advt

बिट्टू की मुलाकात (संस्मरण) - ड़ॉ प्रीत अरोड़ा

मार्च 19, 2013
preet arora with Tejendra Sharma

    जीवन में जब हम किसी ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आते हैं जो किसी क्षेत्र विशेष में अपना अमूल्य योगदान देकर अपने देश ,भाषा ,सँस्कृति व सभ्यता की सेवा करने में तन – मन से समर्पित होता है तो उसके प्रति हमारे हृदय में अगाध श्रद्धा और प्रेम –भाव होता है .ऐसे व्यक्ति से रूबरू होने की उत्सुकता स्वाभाविक ही है . देशकी महान् विभूतियों में साहित्य के क्षेत्र के अन्तर्गत श्री तेजेन्द्र शर्मा न केवल साहित्य जगत में एक प्रसिद्ध लेखक के रूप में जाना –पहचाना नाम है अपितु उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में भी सफल पहचान बनाई है और उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी ये है कि वे एक अच्छे व नेकदिल इन्सान भी हैं .

    यूँ तो मैं अपने अध्ययन काल से ही तेजेन्द्र शर्मा जी की रचनाएँ अक्सर पढ़ा करती थी परन्तु उनसे इन्टरनेट के माध्यम से दो वर्ष पूर्व ही मेरा सम्पर्क हुआ . सौभाग्यवश मुझे तेजेन्द्र जी का साक्षात्कार लेने का सुअवसर प्राप्त हुआ . साक्षात्कार में लिए गए प्रश्नों के द्वारा मैं उनके जीवन-दर्शन से और भी अधिक प्रभावित हुई . अब तो दिन –प्रतिदिन उनसे मिलने की लालसा मन के भीतर बढ़ती ही जा रही थी . तेजेन्द्र जी हमेशा मुझे ‘ बेटी ’ के रूप में प्यार , अपनत्व और ढ़ेरों आशीर्वाद देते हुए “ बिट्टू” नाम से सम्बोधित करते थे . ये “ बिट्टू ” शब्द जैसे मेरे मन की अतल गहराइयों को छू जाता और फिर मैं तेजेन्द्र जी को लेखन के क्षेत्र में अपना गुरू और मार्ग-दर्शक भी मानने लगी . मेरी ईमेल ,फेसबुक व फोन के जरिये अक्सर तेजेन्द्र जी से बातचीत होने लगी . साक्षात्कार लेने के उपरांत जल्दी ही मुझे उनकी कहानी ‘ अभिशप्त ’ की समीक्षा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ . मेरे द्वारा लिया गया उनका साक्षात्कार और उनकी कहानी अभिशप्त की गई समीक्षा का ‘ बातेँ ’ व हिन्दी की वैश्विक कहानियाँ ( संदर्भ : तेजेन्द्र शर्मा का रचना संसार ) नामक पुस्तकों में प्रकाशित होना मेरे लिए किसी अमूल्य उपहार से कम न था .

    हाल ही में ड़ी .ए .वी गर्ल्स कालेज , यमुनानगर (हरियाणा ) में आयोजित ‘दूसरे अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी साहित्य सम्मेलन ’ में मुझे तेजेन्द्र जी के भारत आने और इसमें शिरक्त करने की खबर पता चली . इस खबर से मेरी प्रसन्नता का ठिकाना न रहा क्योंकि इस सेमिनार में मुझे भी पत्र – वाचन के लिए अजय नवरिया जी द्वारा आमंत्रण पत्र मिला. मैं अक्सर जिस व्यक्ति से मिलने के सपने बुना करती थी . उन सपनों को साकार होने में अब देरी न थी . इस सेमिनार में मैं अपने पिता जी के साथ गई . वहाँ मेरी मुलाकात विदेशों से आए अनेक साहित्यकारों से हुई परन्तु मेरी आँखें सिर्फ और सिर्फ तेजेन्द्र जी को ढ़ूँढ़ रही थी . अचानक मेरे कानों में वही चिर –परिचित तेजेन्द्र जी की मधुर आवाज़ सुनाई पड़ी . मैंने पलट कर देखा एक हँसता –खिलखिलाता , तेजस्वी चेहरा भीड़ में सबसे अलग ही था . बड़े खुले दिल और गर्मजोशी से तेजेन्द्र जी ने हमारा स्वागत किया . तेजेन्द्र जी ने वहां उपस्थितअपने ही अक्स यानी कि अपनी बेटी दीप्ति और सुप्रसिद्ध लेखिका जाकिया जुबैरी जी से परिचय करवाया. दो दिन के इस कार्यक्रम में मैंने तेजेन्द्र जी को सबसे सहज भाव प्रेमपूर्वक बातचीत करते देखा . मैं चकित थी कि दुनिया में क्या ऐसे भी इन्सान हो सकते हैं जो बुलन्दियों पर पहुँचने पर भी अहं भाव नहीं रखते . देखने में तो लेखक भी दूसरे व्यक्तियों की तरह साधारण व्यक्ति होता है परन्तु उसका आन्तरिक व्यक्तित्व कुछ ऐसी विशेषताएं लिए होता है जो उसे आम जनमानस से अलग करती हैं . तभी तो उनकी मेहनत , अथक प्रयास , लगन व अदम्य साहस दूसरों के लिए एक मिसाल कायम कर देती है . तेजेन्द्र जी के व्यक्तित्व में उनकी स्नेहिल प्रकृति , जिन्दादिली व खुशमिज़ाजी और उनके कृतित्व में कठोर परिश्रम , भाषायी प्रेम व साहित्य-साधना निश्चित रूप से हमारे लिए प्ररेणा स्त्रोत है .

    मूलतः भारतीय होते हुए भी तेजेन्द्र जी विदेश में रहकर अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को एक नई दिशा प्रदान कर रहे हैं . मेरा मानना है कि एक लेखक व साहित्यकार किसी भी परिवेश परिधि में बँधा हुआ नहीँ होता क्योंकि उसका मूल उद्देश्य समाज व देश को सही दिशा देना है . आज विदेश में रह रहे भारतीय रचनाकारों को ‘ प्रवासी रचनाकार ’ उन्हें अलग से श्रेणीबद्ध करना कहाँ का न्याय है ? इसलिए आज प्रवासी साहित्य को किसी दायरे में सीमित करने या भारत में लिखे जा रहे साहित्य से अलग करके देखने की जरूरत नहीं है अपितु जरूरत है उस मानवीय सम्वेदनाओं से रूबरू होकर उन्हें महसूस करने की जिनका ज्रिक ये भारतीय रचनाकार विदेशों में रहकर कर रहे हैं .इसका बेमिसाल उदाहरण हैं श्री तेजेन्द्र शर्मा जी . तेजेन्द्र शर्मा जी से हुई ये पहली मुलाकात मेरे हृदय पर अमिट छाप छोड़ गई जिसे मैं कभी नहीं भूल सकती .

ड़ॉ प्रीत अरोड़ा मोहाली Dr-Peet-Arora

डॉ.प्रीत अरोड़ा

मोहाली
पँजाब — 140301
फोन: 08054617915
ब्लॉग:

टिप्पणियां

  1. नमस्कार डॉ. प्रीत जी, आपका ये संस्मरण "बिट्टू की मुलाक़ात" पढ़ना रोचकता के साथ ,जानकारी व् सुखद अहसाह की अनुभूति दे गया |

    जवाब देंहटाएं
  2. आप सभी का कोटि कोटि आभार .आपका स्नेह और शुभकामनाएँ ही मेरी ताकत हैं

    जवाब देंहटाएं
  3. आप सभी का हार्दिक आभार .आप सभी का स्नेह और शुभकामनाएं मेरा हौसला बढ़ाता है धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

टिप्पणी पोस्ट करें

ये पढ़े क्या?

{{posts[0].title}}

{{posts[0].date}} {{posts[0].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[1].title}}

{{posts[1].date}} {{posts[1].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[2].title}}

{{posts[2].date}} {{posts[2].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[3].title}}

{{posts[3].date}} {{posts[3].commentsNum}} {{messages_comments}}

ये कुछ आल टाइम चर्चित

कहानी: दोपहर की धूप - दीप्ति दुबे | Kahani : Dopahar ki dhoop - Dipti Dubey

अरे! देखिए वो यहाँ तक कैसे पहुंच गई... उसने जल्दबाज़ी में बाथरूम का नल बंद कि…

जनता ने चरस पी हुई है – अभिसार शर्मा | Abhisar Sharma Blog #Natstitute

क्या लगता है आपको ? कि देश की जनता चरस पीए हुए है ? कि आप जो कहें वो सर्व…

मुसलमान - मीडिया का नया बकरा ― अभिसार शर्मा #AbhisarSharma

अभिसार शर्मा का व्यंग्य मुसलमान - मीडिया का नया बकरा …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

कायरता मेरी बिरादरी के कुछ पत्रकारों की — अभिसार @abhisar_sharma

मैं सोचता हूँ के मोदीजी जब 5, 10 या 15 साल बाद देश के प्रधानमंत्री नहीं …

साल दर साल

एक साल से पढ़ी जाती हैं

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

हिंदी कहानी : उदय प्रकाश — तिरिछ | uday prakash poetry and stories

उदय प्रकाश की कहानी  तिरिछ  तिरिछ में उदय प्रकाश अपने नायक से कहल…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

हिन्दी सिनेमा की भाषा - सुनील मिश्र

आलोचनात्मक ढंग से चर्चा में आयी अनुराग कश्यप की दो भागों में पूरी हुई फिल…

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

महादेवी वर्मा की कहानी बिबिया Mahadevi Verma Stories list in Hindi BIBIYA

बिबिया —  महादेवी वर्मा की कहानी  mahadevi verma stories list in hind…