मंगलवार, मई 09, 2017

अरविन्द केजरीवाल को कपिल मिश्रा का खुला ख़त



आदरणीय अरविंद केजरीवाल जी

यह पत्र आपको लिखते हुए बहुत सारी बातें व यादें मन मे आ रही हैं।

आज आपके खिलाफ FIR दर्ज करवाने जा रहा हूँ।

भ्रष्टाचार से लड़ना, सच के लिए अड़ना आपसे सीखा था। जिस गुरु से धनुष बाण चलाना सीखा आज उसी पर तीर चलाने है, मन बहुत भारी है पर चुप रहना भी असंभव हैं।

kapil mishra open letter to arvind kejriwal

जिन अरविंद केजरीवाल को देख देखकर ये सब सीखा, आज उन्ही अरविंद केजरीवाल से अपने जीवन का सबसे बड़ा युद्ध लड़ने से पहले आशीर्वाद मांगने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ। कृपया मुझे विजय का आशीर्वाद दीजिये।


अरविंद जी, आपका दिल जानता है कि सत्येंद्र जैन से किस प्रकार के आपके संबंध है। आपको मालूम है कि किस प्रकार के पैसों की डील की मैं बात कर रहा हूँ। आपको पता है कि अगर उस दिन सुबह मैंने ACB को पत्र नही लिखा होता तो आप मुझे आनन फानन में नही हटाते। यह बात आपने कई PAC के साथियों को बताई भी और उन्होंने मुझे बताया।

आज सब चुप है। सिर्फ मेरा ईश्वर मेरे साथ है।

आपके छल कपट, झूठ और भ्रष्टाचार का चक्रव्यूह मैं तोड़ने निकला हूँ, एकदम अकेला।

इस चक्रव्यूह के अंदर आप मुझे घेरोगे, हमले करोगे, अपयश फैलाओगे, झूठा साबित करोगे।

मुझे पता है कि आज आप विधानसभा में खुद ही अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश करेंगे। अपने ही विधायको से तालियां बजवाएँगे, खुद ही मुजरिम, खुद ही जज और खुद ही गवाह भी बनेंगे।

खुद के लिए तालियों और मेरे लिए गालियों के बीच इतना ध्यान रखिएगा, मैं आपकी हर चाल जानता और पहचानता हूँ। एक एक कदम फूंक फूंक कर रख रहा हूँ। CBI को जो कुछ मुझे पता है और मैंने देखा है, आज सब बताऊंगा।

वो घर आपका, उसके मुलाजिम आपके, सारा सिस्टम आपका, हर गवाह आपका ये मुझे मालूम हैं। यथा शक्ति लड़ूंगा।

या तो आपके चक्रव्यूह को तोड़ कर विजय प्राप्त करूँगा या फिर अभिमन्यु की तरह घेर कर मार दिया जाऊंगा। मुझे दोनो स्वीकार है।

हां, एक बात और, मुझे बताया गया है कि आप मेरी विधानसभा की सदस्यता खत्म करवाने की तैयारी कर रहें है। व्हिप के द्वारा मुझे विधानसभा से हटवाने की तैयारी है। मुझे कोई फर्क नही पड़ता। बस इतना कहना चाहता हूँ, थोड़ी भी नैतिकता बची है अगर, थोड़ा भी भरोसा है अगर आपको अपने आप पर, तो मेरी एक चुनौती स्वीकार कर लीजिए।

मेरी करावल नगर सीट या आपकी नई दिल्ली की सीट, सीट आप चुन लें। मैं भी इस्तीफा देता हूँ, आप भी चुनाव मैदान में आ जाइए। सीट आपकी मर्जी की, आपके पास धन बल, और लोगो की पूरी टीम, मैं अकेला। आइये लड़ते है चुनाव। है हिम्मत जनता का सामना करने की???

कुर्सी जाने का डर है तो बिना इस्तीफा दिए करावल नगर से मेरे सामने लड़ लीजिये। मैं इस्तीफा देने को तैयार हूँ। और जनता के साथ का भरोसा है तो अपनी नई दिल्ली की सीट से लड़ लीजिये चुनाव। जवाब का इंतजार करूँगा।

एक बात और, कल शाम से अब तक 211 शिकायतें पार्टी व सरकार में भ्र्ष्टाचार से जुड़ी हुई मुझ तक पहुंची है। जो कुछ पिछले दो सालों में पर्दे के पीछे हुआ है वो बहुत दुःखद हैं । देश का भरोसा तोड़ा है आपने और आपके साथ के चार पांच साथियों ने मिलकर।

अरविंद जी, आज अकेला हूँ, सबकुछ मिटा देने के कगार पर हूँ। पर अड़ा हूँ, डटा हूँ।

आपकी सारी ताकत, सारी सरकार, सारा पैसा, सारे लोग एक तरफ, और मैं अकेला।

आशीर्वाद दीजिये।

आज आपके खिलाफ FIR दर्ज करवाऊंगा, उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ।

आपके जवाब का इंतजार है।

आपका

कपिल मिश्रा

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
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