July 2018 - #Shabdankan
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साहित्यिक, सामाजिक ई-पत्रिका Shabdankan


छोड़ आये हम वो गलियाँ — ममता कालिया

बुधवार, जुलाई 25, 2018 1
जब दिग्गजों को छोड़कर, रवींद्र कालिया ने तय किया तो कॉफी हाउस में हलचल मच गई  गुजरे जमाने का शहर — ममता कालिया पत्नी के साथ...
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शार्टकट कवितइ — कविता का कुलीनतंत्र (5) — उमाशंकर सिंह परमार

मंगलवार, जुलाई 24, 2018 0
उन्हें विश्वास है कि दिल्ली में रहता हूँ इसलिए कवि हूँ कविता का कुलीनतंत्र (5) — उमाशंकर सिंह परमार  जब तक कवि अपनी जमीन में ...
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जैज़ की रात

सोमवार, जुलाई 23, 2018 0
मैक्सिको और ब्राज़ील एम्बेसी ने मिलकर किया आयोजन कमानी में जैज़ कॉन्सर्ट  और तस्वीरें यहाँ  https://r.bharattiwari.com/2018...
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अगर कोई तुम्हें बादल देता है / तो मैं बारिश दूँगा — प्रकाश के रे द्वारा अनुदित कवितायेँ

शनिवार, जुलाई 21, 2018 1
एक-से-बढ़कर-एक: बेहतरीन अनुदित कवितायेँ — प्रकाश के रे Poem of Bertolt Brecht in Hindi, translation: Prakash K Ray 1...
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रामचरितमानस में नपुंसक — देवदत्त पट्टनायक | अनुवाद: भरत आर तिवारी

शनिवार, जुलाई 21, 2018 0
और इस तरह युद्ध की तैयारी शुरू होती है — देवदत्त पट्टनायक अनुवाद: भरत आर तिवारी तुलसीदास की रामचरितमानस में एक चौपाई की दो...
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