नीलिमा चौहान, डीन, ऑफिशियली पतनशील यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंटायर हिंदी साहित्य



नीलिमा चौहान, डीन, ऑफिशियली पतनशील यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंटायर हिंदी साहित्य

— पतनशीलता एक तेवर, एक जश्न, एक उद्घोष

हाल के दो सालों में अपनी दो किताबों के ज़रिए हिंदी साहित्य में मिडल ब्रो लेखन के जॉनर की पहल करने वाली नीलिमा चौहान कहती हैं, "पतनशीलता एक तेवर, एक जश्न, एक उद्घोष है"। नीलिमा साहित्य में ओमनी प्रेज़ेंट मेल गेज़ के बरक्स स्त्री गेज़ से दुनिया को देखने की पहल करती हैं । वे स्त्री साहित्य की नई स्त्री भाषा गढ़ती हैं । और स्त्रीवाद के साहित्यिक आंदोलन के लिए पतनशीलता का मुहावरा सुझाती हैं। देवी की बजाय मानवी होने। असली सहज और संघर्षप्रिय होने की बात करती हैं। छवि से, परम्पपरा की जकड़ से मुक्त होने का आह्वान करती हैं । पुरुष द्वेष की बजाय जेंडरलेंस की बात करती हैं। औसत की बजाय विशिष्ट होने की ओर बढ़ने की बात करती हैं। देह की बजाय बुद्धि होने की बात करती हैं। प्रेम करने, रचने की बात करती हैं । 

पतनशीलता के इस जश्न पर अदब की दुनिया की राय और अनुभवों को राजधानी के कनॉट प्लेस, ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर पर 20 सितम्बर की शाम सुना जा सकता है। नीलिमा के साथ होंगी जानी मानी कथाकार ममता कालिया जी, बेबाक पत्रकार सर्वप्रिया सांगवान और मीडिया की नब्ज़ पर नज़र रखने के लिए चर्चित लेखक विनीत कुमार
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