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मुंबा देवी: सपने में देखा युवा लेखिका ने कोरोना का जाना


युवा कवि प्रेमा झा के सपने पहले भी सच हुए हैं!  नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी के आने का स्वप्न भी घटना घटित होने के तकरीबन 9-10 माह पूर्व ही देख लिया था! इस दफ़ा युवा लेखिका ने मुंबा देवी को, कोरोना का जाना देखा है... पढ़िए...



मैं जबसे मुंबई शिफ्ट हुई हूँ मुंबा देवी टेम्पल अभी तक नहीं गई हूँ। सबसे अहम बात मुंबा देवी टेम्पल मंगलवार को जाने का विशेष महत्व है और यह सपना भी मंगलवार की ब्रह्ममुहूर्त में देखा है।

मैं अनसुलझे रहस्यों में हूँ!

  — प्रेमा झा

रात ख्वाब में देखती हूँ कि मेरी एक दोस्त मेरे घर आई है और मैं उससे कुछ कहूं कि वो मेरे बेडरूम में आ गई और बिना हाथ-पांव धोए ही मेरे बिस्तर पर बैठ गई। मैं उससे कुछ कहती इससे पहले वो पूरे घर में रखी चीजों को छूने लगी है और रसोई में घुस कर बिना हाथ धोए ही खुद ही डब्बे से बिस्किट नमकीन वगैरह की चीज़ें निकाल कर खाने लगी है। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा क्या करूं। इस कोरोना काल में ऐसी बातें ओह्ह!!!

इसे समझना चाहिए। मगर मैं उसे कुछ नहीं कहती हूँ क्योंकि घर आए मेहमान को हमारे यहाँ देवता कहा जाता है और उनकी खातिरदारी भी फिर किसी देव से कम नहीं होती सो मैं चुप रह जाती हूँ। अब देखती हूँ कि मेरे मेन गेट पर दस्तक होती है और मैं कैंपस में जाती हूँ। फाटक खोलती हूँ तो देखती हूँ कि पुलिस और लोगों की भीड़ इकट्ठी है और वो कह रहे हैं कि इनके घर मेहमान आए हैं अंदर से पूरी तलाशी ली जाए। मैं डर गई हूँ और कुछ नहीं बोल पा रही हूँ। पुलिस घर के अंदर है और तलाशी ले रही है मगर उसे कोई संदेह नहीं हुआ क्योंकि मेरी दोस्त अब चुप मेरे घर में सोई हुई है। पुलिस मुझसे माफ़ी मांगती और चली जाती है। तभी पीछे के दरवाज़े से एक लेडी पुलिस आती है और कहती है, तुम बहुत साफ़ दिल हो चलो मेरे साथ तुमको देवी माँ के मंदिर ले चलती हूँ वहाँ अगर कुछ भी मुराद की जाए तो पूरी हो जाती है। यह कहना था कि वहाँ एक रिक्शा वाला आता है जिसका रिक्शा आम रिक्शों से बिल्कुल अलग भूरे रंग का एक बहुत चौड़ा और नग-मोतियों से सजा हुआ किसी पालकी जैसा होता है! मैं उस महिला पुलिस के साथ उस रिक्शे में बैठ जाती हूँ अब और एक बहुत ही पुरानी देवी माँ के मन्दिर पहुँचती हूँ, जो मुंबई में ही है।

वहाँ पूजा एलसीडी स्क्रीन पर देखी जाती है और चारो ओर बहुत भीड़ है। माँ की चौखट तक पहुंचना बिल्कुल भी आसान नहीं मगर मैं भागती हुई सबसे आगे पहुँच गई हूँ। मैं दुर्गा माँ के एक सौ आठ नाम के जाप करती हूँ कि तभी देखती हूँ कि माँ के हाथ हिल रहे हैं और ऐसा हुआ कि मैं अचम्भित हो गई हूँ! मन के भीतर से आवाज़ आती है और सुनती हूँ कि अभी जो मांगोगी मिलेगा, माँ प्रसन्न हैं और मैं कह पड़ती हूँ, "हे! माँ इस दुनिया से इस महामारी को खत्म कर दीजिए! जिंदगी फिर से पहले जैसा खूबसूरत कर दीजिए, सबको स्वस्थ्य कर दीजिए और माँ का चेहरा मुस्कुराने लगता है!" पीछे से लेडी पुलिस आवाज़ लगाती है बस अब प्रसाद लो और चलो! तभी मैं पुजारी जी को कहती हूँ कि मुझे माँ के चरण के फूल और वो मुकुट भी चाहिए जो माँ ने लगाया है। पुजारी असमंजस में है कि इस लड़की ने क्या मांग लिया और मैं बार-बार उसे देने के लिए बोलने लगती हूँ कि तभी वो पुजारी असमंजस की स्थिति में देवी माँ के चेहरे की तरफ देखता है जो उसे हंसता हुआ दिखता है। फिर क्या था वो दोनों हाथ जोड़ता है और माँ के मुकुट मुझे दे देता है। मैं खुश होकर घर के लिए चल पड़ती हूँ!"

इस सपने को देखने के बाद बहुत ब्लेस्ड महसूस कर रही हूँ और मुझे लगने लगा है अब सब ठीक हो जाएगा और बहुत जल्द सब अच्छा हो जाएगा!



सपने के बाबत जो एनालिसिस लेखिका ने किया है:


जब गूगल पर सर्च किया तो सपने में देखी इमारत और जगह बिल्कुल मुंबा देवी मन्दिर से मिलती-जुलती है। मैं जबसे मुंबई शिफ्ट हुई हूँ मुंबा देवी टेम्पल अभी तक नहीं गई हूँ। सबसे अहम बात मुंबा देवी टेम्पल मंगलवार को जाने का विशेष महत्व है और यह सपना भी मंगलवार की ब्रह्ममुहूर्त में देखा है। दूसरी बात जो गौर करने वाली है वो ये कि मुंबा देवी के वाहन हर रोज बदलते हैं और पूजा में इस बात का खासा ख्याल रखा जाता है। सपने में देखे एक ख़ास प्रकार के भूरे रंग का रिक्शा क्या इंगित करता है इस बात को समझने के लिए इस बात को जानिए कि मुंबा देवी मंदिर में माँ के चांदी से बने वाहन प्रतिदिन बदले जाते हैं। शायद रिक्शे का सपने में दिखना; इस बात के तार माँ के सवारी से हो ऐसा हो सकता है। और, सबसे ख़ास बात मंगलवार को माँ की सवारी हाथी होती है और रिक्शे का रंग भूरा था यह करिश्माई बात है। (सोमवार को नंदी, मंगलवार को हाथी, बुधवार को मुर्गा, गुरुवार को गरुड़, शुक्रवार को हंस, शनिवार को फिर हाथी, रविवार को सिंह पर माँ सुशोभित होतीं हैं जैसा मंदिर के बारे में सूचना एकत्रित किया है)।

तीसरी अहम् बात मुंबा देवी के नारंगी चेहरे वाले रजत मुकुट की है जो मैं सपने में देख लेती हूँ और उस मुकुट की ज़िद करना और फिर उसे लेकर घर आना वाकई एक अद्भुत बात सरीखी है! चौथी बात यह कि सपने में देखी हर चीज़ कुछ इंगित कर रही है जिसे कोई स्वप्न्शास्त्री या ज्योतिष विज्ञानी सुलझा सकते हैं। जो भी हो इन सपनों की दुनिया बहुत रहस्यमयी होती है जिनके तार बड़े उलझे रहते हैं मगर हम अगर चेतनशील रहकर इन संकेतों को समझने की कोशिश करें तो बड़ी-से-बड़ी मुश्किलातों का हल निकाला जा सकता है शायद!

फिलहाल तो यही दुआ है कि माँ इस कोरोना की आपदा को खत्म कर दें और दुनिया के सब लोगों को स्वस्थ्य और खुशहाल कर दें!

आमीन


(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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3 टिप्पणियां

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (29-04-2020) को   "रोटियों से बस्तियाँ आबाद हैं"  (चर्चा अंक-3686)     पर भी होगी। 
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
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    कोरोना को घर में लॉकडाउन होकर ही हराया जा सकता है इसलिए आप सब लोग अपने और अपनों के लिए घर में ही रहें। आशा की जाती है कि अगले सप्ताह से कोरोना मुक्त जिलों में लॉकडाउन खत्म हो सकता है।  
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
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    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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