जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा — मृदुला गर्ग



जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा : समीक्षा: मृदुला गर्ग : अमर उजाला 

देवदत्त पटनायक एक प्रासंगिक और उपयोगी काम कर रहे हैं

एक सटीक अनुवादः भरत तिवारी की मेरी हनुमान चालीसा

— मृदुला गर्ग





आजकल जब हमारा युवा वर्ग इस हालत में है कि उसे भारतीय दर्शन ही नहीं, मामूली से मामूली उक्ति भी अंग्रेज़ी के माधयम से समझ में आती है तो निश्चित ही, देवदत्त पटनायक एक प्रासंगिक और उपयोगी काम कर रहे हैं। — मृदुला गर्ग

साभार: अमर उजाला (20 मई 2018)
देवदत्त पटनायक समय समय पर हिन्दु धार्मिक क़िताबों का सहज पाठ, अंग्रेज़ी में रूपान्तरित करते रहते हैं। "जय" नाम से महाभारत का संक्षिप्त रूप, उन्होंने अंग्रेज़ी में लिखा है, जो किशोरों को महाभारत से परिचित करवाने में एक कामयाब भूमिका निभाता है। साथ ही भगवद गीता सहित कुछ ग्रन्थों पर वे अंग्रेज़ी में टीका भी लिखते रहे हैं। आजकल जब हमारा युवा वर्ग इस हालत में है कि उसे भारतीय दर्शन ही नहीं, मामूली से मामूली उक्ति भी अंग्रेज़ी के माधयम से समझ में आती है तो निश्चित ही, देवदत्त पटनायक एक प्रासंगिक और उपयोगी काम कर रहे हैं। भले वह जटिल और बहुआयामी को सरल और एकांगी बना कर पेश करें। सोशल मीडिया और व्हाट्स एप की दुनिया तक सीमित युवा वर्ग के लिए कुछ हद तक, उनकी क़िताबें एक बृहत दुनिया खोलती हैं। भरत तिवारी ने मूल अवधी में लिखी हनुमान चालीसा की उनकी अंग्रेज़ी में अनुवाद सहित व्याख्या, "माई हनुमान चालिसा" का हिन्दी में अनुवाद (मेरी हनुमान चालीसा) करके इस कार्य को कुछ और उपयोगी और लोकप्रिय बना दिया है।

शान्ति देती है तो देती है, बात खत्म
माई हनुमान चालीसा ऐसी क़िताब की अनुवाद सहित व्याख्या है, जो मूलतः अत्यन्त सरल-सहज हैः करोड़ों लोगों को मुँहज़बानी याद है। जैसा ख़ुद पटनायक कहते हैं, उसका पाठ उनके विचलित या भयभीत मन को सुकून पहुँचाता है। ज़ाहिर है उसका धार्मिक क्रिया होना या न होना बेमानी है। शान्ति देती है तो देती है, बात खत्म। कोई भी लय-ताल, संगीत, कविता यह काम कर सकती है; ज़रूरत इतनी भर है कि मन में पक्का यक़ीन हो कि वह ऐसा कर सकती है।

भरत तिवारी ने पटनायक की इस सहज व्याख्या का, हिन्दी में सटीक अनुवाद किया गया है। उसके लिए उन्हें साधुवाद। पुस्तक के गद्य भाग के अनुवाद में रवानी भी है और रस भी। लालित्य और सहजता उसके गुण है, जो इस पुस्तक के लिए अनिवार्य भी थे। — मृदुला गर्ग

इसके साथ यह भी तय है कि हर कविता (यहाँ दोहा) के कुछ अर्थ होंते हैं, जिनकी पड़ताल या व्याख्या हर व्यक्ति अपने मन मुताबिक कर सकता है। देवदत्त पटनायक ने हनुमान चालीसा के दोहों की एक अत्यन्त सहज स्वीकार्य व्याख्या की है, जिससे किसी का कोई विरोध नहीं हो सकता। यह अपने में एक सुखद स्थिति है। और सुकून पहुँचाने का वह काम ज़ारी रखती है जो हनुमान चालीसा का पाठ करता आया है।

रवानी भी है और रस भी
भरत तिवारी ने पटनायक की इस सहज व्याख्या का, हिन्दी में सटीक अनुवाद किया गया है। उसके लिए उन्हें साधुवाद। पुस्तक के गद्य भाग के अनुवाद में रवानी भी है और रस भी। लालित्य और सहजता उसके गुण है, जो इस पुस्तक के लिए अनिवार्य भी थे। जहाँ तक दोहों का सवाल है, जिन्हें इस पुस्तक में छन्द कहा गया है और वे छन्द में ही हैं; दिक्कत यह है कि उनका अनुवाद भी अंग्रेज़ी से किया गया है, अवधी से नहीं। सो अंग्रेज़ी मूल और आधुनिक कविता की प्रवृत्ति के अनुरूप, वे मुक्तछन्द में हैं या लय मुक्त हैं। विचलित मन पर क़ाबू पाने के लिए शायद ही कोई उनका फ़ौरी पाठ कर सके या करना अभीष्ट माने। उनकी व्याख्या पढ़ कर अलबत्ता वह विश्वास कर सकता है कि वह मात्र वही नहीं दुहरा रहा, जो रट रखा है; बल्कि उसे पढ़ गुन कर मस्तिष्क में संजो भी रहा है। यही पटनायक की व्याख्या का अभीष्ट है।और यही भरत तिवारी का उसे हिन्दी में अनुवाद के लिए चुनने का भी। आज के युग में जब भावावेग, दुहराव और हिस्टीरिया यानी निम्न स्तरीय पिष्टोक्ति, वायरल हो हो कर, हमारी वैचारिकता को बर्बाद कर रही है; समझ-बूझ कर कुछ करना या उसे विचार में संजोना, काफ़ी अर्थ रखता है। इस नज़र से केवल सहज हिन्दी का ज्ञान रखने वाले असंख्य हिन्दी भाषियों के लिए व्याख्या का यह हिन्दी अनुवाद, मूल्यवान साबित होगा। अलबत्ता दोहे वे अवधी छन्द में ही गुनगुनाएंगे, आख़िर अवधी हमारी उतनी ही अपनी है जितनी हिन्दी; बल्कि स्मृति में सुरक्षित होने के कारण, शायद ज़्यादा करीबी तौर पर।

मेरी हनुमान चालीसा, देवदत्त  पटनायक, अंग्रेजी से अनुवाद : भरत तिवारी, रूपा पब्लिकेशंस, मंजुल प्रकाशन,  मूल्य : 195 रुपये।

मृदुला गर्ग
ई 421(भूतल) जी के-2, नई दिल्ली 110048



(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
००००००००००००००००

nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

दिनेश कुमार शुक्ल की तीन कवितायें | Poems - Dinesh Kumar Shukla (hindi kavita sangrah)
सुंदर बदन सुख सदन श्याम को - मनमोहक - सूरदास का भजन / अश्विनी भिड़े-देशपांडे का गायन
हाशिम अंसारी — सियासत न करिए बरख़ुरदार | Hashim Ansari - Siyasat Na Kariye Barkhurdar
एक पेड़ की मौत: अलका सरावगी की हिंदी कहानी | 2025 पर्यावरण चेतना
एक पराधीन राष्ट्र की सबसे बड़ी और आधुनिक चेतना राष्ट्रवाद ही होगी - प्रियंवद | Renaissance - Priyamvad
विनोद कुमार शुक्ल, रॉयल्टी विवाद और लेखक-प्रकाशक संबंध ~ विनोद तिवारी
उपन्यास समीक्षा: नए कबीर की खोज में - डॉ. रमा | Hindi Novel Review NBT
कहानी: सन्नाटे की गंध - रूपा सिंह
माउथ ऑर्गन - नरेश सक्सेना (hindi kavita sangrah)
ये वो अपने वाला किताबों का मेला नहीं है — राजिन्दर अरोड़ा |  Vishwa Pustak Mela 2023 - Rajinder Arora