चतुर बनिया पार्टी!
— कृष्णा सोबती
साहित्य अकादमी सम्मानित कृष्णा सोबतीजी 92 वर्ष की युवा हैं। बीते दिनों उनकी तबीयत ठीक नहीं रही और वह हफ्ता नर्सिंग होम में बिताकर कल घर लौटीं। रात में उनसे बात हो रही थी और उन्होंने कहा, अस्पताल में मैंने कुछ लिखा है, तभी से सोच रही थी कि तुम तक पहुँचा दूँ, देख लेना!
क्या देखूँ और क्या न देखूँ कृष्णाजी, आप हम सबकी शक्ति हैं। हम सब आपकी शक्ति के उजाले से ही अपने अंधेरों को काटते हैं... सलाम आपको!!!
कृष्णा जी ने जो लिखा वह यह रहा:
मुहजोर मुहतोड़ समयों में
बापू के लिए 'चतुर बनिया' बहुत ही सजीला लग रहा है।
श्रीमान यह आपका कमाल है कि
बिना विज्ञापन पर खर्चा किये
आप अपनी पार्टी की पब्लिसिटी कर रहे हैं।
आप जानते ही हैं कि आपकी पार्टी को भी लोग
चतुर बनिया पार्टी
पुकारते हैं।
कृष्णा सोबती
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(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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