ने। ओलिविया के साथ मैं उस अनुभव से गुज़र रहा था जिसे शब्द नही बयान कर सकते। जो कुछ लोग आ जा रहे थे वे भी समझ नहीं पा रहे थे स्तब्ध थे। बादशाह हुमायूं खुश थे।

भरत तिवारी

विडियो देखने के लिए प्ले कीजिये
विडियो देखने के लिए प्ले कीजिये
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
००००००००००००००००

No comments

Powered by Blogger.