गुलज़ार : क्या कोई फ़लक पर चाँद रखने आ रहा है? #Gulzar


क्या कोई फ़लक पर चाँद रखने आ रहा है? 

गुलज़ार





दियारे शब में क्या कोई फ़लक पर चाँद रखने आ रहा है ?
किसी आशिक़ के आने की ख़बर है ?
या कोई माशूक़ आया है ?

कोई पत्थर हटा है ग़ार से क्या ?
किसी मरियम के दरवाज़े पे फिर दस्तक हुई क्या ?
नजूमी क्या सितारों का तअक्कुब कर रहे हैं ?
या गड़रिये ने किसी बिछड़ी हुई एक भेड़ को आवाज़ दी है ?

मरीज़े-शब अभी तक हिचकियों पर है
न कोई ज़ख्म की पट्टी बदलने आया और न ही दवा बदली
तो क्या बदला था कि तारीख़ बदली है, बरस बदला ?

बोस्कियाना, पाली हिल, बान्द्रा (पश्चिम), मुम्बई-400050
साभार नया ज्ञानोदय
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
अनामिका की कवितायेँ Poems of Anamika
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
Book Review: मानस का हंस की आलोचना — विशाख राठी
शिवानी की कहानी — नथ | 'पिछली सदी से जारी स्त्री स्वाधीनता की खामोश लड़ाई' - मृणाल पाण्डे
Hindi Story: दादी माँ — शिवप्रसाद सिंह की कहानी | Dadi Maa By Shivprasad Singh
राजेंद्र यादव: हमारे समय का कबीर - अनंत विजय | Anant Vijay Remembers Rajendra Yadav
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
कहानी ... प्लीज मम्मी, किल मी ! - प्रेम भारद्वाज