advt

तुम हो तो... मेरी नज़र में - वंदना गुप्ता | 'Tum ho to' Poetry Collection of Pratima Akhilesh - Review by Vandana Gupta

जन॰ 27, 2014

तुम हो तो... मेरी नज़र में 

                - वंदना गुप्ता 


पाथेय प्रकाशन जबलपुर से प्रकाशित कवयित्री प्रतिमा अखिलेश का प्रथम काव्य संग्रह "तुम हो तो" छंदमुक्त और छंदबद्ध कविताओं का एक खूबसूरत संकलन है जिसमे प्रेम की प्रधानता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अपने प्रियतम को ही " तुम हो तो " नाम देकर संकलन को समर्पित कर दिया गया है। संग्रह की विशेषता है कि इसमें जीवन के प्रत्येक पहलू को संकलित करने की कोशिश की गयी है फिर चाहे प्रकृति हो , ईश्वर हो , दलित विमर्श हो या स्त्री विमर्श , सामजिक चेतना हो या राजनितिक विडंबनाएँ सभी विषयों को समाहित करता संकलन वैविध्य की दृष्टि से खुद को विशिष्ठ बनाता है।

प्रेम को परिपूर्णता देना कोई कवयित्री से सीखे जिसने अपने जीवनसाथी में ही सारा प्रेम का ब्रह्माण्ड खोज लिया तभी तो वो कहती हैं

"जीवनसाथी /तुम हो तो/ ईंगुर/ कुमकुम/ कजरे की धार/ श्रृंगार/ महावर/ पायल / बाजूबन्द हैं /तुम हो तो / प्रकृति/ सृष्टि/ ईश्वर/किस्मत / सौभाग्य / समय / सब मेरे संग हैं /तुम्हीं से मेरे जीवन का /धर्म कर्म / अनुबंध है "

इसी तरह जीवन यात्रा को साहित्यिक रूप बहुत ही खूबसूरती से दे दिया जहाँ चंद शब्दों में पूरे जीवन की यात्रा को चित्रित कर दिया :

"जीवन / एक साहित्यिक यात्रा रहा / काव्यानुभूति से शुरू हुआ बचपन/ यौवन की / पद्यात्मक अनुभूति पार करता / प्रौढ़ हो चला है / गद्यात्मक एवं व्यंग्यात्मक शैली में / और अब कहानी बन / प्रतीक्षारत है / उपसंहार की और "

तो दूसरी तरफ एक गरीब लाचार माँ की पीड़ा से पीड़ित मन ईश्वर के अस्तित्व को भी झंझोड़ देता है और एक प्रश्न उसकी तरफ भी उछाल देता है जिसमे एक माँ की वेदना अपने चरम पर होती है :

" हे बाल गोपाल / क्षमाप्रार्थी हूँ कि / मैं उखाड़ फेंका तुम्हारे चित्र को / दीवार से / खूँटी से क्योंकि मेरी ममता तार तार हो रही थी / मैं नहीं सह पा रही थी / मेरे बच्चों का / चूल्हे के पास बैठकर / रूखी सूखी खाना / और लालायित आँखों से / तुम्हारी मटकी से बहता / दूध दही / मुख पर लिप्त / मक्खन देखना / मेरा ह्रदय दो भागों में बाँट जाता है / जब नन्हा कहता है / बड़े मनुहार से / माँ तू कब मक्खन देगी/ सूखी रोटी गले में अटकती है "

वेदना की पराकाष्ठा को छूती पंक्तियाँ यूँ प्रतीत होती हैं मानो निकट से गुजरीं हों उस तकलीफ से

" कोई तो रोक ले " कविता में बाल मजदूरी के प्रति कवयित्री का मन समाज के असंवेदनशील होते मन से एक प्रश्न कर रहा है अगर ऐसा होता रहा तो कल देश का भविष्य कैसा होगा ?

"ईश्वर" कविता में समाज में फैली दरिंदगी के लिए कवयित्री ईश्वर को भी कटघरे में खड़ा कर देती है कि अगर तुम हो तो निसहाय बच्चियों के साथ अमानवीय अत्याचार बलात्कार के रूप में क्यों हो रहा है तुम्हें सिद्ध करना होगा अपने अस्तित्व को नहीं तो नकारती है कवयित्री की संवेदना ईश्वर के अस्तित्व को जो दर्शाता है व्यथा जब हद से पार हो जाती है तो किस चरम पर पहुँच जाती है।

जो हमारे लिए बेकार है , जो टूट चुका है , जो फट चुका है , जो रद्दी है और फेंक दिया जाता है कूड़े के ढेर में वो भी किसी के जीवन को खुशियां दे सकता है , वो भी किसी का खिलौना बन सकता है , वो भी किसी के लिए काम का बायस बन सकता है इस भाव को दर्शाया है "खिलौने " कविता में कवयित्री ने कैसे कूड़े के ढेर से बीने गए टूटे फूटे खिलौने , पन्नियां, नेल पोलिश की शीशियां , साईकिल की चेन ,काले नीली आड़े तिरछे पत्थर बन जाते हैं उनके खिलौने जिसमे पा लेते हैं वो सारे जहाँ की खुशियां मानो कारूँ का खज़ाना मिल गया हो और इस बीच उनकी माएं निपटा लेती हैं घर के सारे काम ……… एक दूरदृष्टि को दर्शाती कवयित्री की सोच कितना गहरे उतर जाती है इसको दर्शाती रचना पाठक को भावुक कर जाती है।

"माँ/ मैं कैसे बन पाऊंगी / वीरांगना / तू तो लड़ने ही नही देती / नुराइयों से / बेड़ियों से / अत्याचारियों से / अन्यायियों से / आवाज़ नहीं उठाने देती / पापियों / नरसंहारों / दुष्टों के विरुद्ध / बस चुप कराके दुबका देती है बिछौने में "

"वीरांगना "कविता में एक बच्ची का अपने जन्म से लेकर शुरू हुए संघर्ष को एक दिशा देती बेटी की पुकार है जहाँ वो पुरुष प्रधान समाज की कमजोरियों को इंगित करती है और माँ के माध्यम से एक सन्देश देती है कि अब नारी को खुद उठना होगा और उसकी हुंकार से ना केवल दिशाएं विचलित होंगी बल्कि सोच में भी बदलाव करना होगा।

" अछूत " कविता किसी जाति , धर्म या व्यक्ति पर नहीं बल्कि इंसानी मानसिकता पर एक प्रहार है कि छोटी सोच के कारण ही ये समाज बीमार है क्योंकि कर्मों की उच्चता ही श्रेष्ठता को सिद्ध करती है ना कि जाति या धर्म की दीवार।

"अंतर " एक करारा प्रहार मानव की मानसिकता पर। कैसी छोटी सोच के साथ हम जीते हैं जहाँ हमें नहीं दिखता उम्र का अंतर और वो होती है हमारी असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा जब एक ही उम्र के दो बच्चों में हम भेदभाव करते हैं क्योंकि एक अपना बेटा है और दूसरा कामवाली बाई का बेटा …… छोटी छोटी घटनाओं या रोजमर्रा की ज़िन्दगी में घटित होती आम ज़िन्दगी में गुजरती विसंगतियों -की ओर कवयित्री ईशारा करती है और सोचने को विवश कि आखिर कैसे हम फर्क कर जाते हैं अपने और पराये में और यही तो दूरदृष्टि है।

सफलता , ज़िन्दगी और वक्त को "हम चाहते थे " कविता के माध्यम से बखूबी दर्शाया है। और सफलता , ज़िन्दगी और वक्त तीनो चीजें ऐसी हैं जिन्हे हर इंसान चाहता है और ज़िन्दगी के एक बार पाना उसका मकसद होता है मगर सबको मिलती कहाँ हैं गागर में सागर भरती रचना दिल को तो छूती ही है साथ में हर दिल की आवाज़ सी भी लगती है

"लिखना चाहते थे / एक कविता उसके रूप सौंदर्य पर / परन्तु उसने नहीं उठाया पर्दा / अपने चेहरे से / नहीं कभी सामने /' वह सफलता थी ' "

"सुनो मेरी करूँ पुकार " एक छंदबद्ध कविता अजन्मी बच्ची की पुकार है तो "बचपन सतरंगी संसारों का " बचपन की मिठास को दर्शाता है कैसे उन्मुक्त जीवन होता है सभी व्यवधानों , पीड़ाओं से दूर।
"चाह तेरी पूरी हो " , नन्ही काली आई रे , मेरी बेटियां बेटी को समर्पित कवितायेँ सभी छंदबद्ध होने के साथ साथ मन को छूती हैं।

कवयित्री की पूरी पकड़ है छंदबद्ध और छंदमुक्त कविताओं में जिसमे उसने अपने भावों का सुनहरा संसार बसाया है , जहाँ वो जो भी विसंगति देखती है तो कलमबद्ध करने मो मचल उठती है। सरल सहज भाषा प्रवाहमयी होने के कारण आत्मसात होती हैं और खुद से भी कभी कभी प्रश्न करती हैं आखिर मुझे क्यों नहीं दिखा वो अंधकार जो समाज में व्याप्त है। सामाजिक सरोकारों पर कलम बखूबी चलती है तो प्रेम , समर्पण और विश्वास से भरपूर कवितायेँ अपनी जीवंतता को भी दर्शाती हैं। यथार्थ के चित्रों को उकेरती कलम कभी व्यंग्य के माध्यम से तो कभी प्रभावी और सशक्त शब्दों के माध्यम से अपनी बात रखती है जो पाठक को संतुष्ट करती है। छोटी छोटी रचनाएँ सटीक शब्दों में अपनी बात कहने में सक्षम हैं जो एक बड़ी बात है , शब्दों का दुरूपयोग ना करके सदुपयोग करते हुए अपनी बात कह देना ही लेखन की कसौटी है जिसमे कवयित्री पूर्णतया सक्षम है। कवयित्री को पहले संग्रह के लिए हार्दिक शुभकामनाओं के साथ उसके उज्जवल भविष्य की कामना करती हूँ।

वंदना गुप्ता 

यदि आप ये किताब पढ़ना चाहते हैं तो निम्न पतों पर संपर्क कर सकते हैं :
प्रतिमा अखिलेश
संपर्क सूत्र सिवनी
द्वारा , दादू निवेन्द्र नाथ सिंह
वल्लब भाई पटेल वार्ड
दादू मोहल्ला
सिवनी
( मध्य प्रदेश )
फ़ोन : 07692-220105
प्रतिमा अखिलेश
संपर्क सूत्र जबलपुर
द्वारा , श्री एम् के श्रीवास्तव
एन - २ १ , कचनार क्लब के पास
कचनार सिटी , 
विजयनगर
जबलपुर ( मध्य प्रदेश )
मो : 94251-75861


टिप्पणियां

टिप्पणी पोस्ट करें

ये पढ़े क्या?

{{posts[0].title}}

{{posts[0].date}} {{posts[0].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[1].title}}

{{posts[1].date}} {{posts[1].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[2].title}}

{{posts[2].date}} {{posts[2].commentsNum}} {{messages_comments}}

{{posts[3].title}}

{{posts[3].date}} {{posts[3].commentsNum}} {{messages_comments}}

ये कुछ आल टाइम चर्चित

कहानी: दोपहर की धूप - दीप्ति दुबे | Kahani : Dopahar ki dhoop - Dipti Dubey

अरे! देखिए वो यहाँ तक कैसे पहुंच गई... उसने जल्दबाज़ी में बाथरूम का नल बंद कि…

जनता ने चरस पी हुई है – अभिसार शर्मा | Abhisar Sharma Blog #Natstitute

क्या लगता है आपको ? कि देश की जनता चरस पीए हुए है ? कि आप जो कहें वो सर्व…

मुसलमान - मीडिया का नया बकरा ― अभिसार शर्मा #AbhisarSharma

अभिसार शर्मा का व्यंग्य मुसलमान - मीडिया का नया बकरा …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

कायरता मेरी बिरादरी के कुछ पत्रकारों की — अभिसार @abhisar_sharma

मैं सोचता हूँ के मोदीजी जब 5, 10 या 15 साल बाद देश के प्रधानमंत्री नहीं …

साल दर साल

एक साल से पढ़ी जाती हैं

कहानी "आवारा कुत्ते" - सुमन सारस्वत

रेवती ने जबरदस्ती आंखें खोलीं। वह और सोना चाहती थी। परंतु वॉर्ड के बाहर…

चतुर्भुज स्थान की सबसे सुंदर और महंगी बाई आई है

शहर छूटा, लेकिन वो गलियां नहीं! — गीताश्री आखिर बाईजी का नाच शुर…

प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani

premchand ki kahani  प्रेमचंद के फटे जूते premchand ki kahani — …

हिंदी कहानी : उदय प्रकाश — तिरिछ | uday prakash poetry and stories

उदय प्रकाश की कहानी  तिरिछ  तिरिछ में उदय प्रकाश अपने नायक से कहल…

मन्नू भंडारी: कहानी - अकेली Manu Bhandari - Hindi Kahani - Akeli

अकेली (कहानी) ~ मन्नू भंडारी सोमा बुआ बुढ़िया है।  …

गुलज़ार की 10 शानदार कविताएं! #Gulzar's 10 Marvellous Poems

गुलज़ार की 10 बेहतरीन कविताएं! जन्मदिन मनाइए: पढ़िए नज़्म छनकती है...  गीतका…

हिन्दी सिनेमा की भाषा - सुनील मिश्र

आलोचनात्मक ढंग से चर्चा में आयी अनुराग कश्यप की दो भागों में पूरी हुई फिल…

अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika

अनामिका की कवितायेँ   Poems of Anamika …

महादेवी वर्मा की कहानी बिबिया Mahadevi Verma Stories list in Hindi BIBIYA

बिबिया —  महादेवी वर्मा की कहानी  mahadevi verma stories list in hind…