न्याय - शब्दांकन (प्रो० चेतन)

कि सुखनवरों का खून क्यूँ कर ठण्डा हो गया है
दर्द अंगड़ाई नहीं लेता ये क्या हो गया है ?

क़त्ल या हो कोई बे-आबरू तुम्हें क्या मतलब ?
ए खुदा तू ही बता, इन्सां को क्या हो गया है।

कितनी क़ुरबानी चाहते हो कि चमन जल जाए
क़ि नींद टूट जाए तुम्हारी, होश हो गया है। 
प्रो० चेतन प्रकाश 'चेतन'
 
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

  1. बहुत खूब
    लेकिन सुखनवर ही है जिनका खून ठंडा नहीं होता

    जवाब देंहटाएं

ये पढ़ी हैं आपने?

मैत्रेयी पुष्पा की कहानियाँ — 'पगला गई है भागवती!...'
असल में तो ये एक साहित्यिक विवाह है  - भूमिका द्विवेदी अश्क | Bhumika Dwivedi Ashk - Interview
Harvard, Columbia, Yale, Stanford, Tufts and other US university student & alumni STATEMENT ON POLICE BRUTALITY ON UNIVERSITY CAMPUSES
तू तौ वहां रह्यौ ऐ, कहानी सुनाय सकै जामिआ की — अशोक चक्रधर | #जामिया
काले साहब - उपेन्द्रनाथ अश्क की कहानियाँ | Upendranath Ashk Ki Kahaniyan
रंगीन होते ख़्वाब — रीता दास राम की कहानी | Reeta Das Ram ki Kahani
होली: सतरंगी उत्सव — ओशो | Happy Holi with #Osho
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
अट नहीं रही है — सूर्यकांत त्रिपाठी निराला Happy Holi