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हिमालयन इकोज़ : कुमाऊँ फेस्टिवल ऑफ़ लिटरेचर एंड आर्ट्स



नसीरुद्दीन शाह से गूंजेगा हिमालयन इकोज़


आज के नवोदय टाइम्स में
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संस्कृति के लिए कुछ करने के नाम पर, संस्कृति की चिंता करना आज का फ़ैशन है। मगर कुछ लोग हैं जिन्होंने इस ज़िम्मेदारी को ओढ़ा हुआ है, और सहेज रहे हैं। जान्ह्वी प्रसाद जिनका बचपन कुमाऊं की पहाड़ियों में बीता है और जो एक फिल्म-निर्माता और लेखिका हैं, उन्हें वहां के पहाड़ों सी सुन्दर और चोटियों सी ऊंची, साहित्य और कला की विरासत का अंदाज़ा है, जो सीमित साधनों के बावजूद, उन्हें दो-दिवसीय ‘हिमालयन इकोज़ : कुमाऊँ फेस्टिवल ऑफ़ लिटरेचर एंड आर्ट्स’ के आयोजन की शक्ति देता है।




पर्यावरण को केंद्र में रखते हुए, 7-8 अक्तूबर को होनेवाले हिमालयन इकोज़ में दोनों दिन पांच-पांच सत्र होंगे। फेस्टिवल का पहला दिन नैनीताल के अैबटस्फोरड हेरिटेज होटल (प्रसाद भवन) में और  दूसरा दिन कॉर्बेट नेशनल पार्क के जंगल में ‘गेटवे रिसॉर्ट्स’ में होना है।

उत्सव में कला और साहित्य प्रेमियों को नसीरुद्दीन शाह, इरा पांडे, अमिताभ पांडे, अमिताभ बाघेल, एम के रंजीत सिंह, जानकी लेनिन, दल्लीप अकोई, दीपक बलानी, प्रेरणा बिंद्रा, वाणी त्रिपाठी, संजीव कुमार शर्मा, सैफ महमूद, हृदेश जोशी जैसे कला-साहित्य विद्वानों के सत्रों का आनंद मिलेगा।

साहित्यकार नमिता गोखले, आयोजक 'जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल', कुमाऊँ फेस्टिवल की सलाहकार हैं, उनका सफल और विशाल अनुभव, यह तय करता है कि हिमालयन इकोज़ का आयोजन, उच्च स्तर का ही रहेगा।

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