हे वलेक्सा एक फ़ड़कता व्यंग्य लिखो ना ~ मलय जैन | Vyangya by Maloy Jain

मलय जैन भाई का लेखन इतना परिपक्व है कि बार-बार पढ़ा जा सकता है. 'जय हिंदी' बोलते हुए पढ़िए उनका ताज़ा क़रारा व्यंग्य! ~ सं० 


Vyangya by Maloy Jain



हे वलेक्सा एक फ़ड़कता व्यंग्य लिखो ना

मलय जैन

जन्म 27 फरवरी 1970 को मध्य प्रदेश के सागर में. (मूल भूमि राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त  की जन्मस्थली चिरगाँव जिला झाँसी). प्रकाशित कृतियां: व्यंग्य उपन्यास ' ढाक के तीन पात (2015), व्यंग्य संग्रह हलक़ का दारोग़ा (2023) राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित। व्यंग्य नाटक लेखन के साथ पोलिश लेखक वलेरियन डोमिंस्की की अंग्रेज़ी कहानियों एवं व्यंग्य रचनाओं के हिन्दी अनुवाद। सम्मान / पुरस्कार •साहित्य अकादमी मप्र  से उपन्यास ढाक के तीन पात पर बाल कृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार • रवींद्रनाथ त्यागी स्मृति सोपान पुरस्कार • सरदार दिलजीत सिंह रील व्यंग्य सम्मान • दुष्यंत पांडुलिपि अलंकरण अंतर्गत कमलेश्वर सम्मान •अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान  •भगवती चरण वर्मा कथा पुरस्कार • ज्ञान चतुर्वेदी राष्ट्रीय व्यंग्य सम्मान 2023 सम्पर्क: सेक्टर K- H50 , अयोध्यानगर , भोपाल मप्र 462041 मोबाईल 9425465140 ई मेल maloyjain@gmail.com 


बलिहारी तकनीक की। जिसका इंतजार था, वह आ ही गई आख़िरकार। ख़ुद व्यंग्य लिखना उनसे कभी सधा नहीं और अब व्यंग्य लेखन एक्सेस वाली तकनीक वलेक्सा आ गई तो सीरी और अलेक्सा की तरह वह वलेक्सा के पीछे भी हाथ होकर पड़ गए, "हे वलेक्सा," उन्होंने वलेक्सा का आवाहन किया। 

"नमस्ते महोदय, मैं व्यंग्य लेखन एक्सेस एआई चैटबॉट वलेक्सा, आपकी क्या मदद कर सकती हूं?"

"हे वलेक्सा, मेरे नाम से एक तड़कता फ़ड़कता व्यंग्य लिखो ना"

"महोदय, आप किस तरह का व्यंग्य लिखवाना पसंद करेंगे?"

"एकदम वैसा जैसा शरद जोशी और परसाई लिखते थे"

"महोदय, राजनीति पर व्यंग्य पसंद करेंगे या सामाजिक विसंगति पर?"

"राजनीति पर भी चलेगा। कोई बांदा नहीं। एक बार ट्राई करो।"

अगले ही पल उनके स्क्रीन पर एक व्यंग्य प्रकट होता है। फड़कता हुआ व्यंग्य पढ़ते ही उनकी बांई आँख फड़कती है, 
 "यह क्या, तुमने तो नेताजी का सीधा नाम लेकर ही व्यंग्य लिख दिया?"

"महोदय, मैं आपको बताना चाहूंगी कि शरद जोशी और परसाई ऐसा ही लिखते थे, तभी वो सीधी मार करता था।"

" अ..अ .. वलेक्सा, यू नो सीधी मार करना तो थोड़ी टेढ़ी खीर है। नेताजी नाराज हो गए तो सीधी मार मेरी खोपड़ी पर पड़ेगी। कोर्ट वोर्ट में घसीट लिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे। तुम ऐसा करो, परसाई और शरद जोशी दोनों को ही छोड़ो। कुछ और ट्राई करो। "

"महोदय, आप कहें तो सामाजिक विसंगति पर व्यंग्य प्रस्तुत करूं"

"हां हां करो, समाज में विसंगतियों की कौन सी कमी है" वह ख़ुश होकर चहके। 

एक मिनट बाद ही स्क्रीन पर अगला व्यंग्य प्रकट होता है। वह उसे जल्दी-जल्दी पढ़ते हैं। उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें आती हैं, 
"यार वलेक्सा यह तो कुछ ज्यादा ही हो गया, इससे तो मेरी ही सोसायटी वाले मुझ पर नाराज हो जाएंगे। पड़ोसी अलग बुरा मान जाएंगे।"

"ठीक है महोदय, सामाजिक विषय छोड़ देते हैं। आप कहें तो धार्मिक विसंगति पर ट्राई करूं? धर्म में तो विसंगतियों की कोई कमी नहीं"

"ध .. ध ... धार्मिक विसंगति पर? तुम तो जानती हो किसी धर्म पर कुछ भी ऐसा वैसा लिखो तो फालतू बखेड़ा खड़ा हो जाता है। पिटने पिटाने की नौबत तक आ जाती है। फ़ालतू रिस्क क्यों ली जाए !"

"ठीक है महोदय, फिर हम सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक इस प्रकार के सारे रिस्की फ़ील्ड्स छोड़ देते हैं। मैं आपको बताना चाहूंगी कि लेखक द्वारा स्वयं पर लिखा गया व्यंग्य बहुत इफेक्टिव होता है। जैसा कि मैंने आपसे अब तक की बातचीत में पाया, आपके स्वयं के भीतर अनेक विसंगतियां हैं। आप कहें तो मैं आपके ऊपर सर्वश्रेष्ठ व्यंग्य लिखकर प्रस्तुत कर सकती हूं।"
"मेरे अपने ऊपर ही व्यंग्य? हें हें हें वलेक्सा, तुम भी मज़ाक करती हो। तुम्हें तो पता है तुम जो भी लिखोगी, वो मेरे नाम से छपेगा। अब कौन इस चक्कर में पड़ता है"

"तो फिर महोदय आप ही बताएं मैं किस विषय पर व्यंग्य लिखकर पेश करूँ !" यदि सिर खुजलाने की सुविधा होती तो वलेक्सा यही करती। 

"अ .. वलेक्सा, ऐसा करो, कुछ फूल पत्ती, चिड़िया विड़िया टाइप लेकर व्यंग्य लिखो।"

"महोदय, मैं आपको बताना चाहूंगी कि ये व्यंग्य के फ़ील्ड्स नहीं हैं। इन विषयों पर सिर्फ रूमानी कविता ही लिखी जाना ठीक होगा जो मेरे वर्क फ़ील्ड में नहीं है।" 

ज़ाहिर है यदि बाल नोचने की सुविधा होती तो वलेक्सा अपने साथ लेखक के भी बाल नोच चुकी होती। 

लेखक महोदय ने अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी और कहा, 
"तो फिर वलेक्सा तुम सजेस्ट करो मैं क्या करूं?"

"महोदय, व्यंग्य लिखना-लिखवाना भूल जाएं और अब यहां से दफा हो जाएं"

स्क्रीन पर वलेक्सा की व्यंग्य से भरी इमोजी प्रकट हुई और फिर वहां वीरानी छा गई। 

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

००००००००००००००००

nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

वैलेंटाइन डे पर विशेष - 'प्रेम के नौ स्वर' - ऋत्विक भारतीय की कविताएं | Valentine Day Poetry in Hindi
असग़र वजाहत का नाटक 'ईश्वर-अल्लाह'  | Asghar Wajahat's Play 'Ishwar-Allah'
आन्तरिक तार्किकता की खोज ~ मृदुला गर्ग की 'सम्पूर्ण कहानियाँ' | Mridula Garg Complete Stories
ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
चित्तकोबरा क्या है? पढ़िए मृदुला गर्ग के उपन्यास का अंश - कुछ क्षण अँधेरा और पल सकता है | Chitkobra Upanyas - Mridula Garg
NDTV Khabar खबर
मैत्रेयी पुष्पा की कहानियाँ — 'पगला गई है भागवती!...'
फ्रैंक हुजूर की इरोटिका 'सोहो: जिस्‍म से रूह का सफर' ⋙ऑनलाइन बुकिंग⋘