गोरखपुर से सिसकियाँ — सुकृता पॉल कुमार #Gorakhpur #poem



गोरखपुर से सिसकियाँ 

सुकृता पॉल कुमार

अनुवाद: हर्षबाला शर्मा



 
  दम घोंटू काले धुंए से घिरा
एक जीवित बम
रख दिया गया हर छोटी सी छाती पर
जिसने चीर दिया
भीतर तक फेफड़ों को,
   जकड़ता गया उनको
   लेता गया अपनी गिरफ्त में
और डूबती सिसकियों से उभरा
      हर एक का ‘हिरोशिमा’


   माताओ की छाती से बहता दूध
   बहता नहीं जम जाता है
   चट्टान बनकर भीतर ही,
   पिता भीगते हुए पसीने से
ढूंढते हैं उस हवा को शिद्दत से
जो खुदा ने बख्शी है सभी को
   बेहोश बच्चे एक-एक करके
पड़ते जाते हैं नीले और फिर पीले
   नीम बेहोशी में
      जाती है जान एक-एक की


क्या फर्क पड़ता है
इनकी गिनती का,
हर पल
छुरे की नोक की तरह
चीरता है भीतर तक
दर्द के तीर धंस जाते हैं
मौत की सुरंग मजबूरन चौड़ी होकर
निगल लेती है
नन्हीं जानों को


   गोरखपुर के घरों में
   खाली पड़ें हैं पालने
   सूने हो चुके हैं मन,
नन्हीं रूहें प्रवेश करती हैं
हम सब के घरों में
   चारों ओर इस दुनिया में
   भरती जाती है


एक भयानक उदासी
भीतर तक हम सब में
         - 0 -




००००००००००००००००
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

2 टिप्पणियाँ

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (20-08-2017) को "चौमासे का रूप" (चर्चा अंक 2702) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं

ये पढ़ी हैं आपने?

 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
होली: सतरंगी उत्सव — ओशो | Happy Holi with #Osho
Book Review: मानस का हंस की आलोचना — विशाख राठी
शिवानी की कहानी — नथ | 'पिछली सदी से जारी स्त्री स्वाधीनता की खामोश लड़ाई' - मृणाल पाण्डे
अम्मा की डायरी - वंदना राग की कहानी |  Amma's Diary - Short Story by Vandana Rag
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
मेरा अज्ञात तुम्हें बुलाता है — स्नोवा बार्नो की अद्भुत प्रेम कहानी