2017 - #Shabdankan
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साहित्यिक, सामाजिक ई-पत्रिका Shabdankan


काल के कपाल पर धमाल ~ रघुवंश मणि

Thursday, December 28, 2017 1
नेटवर्क फेल हो जायेगा, विश करोगे कब ~ रघुवंश मणि  इस गैरलेखक और गैरविचारक दौर में सोचिये तो बहुत से भय लगे रहते हैं, जिनकी चर्चा...
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यारा दस्तक देत अठारा — अशोक चक्रधर

Wednesday, December 27, 2017 3
चौं रे चम्पू! —अशोक चक्रधर                                         चौं रे चम्पू! नए साल ते का उम्मीद ऐ तेरी?  साल तो पलक...
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रुद्रवीना के भाई सुरबहार वादक डॉ आश्विन दलवी

Friday, December 22, 2017 0
डॉ अश्विन दलवी से सवाल-जवाब राजस्थान ललित कला अकादमी के चेयरमैन डॉ अश्विन दलवी देश के प्रसिद्ध एवं स्थापित सुरबहार वादकों में...
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IGNCA आने पर ख़ुशी होती है : किरण रिजीजू | #Bakula

Friday, December 22, 2017 0
केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू अ विसिनरी सेंट वेनेरेबल कुशक बकुला रिनपोछे के जीवन पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र...
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रिया शर्मा की कहानी "गलीज ज़िंदगी"

Sunday, December 17, 2017 0
भिखारी और वितृष्णा के भाव का अजीब साथ होता है। चोली-दामन का साथ। कभी -कभी दया का कोई उड़ता हुआ छींटा उन पर गिर जाता है किन्तु अक्सर......
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मैनें कब माँगी खुदाई मुस्कुराने के लिए... #shair #ghazal

Friday, December 15, 2017 2
मैनें कब माँगी खुदाई मुस्कुराने के लिए डॉ. एल.जे भागिया ‘ख़ामोश’  की ग़ज़ल     मैनें   कब   माँगी   खुदाई    मुस्कुराने  ...
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अतीत में खुलती खिड़कियों से भविष्य की तलाश - दिल ढूँढ़ता है...! @tak_era

Thursday, December 14, 2017 0
समीक्षा: इरा टाक दिल ढूंढता है – उपन्यास | लेखक - राकेश मढोतरा सपनों और हकीकत की कश्ती में सवार हर इंसान जीवन के समंदर में इधर...
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डॉ सच्चिदानंद जोशी की कहानी — भाई दूज

Thursday, December 14, 2017 0
छोटी कहानी में 'बड़े' मानवीय रिश्तों और मूल्यों को आधुनिक-आवश्यक-सामाजिक बदलावों की महत्ता दिखाते हुए कह पाना और साथ में कहा...
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दिल्ली को लोक रंग से भर रहा है #लोकगाथा_उत्सव

Thursday, November 30, 2017 0
IGNCA आइये बुधवार को अन्य कार्यक्रमों के अलावा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र की हरियाली को हिन्दी के चर्चित गायक मोहित चौहान ...
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इंदिरा दाँगी की कहानी 'गुड़ की डली' | #Hindi @IndiraDangi

Monday, November 27, 2017 1
‘‘अम्मा भूख लगी है !’’ ‘‘अभी तो खाई थी रोटी घण्टा भर पहले !’’ दीपा चुप है किसी गुनहगार की तरह; लेकिन उसकी रिरियाती दृष्टि में भूख़ ...
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