😶 बस 2 मिनट बोलो — असग़र वजाहत #AsgharWajahat



बस 2 मिनट बोलो 

:: असग़र वजाहत


बस 2 मिनट बोलो
2 मिनट में अपना सारा दुख सुख अपनी व्यथा अपना दर्द
अपना भूत और अपना भविष्य
कह डालो
2 मिनट से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगा
क्योंकि तुम्हारी कहानी बहुत छोटी है
जिसकी गर्दन पर खूनी पंजा गड़ा हो वह 2 मिनट से ज्यादा क्या बात करेंगा
वह 2 मिनट क्या बोलेगा
और बोलेगा तो बोलेगा
क्या बोलूं मैं नहीं बोल रहा हूं
यह आवाज  उनकी आवाज है जिन्होंने मेरी आवाज कभी नहीं सुनी
अब मैं कहां बोलता हूं
अब मैं सिर्फ सुनता हूं आदेश
 वे कहते हैं मेरे मुंह में सेब है
और मैंने सोचना छोड़ दिया है क्योंकि सोचने से बोलने पर असर पड़ता है।

जल्दी-जल्दी बोलो
लंबी लाइन लगी है
सभी को बोलना है
सभी को बताना है
सभी को कुछ कहना है
सभी को उनके सामने कुछ कहना है जो तुम्हारे हर शब्द से एक नया अर्थ निकालेंगे
और वह अर्थ तुम्हारा अनर्थ कर देगा
बोले कि तुम फंस जाओगे
चुप रहे तो  मारे जाओगे
2 मिनट भी मत बोलो
क्योंकि 2 मिनट में क़यामत नहीं आ जाएगी
उसके आने में अभी देर है...
दो मिनट का मौन रख लो
दो मिनट का कीमती समय बर्दाद मत करो
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
००००००००००००००००







nmrk5136

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ये पढ़ी हैं आपने?

ईदगाह: मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी | Idgah by Munshi Premchand for Eid 2025
ईसुरी की फाग और बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति : सर्जक से आगे सृजन
चौराहे का पेट्रोल पंप : रीता दास राम की मार्मिक कहानी
 प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई Premchand ke phate joote hindi premchand ki kahani
मन्नू भंडारी: कहानी - एक कहानी यह भी (आत्मकथ्य)  Manu Bhandari - Hindi Kahani - Atmakathy
सीता राम और रावण — हृषीकेश सुलभ की अतिमर्मस्पर्शी कहानी
'रक्षा-बन्धन' — विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक की कहानी | Rakshabandhan - Vishwambharnath Sharma Kaushik
ज़ेहाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल Zehaal-e-miskeen makun taghaful زحالِ مسکیں مکن تغافل
परिन्दों का लौटना: उर्मिला शिरीष की भावुक प्रेम कहानी 2025
भवतु सब्ब मंगलं  — सत्येंद्र प्रताप सिंह | #विपश्यना