जी-जान से पत्रकारिता कर रहे उमेश सिंह फ़ैजाबाद से हैं पिछले कुछ वर्षों से 'अमर उजाला' फैज़ाबाद संस्करण सम्हाल रहे हैं . इलाहबाद वि.वि. …
आगे पढ़ें »सैयद हैदर रज़ा साहब का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए शाम 7:30 बजे तक रज़ा फ़ाउंडेशन में होगा। पता : रज़ा फ़ाउंडेशन सी-4/139 एस ड…
आगे पढ़ें »23, July 2016 भारत के मूर्द्धन्य चित्रकार सैयद हैदर रज़ा का आज सुबह ह्रदय गति रुक जाने से मैक्स साकेत अस्पताल में निधन हो गया। उनके अंतिम समय कवि-मित…
आगे पढ़ें »Manisha Chaudhry (Photo: Bharat Tiwari) Translating Bharat, Reading India On Wednesday 20th July, a humid working day's evening o…
आगे पढ़ें »Jeevan kya Jiya - 4b Namvar Singh जीवन क्या जिया! ( आत्मकथा नामवर सिंह बक़लम ख़ुद का अंश) उधर द्विवेदी जी के विरुद्ध भी कम वि…
आगे पढ़ें »बड़े शहर के निवासी हो चले हम जब — अपने घर-गाँव अपनी जन्मस्थली, जहाँ बचपन बीता हो — जाते हैं तो दिल-ओ-दिमाग़ पर जो प्यारी-सी नमी छा जाती है उसे मैत्रे…
आगे पढ़ें »सचमुच वाजपेयी जी ने विरोध किया था। Jeevan kya Jiya - 4a Namvar Singh जीवन क्या जिया! ( आत्मकथा नामवर सिंह बक़लम ख़ुद का अंश) मै…
आगे पढ़ें »Rasiya Ko Naar Banao Ri रवीन्द्र त्रिपाठी - समीक्षा - नाटक 'लेडीज संगीत' Manglesh Dabral, Ravindra Tripathi, Naresh Saxena…
आगे पढ़ें »हर स्थान कहानियों का स्त्रोत होता है, वह स्थान लेखक की भावना से होता हुआ कहानी में उतर आता है. अस्पताल एक संवेदनशील जगह होती है, लेखक के लिए व…
आगे पढ़ें »Jeevan kya Jiya - 3 Namvar Singh जीवन क्या जिया! ( आत्मकथा नामवर सिंह बक़लम ख़ुद का अंश) अजीब बात है कि लोगों को दुख की बातें, अपमा…
आगे पढ़ें »हद्द बेशरम हो तुम, जब बच्चे छोटे थे तो कभी गोदी में बिठाया तुमने? आज बड़े आये ह…
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