नज़्म : ये टोपी और तिलक-धारी ~ आलोक श्रीवास्तव | Nazm by Aalok Shrivastav


नज़्म : ये टोपी और तिलक-धारी  ~ आलोक श्रीवास्तव | Nazm by Aalok Shrivastav

हाल की घटनाओं पर जाने-माने ग़ज़लकार आलोक श्रीवास्तव की नई नज़्म

ये टोपी और तिलक-धारी

~ आलोक श्रीवास्तव


टोपी, कुर्ता, छोटा जामा
हर रोज़ नमाज़ें पढ़ता है
या सजा-तिलक हर माथे पर
मंदिर में पूजा करता है

तुम कब होते हो वहाँ कभी ?

क्या सोचा है इक बार ज़रा
तुम इस क़ाबिल रह पाए हो
जो उसकी मुक़द्दस चौखट पर
माथा टेके
सजदा करले
ये पूजा भी क्या पूजा है
ये सजदा भी क्या सजदा है

क्या सोचा है इक बार कभी
मायूस है कितना तुमसे वो ?
नाराज़ है किन सीमाओं तक !?

गर नहीं पता तो आज सुनो !

तुम जिसके सामने अब अपने
इन सजदों का पाखंड लिए
और पूजा का प्रपंच लिए
कभी झुकते हो
कभी गिरते हो
वो धर्म-नीति सब साथ लिए
अपनी सच्ची हर बात लिए
कब का परलोक सिधार चुका
ये टोपी और तिलक-धारी
कबका उसको भी मार चुका.


००००००००००००००००
nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार : विजयश्री तनवीर : लोकल ट्रेन, मातृत्व और एक अधूरी मोहब्बत की मार्मिक कहानी
 प्रत्यक्षा के उपन्यास शीशाघर पर राजीव कुमार का गहन पाठ
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
महादेवी वर्मा की कहानी बिबिया Mahadevi Verma Stories list in Hindi BIBIYA
भवतु सब्ब मंगलं  — सत्येंद्र प्रताप सिंह | #विपश्यना
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
बिहारियों का विस्थापन: ‘समय की रेत पर’ की कथा
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
एक चुनाव और क़िस्मत की दो चाबियाँ! - क़मर वहीद नक़वी | Qamar Waheed Naqvi on Election 2014